दरभंगा: बिहार के दरभंगा जिले से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। अपने इकलौते बेटे की संदिग्ध मौत की निष्पक्ष जांच न होने से मानसिक रूप से टूट चुकी एक मां ने जहर खाकर आत्महत्या कर ली। मृतका की पहचान मनीषा कुमारी (35) के रूप में हुई है। वह समस्तीपुर जिले के पानारत वार्ड नंबर-17 निवासी लव साह की पत्नी थीं और इन दिनों दरभंगा के कोतवाली थाना क्षेत्र अंतर्गत भटियारीसराय स्थित अपने मायके में रह रही थीं।
जहर खाने के बाद परिजन उन्हें दरभंगा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (डीएमसीएच) लेकर पहुंचे, जहां मेडिसिन आईसीयू में इलाज के दौरान मंगलवार सुबह उनकी मौत हो गई।
तीन महीने पहले बेटे की संदिग्ध मौत
परिजनों के अनुसार, मनीषा के इकलौते बेटे कश्यप की करीब तीन महीने पहले एक निजी स्कूल के हॉस्टल में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। बेटे की अचानक और रहस्यमय मौत ने मनीषा को अंदर से तोड़ दिया था। परिजनों का आरोप है कि इस मामले में न तो अब तक संतोषजनक जांच हुई और न ही उन्हें न्याय की कोई ठोस उम्मीद नजर आई।
इंसाफ की तलाश में भटकता रहा परिवार
परिजनों ने बताया कि बेटे की मौत के बाद से मनीषा लगातार अवसाद में थीं। वह हर दिन अपने बेटे की तस्वीर देखतीं और उसकी मौत के कारणों को लेकर सवाल करती रहती थीं। परिवार ने कई बार पुलिस और प्रशासन से मिलकर निष्पक्ष जांच की मांग की, आवेदन दिए, लेकिन जांच की प्रगति से वे बेहद निराश थीं।
न्याय की उम्मीद टूटने के साथ ही मनीषा की मानसिक स्थिति लगातार बिगड़ती चली गई।
इलाज के दौरान हुई मौत
बताया जा रहा है कि मनीषा ने सोमवार को जहर खा लिया। तबीयत बिगड़ने पर पहले उन्हें एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां से गंभीर हालत को देखते हुए डीएमसीएच रेफर कर दिया गया। मेडिसिन आईसीयू में इलाज के दौरान मंगलवार सुबह उन्होंने दम तोड़ दिया। मौत की खबर मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया।
पुलिस ने दर्ज किया बयान
कोतवाली थाना पुलिस ने मामले में आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया है। पुलिस ने मृतका के भांजे प्रिंस का बयान दर्ज किया है। घटना की जानकारी मिलते ही पोस्टमार्टम हाउस परिसर में बड़ी संख्या में परिजन और स्थानीय लोग जुट गए।
परिजनों का आरोप, उच्चस्तरीय जांच की मांग
मृतका के परिजन रविशंकर ने बताया कि कश्यप परिवार का इकलौता बेटा था और उसकी मौत के बाद से मनीषा पूरी तरह टूट चुकी थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि बच्चे की मौत के मामले में निष्पक्ष जांच नहीं की गई।
उन्होंने कहा,
“हमने हर दरवाजे पर दस्तक दी, लेकिन कहीं से इंसाफ नहीं मिला। इसी पीड़ा में वह लगातार परेशान रहती थी।”
परिजनों ने कश्यप की मौत की उच्चस्तरीय जांच कराने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
समाज और सिस्टम के लिए गंभीर सवाल
यह मामला न सिर्फ एक परिवार की निजी त्रासदी है, बल्कि जांच प्रक्रिया और सिस्टम की संवेदनशीलता पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। स्थानीय लोगों ने भी घटना पर दुख जताते हुए प्रशासन से मांग की है कि बच्चे की मौत और मनीषा की आत्महत्या—दोनों मामलों की गहराई से जांच की जाए।
फिलहाल पुलिस का कहना है कि सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और दर्ज बयानों के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी। लेकिन यह घटना एक बार फिर यह सवाल छोड़ जाती है कि अगर समय पर निष्पक्ष जांच होती, तो क्या एक मां की जान बचाई जा सकती थी?


