
भागलपुर में इंटर और मैट्रिक की उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन कार्य में लापरवाही बरतने वाले शिक्षकों पर जिला शिक्षा विभाग ने सख्त कार्रवाई का फैसला किया है। विभाग ने गोराडीह प्रखंड के 45 शिक्षकों के वेतन से कटौती करने का निर्णय लिया है। ये शिक्षक मूल्यांकन कार्य के लिए लगाए गए थे, लेकिन निर्धारित तिथि पर ड्यूटी स्थल पर उपस्थित नहीं हुए थे।
जिला शिक्षा विभाग का कहना है कि शिक्षकों से इस मामले में स्पष्टीकरण मांगा गया था, लेकिन समीक्षा के दौरान उनका जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया। इसके बाद वेतन कटौती की प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया गया है।
मूल्यांकन केंद्र पर लगाई गई थी ड्यूटी
जानकारी के अनुसार बिहार विद्यालय परीक्षा समिति की ओर से इंटर और मैट्रिक की कॉपियों के मूल्यांकन का कार्य चल रहा है। इसी क्रम में गोराडीह प्रखंड के 45 शिक्षकों की ड्यूटी सीएमएस स्कूल स्थित मूल्यांकन केंद्र पर लगाई गई थी।
इसके लिए विभाग की ओर से आधिकारिक ड्यूटी चार्ट भी जारी किया गया था। लेकिन निर्धारित तिथि पर शिक्षक मूल्यांकन केंद्र पर योगदान देने नहीं पहुंचे। जब मूल्यांकन केंद्र के केंद्राधीक्षक ने उपस्थिति की समीक्षा की तो कई शिक्षक अनुपस्थित पाए गए।
इसके बाद केंद्राधीक्षक ने अनुपस्थित शिक्षकों की सूची जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (डीपीओ) माध्यमिक शिक्षा के कार्यालय को भेज दी।
शिक्षकों से मांगा गया था स्पष्टीकरण
मामले की जानकारी मिलने के बाद शिक्षा विभाग ने सभी अनुपस्थित शिक्षकों से स्पष्टीकरण मांगा। शिक्षकों ने अपने जवाब में कहा कि उन्हें मूल्यांकन कार्य से संबंधित ड्यूटी पत्र प्राप्त नहीं हुआ था, इसलिए वे निर्धारित तिथि पर मूल्यांकन केंद्र पर नहीं पहुंच सके।
हालांकि जब विभाग ने सभी शिक्षकों के जवाबों की समीक्षा की तो पाया कि अधिकांश शिक्षकों के स्पष्टीकरण लगभग एक जैसे हैं। कई शिक्षकों ने अपने जवाब में यह भी लिखा कि उन्हें रात करीब 11:24 बजे स्पष्टीकरण से संबंधित पत्र मिला था, जिसके बाद उन्होंने अपना जवाब भेजा।
विभाग को स्पष्टीकरण लगा असंतोषजनक
शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि मूल्यांकन कार्य से जुड़ी जानकारी बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के पोर्टल पर पहले से उपलब्ध रहती है। इसके अलावा जिला स्तर से भी संबंधित विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों के माध्यम से ड्यूटी से संबंधित जानकारी भेजी जाती है।
आमतौर पर यह प्रक्रिया मूल्यांकन शुरू होने से लगभग एक सप्ताह पहले पूरी कर ली जाती है, ताकि शिक्षक समय पर अपनी ड्यूटी पर पहुंच सकें।
ऐसे में विभाग को यह बात संदिग्ध लगी कि शिक्षकों को ड्यूटी पत्र नहीं मिला, लेकिन स्पष्टीकरण पत्र मिलते ही सभी ने तुरंत जवाब भेज दिया।
डीपीओ ने वेतन कटौती की दी अनुशंसा
डीपीओ माध्यमिक शिक्षा ने इस मामले को गंभीर मानते हुए कहा कि एक ही प्रखंड के इतने अधिक शिक्षकों का एक साथ मूल्यांकन कार्य से अनुपस्थित रहना अनुशासनहीनता को दर्शाता है। इससे मूल्यांकन प्रक्रिया भी प्रभावित हुई है।
उन्होंने बताया कि शिक्षकों द्वारा दिए गए जवाब असंतोषजनक पाए गए हैं। इसलिए उनके वेतन में कटौती करने के लिए डीपीओ स्थापना को पत्र भेजा जा रहा है, ताकि नियमानुसार कार्रवाई की जा सके।
चूक किस स्तर पर हुई, इसकी भी होगी जांच
इसके साथ ही शिक्षा विभाग ने यह भी जांच करने का निर्णय लिया है कि आखिर ड्यूटी से संबंधित सूचना देने में किस स्तर पर चूक हुई। यदि इस मामले में किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।
फिलहाल विभाग की इस कार्रवाई से शिक्षा विभाग में हलचल मच गई है और अन्य शिक्षकों को भी अपने कर्तव्यों के प्रति सजग रहने का संदेश दिया गया है।


