गया में ‘इंसानियत’ तार-तार! परीक्षा देकर लौट रही छात्रा से गैंगरेप; 4 किशोरों ने नाबालिग को बनाया हवस का शिकार

HIGHLIGHTS:

  • खौफनाक वारदात: स्कूल से घर लौट रही छात्रा का अपहरण कर किया सामूहिक दुष्कर्म।
  • आरोपी: 4 किशोरों (Juveniles) के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज; पूरे इलाके में आक्रोश।
  • कानूनी कार्रवाई: पीड़िता की मेडिकल जांच पूरी, कोर्ट में दर्ज कराया गया बयान।
  • पुलिस अलर्ट: गया पुलिस ने शुरू की धरपकड़; आरोपियों की तलाश में छापेमारी जारी।

कलम थामने वाले हाथों में ‘खौफ’: परीक्षा केंद्र से नरक तक का सफर

गया: मोक्ष की नगरी गया से एक ऐसी शर्मनाक वारदात सामने आई है जिसने पूरे शिक्षा तंत्र और सुरक्षा दावों की पोल खोल दी है। गुरुवार को फतेहपुर थाना क्षेत्र के एक गांव में एक नाबालिग छात्रा, जो अपने भविष्य की सुनहरी यादें लेकर परीक्षा देकर घर लौट रही थी, उसे रास्ते में ही ‘दरिंदों’ ने घेर लिया। चार किशोरों ने उस मासूम को रास्ते से उठाकर एक सुनसान जगह पर ले जाकर गैंगरेप की घटना को अंजाम दिया।

सुनसान जगह और 4 हैवान: मासूम की चीखें दबाने की कोशिश

​जानकारी के मुताबिक, छात्रा जब परीक्षा देकर अकेली घर लौट रही थी, तभी गांव के ही चार किशोरों ने उसे दबोच लिया। वे उसे खींचकर एक झाड़ीनुमा सुनसान जगह पर ले गए और बारी-बारी से दरिंदगी की। वारदात के बाद डरी-सहमी छात्रा ने घर पहुंचकर परिजनों को आपबीती सुनाई, जिसके बाद शुक्रवार को मामले ने तूल पकड़ा और शनिवार (14 मार्च) को इसकी विस्तृत जानकारी सामने आई।

पुलिस की कार्रवाई: स्पीडी ट्रायल की मांग

​घटना की सूचना मिलते ही फतेहपुर थाना पुलिस हरकत में आई।

    • प्राथमिकी: चार नामजद किशोरों के खिलाफ पोक्सो एक्ट (POCSO Act) और सामूहिक दुष्कर्म की धाराओं में केस दर्ज किया गया है।
    • कोर्ट में बयान: छात्रा की मेडिकल जांच सदर अस्पताल में कराई गई है और शनिवार को कोर्ट में उसका बयान (धारा 164 के तहत) दर्ज कराया गया।
    • सर्च ऑपरेशन: पुलिस की टीमें आरोपियों के ठिकानों पर दबिश दे रही हैं। पुलिस का कहना है कि मामला किशोरों से जुड़ा है, इसलिए कानून के दायरे में रहकर सख्त कार्रवाई की जा रही है।

VOB का नजरिया: जब ‘बच्चे ही हैवान’ बनने लगें तो समाज कहाँ जाए?

यह घटना केवल एक अपराध नहीं, बल्कि एक सामाजिक अलार्म है। अगर नाबालिग ही सामूहिक दुष्कर्म जैसी जघन्य वारदात को अंजाम दे रहे हैं, तो हमें अपनी परवरिश और बच्चों तक पहुँच रहे ‘डिजिटल कंटेंट’ पर गंभीरता से सोचना होगा। गया पुलिस को चाहिए कि इस मामले में जीरो टॉलरेंस दिखाए ताकि भविष्य में कोई छात्रा स्कूल से घर लौटते वक्त खौफ के साये में न रहे।

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