IAS की बेटी और ओबीसी नेता का बेटा: ‘लव मैरिज से लेकर मंत्री शपथ तक, दीपक-साक्षी की जोड़ी क्यों ट्रेंड कर रही?’

बिहार की नई सरकार में शपथ ग्रहण समारोह के दौरान एक अनोखा नज़ारा देखने को मिला। पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश जींस-शर्ट और क्रॉक्स पहनकर मंत्री पद की शपथ लेने पहुँचे, जिसके बाद वे सोशल मीडिया पर केंद्र में आ गए। बिना चुनाव लड़े सीधे मंत्री बनाए जाने और उनके कैज़ुअल लुक को लेकर ट्विटर, फेसबुक और इंस्टाग्राम पर उन्हें खूब ट्रोल किया जा रहा है।

सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने दीपक की तस्वीरें पोस्ट कर लिखा— “जींस-शर्ट और क्रॉक्स पहनकर शपथ लेने वाले बिहार के पहले मंत्री।” कई कमेंट्स में इसे परिवारवाद का उदाहरण बताया गया— “पति पार्टी का सिंबल लेकर विधायक बनीं, बेटा सीधे मंत्री… लोकतंत्र में राजतंत्र का नया अध्याय।”


राजनीतिक परिवार से ताल्लुक

दीपक प्रकाश एक प्रतिष्ठित राजनीतिक परिवार से हैं।

  • उनकी माँ स्नेहलता 2025 के विधानसभा चुनाव में अपने पति की पार्टी से चुनाव लड़ीं और करीब 25,000 वोटों से जीत हासिल की।
  • पिता उपेन्द्र कुशवाहा राज्यसभा सांसद हैं और 2024 में काराकाट लोकसभा सीट से चुनाव लड़ चुके हैं।
  • दीपक का जन्म 22 अक्टूबर 1989 को हुआ और उन्होंने 2019 में राजनीति में कदम रखा।

2025 के चुनाव में दीपक और उनकी पत्नी साक्षी मिश्रा ने मिलकर स्नेहलता के लिए सक्रिय प्रचार किया, हालांकि दीपक ने स्वयं चुनाव नहीं लड़ा।


दीपक-साक्षी मिश्रा की लव स्टोरी

दीपक ने उत्तर प्रदेश की रहने वाली साक्षी मिश्रा से प्रेम विवाह किया है।

  • साक्षी रिटायर्ड आईएएस एस.एन. मिश्रा की बेटी हैं।
  • साक्षी की माँ का निधन हो चुका है, जबकि एक भाई और दो बहनें हैं।
  • वे यूपी के मिश्रा परिवार से आती हैं, जबकि दीपक ओबीसी समुदाय से हैं—अर्थात यह एक इंटर-कास्ट विवाह है।

शादी के बाद साक्षी ने दोनों परिवारों के नामों को जोड़कर नया नाम अपनाया। 2025 के चुनाव प्रचार में वे पहली बार बड़े स्तर पर सार्वजनिक रूप से दिखाई दीं और महिला सशक्तिकरण, शिक्षा और ग्रामीण विकास से जुड़े मुद्दों पर काफी सक्रिय रहती हैं।


आउटफिट पर मजाक और राजनीति में नई पीढ़ी की एंट्री

दीपक प्रकाश के आउटफिट को लेकर भले ही सोशल मीडिया पर मीम्स और आलोचना की बाढ़ आ गई हो, लेकिन कुछ यूजर्स ने इसे नई पीढ़ी की राजनीति का संकेत भी बताया। कई लोगों का कहना है कि यह परिवर्तन उस सोच को दर्शाता है जिसमें राजनीति में युवा परंपरागत ढर्रे से हटकर अपनी पहचान बना रहे हैं।

बिना चुनाव लड़े मंत्री बनने वाले दीपक और उनकी पत्नी साक्षी सोशल मीडिया पर सक्रिय रहकर लोगों से जुड़ने की कोशिश में हैं, जो आने वाले दिनों में उनकी राजनीतिक भूमिका को और दिलचस्प बना सकता है।


 

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