HIGHLIGHTS: ‘डांस’ के नाम पर दरिंदगी; आधी रात पुलिस की छापेमारी से कांपा ‘ट्रैफिकिंग’ सिंडिकेट
- बड़ी कामयाबी: बैकुंठपुर के दिघवा-दुबौली, लक्ष्मीगंज और रेवतीथ में एक साथ रेड; 10 लड़कियों को ‘नरक’ से निकाला गया।
- मासूमियत का सौदा: बचाई गई लड़कियों में 9 नाबालिग हैं; उनसे जबरन अश्लील डांस और शारीरिक-मानसिक शोषण कराया जा रहा था।
- मल्टी-स्टेट कनेक्शन: बंगाल (5), सीवान (2), जहानाबाद (1), यूपी (1) और छत्तीसगढ़ (1) से तस्करी कर लाई गई थीं लड़कियां।
- गिरफ्तारी: 1 पुरुष और 2 महिला संचालकों को पुलिस ने दबोचा; बुकिंग रजिस्टर और मोबाइल फोन जप्त।
गोपालगंज | 21 मार्च, 2026
बिहार के गोपालगंज जिले में पुलिस ने ‘ऑर्केस्ट्रा’ के नाम पर चल रहे एक घिनौने मानव तस्करी नेटवर्क को ध्वस्त कर दिया है। जिसे लोग मनोरंजन समझ रहे थे, उसके पीछे मासूम लड़कियों के आंसू और बेबसी की कहानी छिपी थी। सदर एसडीपीओ-2 राजेश कुमार के नेतृत्व में हुई इस कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि ऑर्केस्ट्रा की चकाचौंध के पीछे ‘सफेदपोश’ दरिंदों का एक बड़ा गिरोह सक्रिय है।
आधी रात का ‘ऑपरेशन रेस्क्यू’: जब पुलिस ने घेरा ‘डांस बार’
गुप्त सूचना मिलते ही पुलिस ने एक ‘स्पेशल टास्क फोर्स’ बनाई, जिसमें एसोसिएशन फॉर वोलंटरी एक्शन (पटना) और नारायणी सेवा संस्थान के सदस्य भी शामिल थे।
- छापेमारी की जगह: रेवती बाजार और लक्ष्मी बाजार के ठिकानों पर जब महिला पुलिस कर्मियों के साथ टीम पहुँची, तो वहां का मंजर खौफनाक था।
- जबरन काम: लड़कियों को छोटे कमरों में कैद रखकर उनसे जबरन काम कराया जा रहा था।
- गिरफ्तारी: पुलिस ने मौके से एक मुख्य संचालक और दो महिला संचालिकाओं को गिरफ्तार किया है, जो इन लड़कियों की ‘निगरानी’ करती थीं।
बचाई गई बेटियों का दर्द: बंगाल से लेकर छत्तीसगढ़ तक फैला जाल
मुक्त कराई गई लड़कियों की प्रोफाइल यह बताने के लिए काफी है कि यह गिरोह कितना बड़ा है:
|
राज्य |
लड़कियों की संख्या |
स्थिति |
|---|---|---|
|
पश्चिम बंगाल |
05 |
सबसे ज्यादा लड़कियां यहीं से लाई गईं |
|
बिहार (सीवान/जहानाबाद) |
03 |
स्थानीय नेटवर्क का इस्तेमाल |
|
उत्तर प्रदेश |
01 |
सीमावर्ती इलाकों से तस्करी |
|
छत्तीसगढ़ |
01 |
सुदूर राज्यों से भी कनेक्शन |
कुल: 10 लड़कियां (9 नाबालिग, 1 बालिग)
VOB का नजरिया: क्या ‘ऑर्केस्ट्रा’ अब आधुनिक गुलामी का नया नाम है?
गोपालगंज पुलिस और सामाजिक संगठनों की यह तत्परता सराहनीय है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ का मानना है कि ऑर्केस्ट्रा के नाम पर नाबालिगों का शोषण बिहार के ग्रामीण इलाकों में एक ‘कैंसर’ की तरह फैल रहा है।
अक्सर गरीब परिवारों की बेटियों को ‘डांस और कला’ के नाम पर बहला-फुसलाकर लाया जाता है और फिर उन्हें अश्लीलता के दलदल में धकेल दिया जाता है। सवाल यह है कि रेवती और लक्ष्मी बाजार जैसे व्यस्त इलाकों में यह धंधा इतने दिनों से कैसे फल-फूल रहा था? क्या स्थानीय पुलिस की मिलीभगत के बिना 5 राज्यों से लड़कियों को यहाँ लाकर कैद करना मुमकिन है? एसडीपीओ राजेश कुमार ने आरोपियों को जेल भेजकर एक कड़ा संदेश तो दिया है, लेकिन असली ‘किंगपिन’ (मास्टरमाइंड) अभी भी कानून की पहुँच से बाहर हो सकते हैं। इन बेटियों की काउंसलिंग और पुनर्वास अब प्रशासन की सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए।


