मुंबई में आज मोदी-मैक्रों की अहम बैठक, भारत-फ्रांस संबंधों को मिलेगी नई दिशा

मुंबई। भारत और फ्रांस के बीच रणनीतिक साझेदारी को नई मजबूती देने के उद्देश्य से 17 फरवरी 2026 को मुंबई में प्रधानमंत्री और फ्रांस के राष्ट्रपति के बीच महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक होने जा रही है। राष्ट्रपति मैक्रों 17 से 19 फरवरी तक भारत की आधिकारिक यात्रा पर हैं, जो प्रधानमंत्री मोदी के निमंत्रण पर आयोजित की गई है।

यह राष्ट्रपति मैक्रों का चौथा भारत दौरा है, जबकि मुंबई की उनकी यह पहली आधिकारिक यात्रा मानी जा रही है। अपने दौरे के दौरान वह भारत में आयोजित एआई इम्पैक्ट कॉन्फ्रेंस में भी हिस्सा लेंगे।


बैठक में किन मुद्दों पर होगी चर्चा?

मुंबई स्थित लोक भवन में दोपहर करीब 3:15 बजे दोनों नेताओं के बीच औपचारिक वार्ता तय की गई है। बैठक में भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी की अब तक की प्रगति की समीक्षा की जाएगी।

मुख्य रूप से जिन क्षेत्रों पर चर्चा होगी, उनमें शामिल हैं:

  • रक्षा सहयोग और सैन्य तकनीक
  • अत्याधुनिक एवं उभरती प्रौद्योगिकी
  • स्वच्छ एवं परमाणु ऊर्जा
  • अंतरिक्ष सहयोग
  • समुद्री सुरक्षा और साइबर सुरक्षा
  • इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की रणनीतिक स्थिति
  • जलवायु परिवर्तन और वैश्विक सुरक्षा मुद्दे

बदलते वैश्विक भू-राजनीतिक माहौल में भारत और फ्रांस की भूमिका को लेकर यह बैठक काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।


‘इंडिया-फ्रांस ईयर ऑफ इनोवेशन 2026’ का शुभारंभ

बैठक के बाद शाम करीब 5:15 बजे प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों संयुक्त रूप से ‘इंडिया-फ्रांस ईयर ऑफ इनोवेशन 2026’ की शुरुआत करेंगे। इस कार्यक्रम में दोनों देशों के उद्योग जगत, स्टार्टअप इकोसिस्टम, वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं को संबोधित किया जाएगा।

इस पहल का उद्देश्य:

  • नवाचार को बढ़ावा देना
  • संयुक्त अनुसंधान परियोजनाएं बढ़ाना
  • तकनीकी सहयोग मजबूत करना
  • स्टार्टअप और इंडस्ट्री साझेदारी को विस्तार देना

क्यों अहम मानी जा रही है यह मुलाकात?

पिछले कुछ वर्षों में भारत और फ्रांस के संबंध लगातार मजबूत हुए हैं। रक्षा सौदों, परमाणु ऊर्जा, समुद्री सुरक्षा और हाई-टेक सेक्टर में दोनों देशों के बीच सहयोग तेजी से बढ़ा है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी फ्रांस भारत का प्रमुख रणनीतिक साझेदार रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि मुंबई में होने वाली यह बैठक वैश्विक स्तर पर भारत-फ्रांस साझेदारी को नई गति दे सकती है और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में दोनों देशों की रणनीतिक भूमिका को और मजबूत करेगी।


 

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