HIGHLIGHTS: डांस के नाम पर मासूमियत का सौदा; पुलिस ने तोड़ा मानव तस्करी का सिंडिकेट
- बड़ी कार्रवाई: बैकुंठपुर के तीन अलग-अलग इलाकों में छापेमारी; लक्ष्मीगंज, रेवती और दिघवा दुबौली में पुलिस की दबिश।
- मासूमों की रिहाई: ऑर्केस्ट्रा संचालकों के चंगुल से छुड़ाई गईं 10 किशोरियां; जबरन डांस और शोषण का था आरोप।
- गिरफ्तारी: बंगाल के नॉर्थ 24 परगना का सरगना तारक बड और 2 महिला संचालिकाएं गिरफ्तार।
- साक्ष्य: मौके से 3 मोबाइल फोन और बुकिंग स्लिप बरामद; पुलिस ने दर्ज किया केस नंबर 164/26।
गोपालगंज | 19 मार्च, 2026
गोपालगंज पुलिस ने जिले के बैकुंठपुर थाना क्षेत्र में चल रहे अवैध ऑर्केस्ट्रा और डांस ग्रुप्स के खिलाफ ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ की है। मनोरंजन के नाम पर किशोरियों के शोषण और उनसे जबरन अश्लील डांस कराने वाले रैकेट का पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। एसपी के निर्देश पर बनी विशेष टीम ने एनजीओ (NGO) के साथ मिलकर इस काली दुनिया के दरवाजों को तोड़ा, जहाँ से 10 मासूम जिंदगियों को नई सुबह मिली है।
तीन ठिकानों पर ‘खाकी’ की चोट: लक्ष्मीगंज से दिघवा दुबौली तक हड़कंप
पुलिस की इस विशेष टीम में पटना और गोपालगंज की सामाजिक संस्थाओं के साथ महिला पुलिस अधिकारियों को भी शामिल किया गया था:
- पूजा ऑर्केस्ट्रा (लक्ष्मीगंज): यहाँ से पुलिस ने सबसे पहले 6 किशोरियों को बरामद किया और संचालिका को धर दबोचा।
- नाइट क्वीन रिकॉर्डिंग ग्रुप (रेवती): यहाँ पश्चिम बंगाल के नॉर्थ 24 परगना से आए संचालक तारक बड को 2 नाबालिग किशोरियों के साथ गिरफ्तार किया गया।
- शान ऑर्केस्ट्रा (दिघवा दुबौली): यहाँ भी छापेमारी कर 2 किशोरियों को मुक्त कराया गया और एक अन्य महिला संचालिका को पुलिस ने हिरासत में लिया।
पुलिस ने इन ठिकानों से बुकिंग स्लिप और मोबाइल फोन भी जब्त किए हैं, जिनसे इस रैकेट के नेटवर्क और बुकिंग करने वाले ग्राहकों के चेहरे बेनकाब हो सकते हैं।

VOB का नजरिया: क्या ‘ऑर्केस्ट्रा’ बन गया है आधुनिक दासता का अड्डा?
गोपालगंज पुलिस और समाजसेवी संस्थाओं की यह साझा कोशिश काबिल-ए-तारीफ है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ का मानना है कि बंगाल से लेकर बिहार तक फैले इस सिंडिकेट के तार बहुत गहरे हैं। अक्सर गरीब और मासूम लड़कियों को ‘ग्लैमर’ और ‘अच्छे पैसे’ का लालच देकर इन अंधेरी गलियों में धकेला जाता है, जहाँ मनोरंजन के नाम पर उनका बचपन और गरिमा दोनों लूटी जाती है।
पुलिस की कार्रवाई केवल गिरफ्तारी तक नहीं रुकनी चाहिए; इन मुक्त कराई गई किशोरियों का सही पुनर्वास (Rehabilitation) होना जरूरी है ताकि वे फिर से इस दलदल में न फंसें। साथ ही, उन लोगों पर भी कड़ी नजर रखने की जरूरत है जो शादी-ब्याह और कार्यक्रमों में ऐसे ‘अश्लील’ समूहों को बुक करते हैं। जब तक मांग (Demand) खत्म नहीं होगी, तब तक ऐसे ‘तारक बड’ जैसे लोग मासूमों का सौदा करते रहेंगे।


