“काश हमारे समय में होते पीएम मोदी”: कर्णम मल्लेश्वरी ने खेलों में आए बदलावों पर जताई खुशी

नई दिल्ली, 20 मई:भारत की पहली महिला ओलंपिक पदक विजेता कर्णम मल्लेश्वरी ने देश में खेलों को लेकर आए बदलावों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना की है। उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात का मलाल है कि उनके समय में पीएम मोदी सत्ता में नहीं थे, वरना उन्हें जिन चुनौतियों से गुजरना पड़ा, वे संभवतः आसान हो जातीं।

“ईर्ष्या होती है कि मोदी जी हमारे समय में क्यों नहीं थे”

कर्णम मल्लेश्वरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर ‘मोदी स्टोरी’ नामक एक वीडियो साझा करते हुए कहा,

“मुझे पीएम मोदी से ईर्ष्या होती है, इस बात की कि वह हमारे समय में क्यों नहीं थे। काश उस समय भी उनके जैसा नेतृत्व मिला होता, तो खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं और मानसिक संबल मिल पाता।”

2014 के बाद खेलों में आया बदलाव

पूर्व वेटलिफ्टर ने कहा कि वर्ष 2014 के बाद प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में खेलों को राष्ट्रीय प्राथमिकता मिली है। उन्होंने बताया कि अब खिलाड़ियों को हर स्तर पर सहयोग, संसाधन और मनोबल देने वाली नीतियों का लाभ मिल रहा है।

“अगर खिलाड़ी कभी असफल भी हो जाएं, तो प्रधानमंत्री उनसे मिलकर उन्हें यह भरोसा दिलाते हैं कि अगली बार बेहतर होगा।”

व्यक्तिगत अनुभव साझा किया

वीडियो में मल्लेश्वरी ने बताया कि उन्होंने अपनी एकेडमी में प्रशिक्षण ले रहे बच्चों को प्रेरित करने के लिए प्रधानमंत्री से मिलने की इच्छा जाहिर की थी।

“मैंने पीएम को पत्र लिखा, पर मुझे उम्मीद नहीं थी कि वह जवाब देंगे। लेकिन कुछ दिनों बाद प्रधानमंत्री कार्यालय से फोन आया और मेरी उनसे मुलाकात हुई। उस समय मुझे महसूस हुआ कि हमारे पीछे वास्तव में एक मजबूत सपोर्ट सिस्टम है।”

प्रधानमंत्री से मुलाकात को बताया प्रेरणादायक

कर्णम मल्लेश्वरी ने बताया कि प्रधानमंत्री ने न केवल उनके कार्यों की सराहना की बल्कि उन्हें आगे और बेहतर करने के लिए प्रोत्साहित भी किया।

“प्रधानमंत्री ने कहा – ‘आपने देश का नाम रोशन किया।’ उनकी बातों ने मेरा हौसला कई गुना बढ़ा दिया।”

खिलाड़ियों को मिला समर्थन, बढ़ा आत्मविश्वास

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का खेलों के प्रति भावनात्मक और व्यावहारिक जुड़ाव, आज के खिलाड़ियों के लिए एक बड़ी प्रेरणा है।

“अब खिलाड़ियों को लगता है कि देश का शीर्ष नेतृत्व भी उनके साथ खड़ा है – जीत में भी और हार में भी।”


 

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