कटिहार, 6 अगस्त 2025: बिहार के कटिहार जिले से मानवता को शर्मसार करने वाली एक सनसनीखेज घटना सामने आई है। फलका थाना क्षेत्र के एक गांव में पंचायत के आदेश पर एक प्रेमी युगल को दिनदहाड़े खंभे से बांधकर पीटा गया और फिर पूरे गांव में जूते-चप्पल की माला पहनाकर घुमाया गया।
यह घटना बुधवार सुबह की बताई जा रही है, जिसकी तस्वीरें और वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। स्थानीय प्रशासन की त्वरित कार्रवाई से मामला अब कानून के हाथ में है, लेकिन गांव में अभी भी तनाव बना हुआ है।
कैसे शुरू हुआ मामला?
मिली जानकारी के अनुसार, मंगलवार की रात ग्रामीणों ने एक महिला और पुरुष को आपत्तिजनक हालत में पकड़ लिया। महिला पहले से शादीशुदा और दो बच्चों की मां है, जबकि उसका पति दिल्ली में काम करता है। दूसरी ओर, प्रेमी युवक भी शादीशुदा और दो बच्चों का पिता बताया जा रहा है।
ग्रामीणों ने मामले को “समाज की मर्यादा का उल्लंघन” मानते हुए रात में ही पंचायत बुलाई और बुधवार सुबह सजा सुनाई गई — जिसमें शामिल था:
- युवक के बाल मुंडवा देना
- प्रेमी जोड़े को बिजली के खंभे से बांधकर मारना
- जूते-चप्पल की माला पहनाना
- और फिर पूरे गांव में रस्सियों से बांधकर घुमाना
पुलिस पहुंची मौके पर, पीड़ितों को कराया मुक्त
जैसे ही घटना की खबर प्रशासन तक पहुँची, फलका पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मौके पर पहुंचकर पीड़ित युगल को ग्रामीणों के चंगुल से छुड़ाया और स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया।
थानाध्यक्ष कुंदन कुमार ने बताया कि पीड़ितों की हालत नाजुक थी, लेकिन अब स्थिति नियंत्रण में है।
“घटना की सूचना मिलते ही हम तत्काल मौके पर पहुँचे और दोनों को सुरक्षित निकाला। इलाज जारी है। फिलहाल अब तक कोई लिखित शिकायत नहीं मिली थी, पर स्व-बयान के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है।” – कुंदन कुमार, थानाध्यक्ष, फलका
पंचायत की भूमिका पर सवाल, सरपंच और अन्य फरार
घटना में शामिल गांव के मरार टोला निवासी फागू मुर्मू समेत पंचायत में शामिल कई लोग पुलिस की कार्रवाई से पहले ही फरार हो गए हैं।
कटिहार के पुलिस अधीक्षक शिखर चौधरी ने बताया कि दोषियों की पहचान कर गिरफ्तारी के लिए जगह-जगह छापेमारी की जा रही है।
“घटना गंभीर है। कानून अपने हाथ में लेने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। किसी को बख्शा नहीं जाएगा।” – शिखर चौधरी, एसपी, कटिहार
प्रेमी की गर्भवती पत्नी भी पहुँची थाने
इधर, पीड़ित युवक की गर्भवती पत्नी भी थाने पहुंच गई और पति की करतूत पर नाराजगी जताई। उसका कहना है कि उसका पति तीन दिनों से लापता था, जिसके संबंध में पहले ही लिखित आवेदन थाने में दिया जा चुका था।
प्रश्न जो उठ रहे हैं:
- क्या गांव में सरेआम बर्बरता पंचायत की सहमति से हुई, या भीड़तंत्र का मामला है?
- अगर पीड़ित अपराधी हैं, तो सजा देने का अधिकार किसे है — पंचायत को या न्यायपालिका को?
- महिला के साथ हुई सार्वजनिक अपमानजनक हरकतों की जवाबदेही कौन लेगा?
- क्या स्थानीय पुलिस को पहले से इस विवाद की भनक थी?
कटिहार की यह घटना एक ओर सामाजिक व्यवस्था के पतन की तस्वीर है, तो दूसरी ओर कानून और मानवाधिकार के लिए चुनौती। इस तरह की घटनाएं बता रही हैं कि बिहार में अब भी कई इलाके ऐसे हैं जहाँ ‘भीड़’ कानून से ऊपर सोचती है।
अब सवाल यह है कि क्या सरकार और प्रशासन ऐसे मामलों में महज FIR तक ही सीमित रह जाएगी, या फिर इस बर्बरता का उदाहरण बनाकर दोषियों को सख्त सजा दिलाएगी?


