हिसुआ में कोहराम! खेत देखने जा रहे दो सगे भाइयों को ट्रैक्टर ने रौंदा; एक ही आंगन से उठीं दो अर्थियां, 5 मासूम बच्चों के सिर से उठा पिता का साया

HIGHLIGHTS: चिता बिगहा गांव में मातम का ‘ब्लैक फ्राइडे’; मौत बनकर दौड़ा बेकाबू ट्रैक्टर

  • बड़ी त्रासदी: नवादा जिले के हिसुआ थाना क्षेत्र अंतर्गत चिता बिगहा गांव में शुक्रवार की शाम हुई दिल दहला देने वाली घटना।
  • सगे भाइयों की मौत: वासुदेव सिंह के दो जवान बेटे—धर्मेंद्र सिंह और विनोद सिंह की मौके पर ही दर्दनाक मौत।
  • हादसे का मंजर: घर से खेत की ओर टहलने निकले थे दोनों भाई, पीछे से आ रहे तेज रफ्तार ट्रैक्टर ने कुचला।
  • कातिल ड्राइवर: वारदात को अंजाम देने के बाद ट्रैक्टर लेकर भागने में सफल रहा चालक; पुलिस की तलाश जारी।
  • बिखर गया परिवार: बड़े भाई धर्मेंद्र के 5 बच्चे हुए अनाथ; छोटे भाई विनोद की अभी शादी भी नहीं हुई थी।

हिसुआ / नवादा | 22 मार्च, 2026

​बिहार के नवादा जिले से एक ऐसी हृदयविदारक खबर सामने आई है, जिसने पूरे इलाके की रूह कपा दी है। हिसुआ थाना क्षेत्र की छतिहर पंचायत स्थित चिता बिगहा गांव में शुक्रवार की ढलती शाम ‘यमराज’ ट्रैक्टर पर सवार होकर आए। खेत की हरियाली देखने घर से निकले दो सगे भाइयों को क्या पता था कि वे अपनी जिंदगी के आखिरी सफर पर निकल रहे हैं। एक बेकाबू ट्रैक्टर ने दोनों भाइयों को इतनी बेरहमी से कुचला कि उनकी मौके पर ही मौत हो गई। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) की इस विशेष रिपोर्ट में जानिए उस काली शाम की दास्तां, जिसने एक हंसते-खेलते परिवार को ताश के पत्तों की तरह बिखेर दिया।

शुक्रवार की वो काली शाम: जब काल बनकर आया ट्रैक्टर

​घटना शुक्रवार (20 मार्च 2026) की देर शाम की है। दिन भर की थकान के बाद चिता बिगहा निवासी वासुदेव सिंह के दोनों पुत्र, धर्मेंद्र सिंह और विनोद सिंह, अपने घर से निकले थे। ग्रामीण परिवेश में अक्सर किसान शाम के समय अपनी फसलों का जायजा लेने खेतों की ओर जाते हैं। दोनों भाई भी बातचीत करते हुए अपने खेत की ओर बढ़ रहे थे।

​अभी वे गांव से थोड़ी ही दूर पहुँचे थे कि पीछे से एक तेज रफ्तार ट्रैक्टर काल बनकर आया। चश्मदीदों के मुताबिक, ट्रैक्टर की रफ्तार इतनी ज्यादा थी कि ड्राइवर का उस पर कोई नियंत्रण नहीं रहा। ट्रैक्टर ने दोनों भाइयों को अपनी चपेट में ले लिया और उन्हें रौंदते हुए आगे निकल गया। चीख-पुकार सुनकर जब तक ग्रामीण मौके पर पहुँचे, तब तक दोनों भाइयों की सांसें थम चुकी थीं। पत्थर दिल ड्राइवर ने पीछे मुड़कर देखना भी मुनासिब नहीं समझा और अंधेरे का फायदा उठाकर ट्रैक्टर लेकर फरार हो गया।

एक घर के दो चिराग बुझे: बिलखता परिवार और अनाथ हुए बच्चे

​इस हादसे ने वासुदेव सिंह के बुढ़ापे की लाठी ही नहीं छीनी, बल्कि दो परिवारों को अंधकार में धकेल दिया है। मृतकों में बड़े भाई धर्मेंद्र सिंह शादीशुदा थे। उनके कंधों पर पूरे परिवार की जिम्मेदारी थी। धर्मेंद्र के पीछे उनकी पत्नी और पांच मासूम बच्चे (तीन बेटियां और दो बेटे) रह गए हैं। इन बच्चों के सिर से पिता का साया उस वक्त उठ गया, जब उन्हें जीवन की सबसे ज्यादा जरूरत थी।

​वहीं, छोटा भाई विनोद सिंह अभी अविवाहित था। उसकी शादी को लेकर घर में चर्चाएं चल रही थीं और सुनहरे भविष्य के सपने बुने जा रहे थे। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। एक ही आंगन से जब दो सगे भाइयों की अर्थियां उठीं, तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें छलक आईं। पूरे गांव में शनिवार और रविवार को चूल्हा तक नहीं जला।

ग्रामीणों का आक्रोश और पुलिस की कार्रवाई

​हादसे के बाद चिता बिगहा गांव में भारी तनाव और आक्रोश देखा जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि ग्रामीण सड़कों पर ट्रैक्टर चालक बिना किसी डर के तेज रफ्तार में वाहन चलाते हैं, जिससे आए दिन ऐसे हादसे होते रहते हैं। घटना की सूचना मिलते ही हिसुआ थाना पुलिस मौके पर पहुँची और शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए नवादा सदर अस्पताल भेजा।

​हिसुआ थानाध्यक्ष ने बताया कि फरार ट्रैक्टर और उसके चालक की पहचान के लिए सघन छापेमारी की जा रही है। पुलिस ने अज्ञात ट्रैक्टर चालक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली है। पुलिस का कहना है कि बहुत जल्द आरोपी पुलिस की गिरफ्त में होगा। हालांकि, पुलिस के ये आश्वासन पीड़ित परिवार के आंसू पोंछने के लिए काफी नहीं हैं।

VOB नजरिया: बेलगाम रफ्तार और प्रशासन की लापरवाही

​’द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) का मानना है कि यह केवल एक ‘हादसा’ नहीं बल्कि एक ‘हत्या’ है, जो लापरवाही के कारण हुई है। ग्रामीण इलाकों में ट्रैक्टरों का व्यावसायिक उपयोग बढ़ गया है, लेकिन उनके चालकों के पास न तो उचित प्रशिक्षण होता है और न ही यातायात नियमों का पालन करने की समझ।

  1. ओवरस्पीडिंग: ग्रामीण सड़कों पर ट्रैक्टरों की गति पर कोई लगाम नहीं है।
  2. सजा का खौफ: ‘हिट एंड रन’ के मामलों में अक्सर ड्राइवर भागने में सफल रहते हैं और बाद में जमानत पर छूट जाते हैं, जिससे उनके मन में कानून का डर खत्म हो गया है।
  3. मुआवजे का सवाल: क्या राज्य सरकार इन 5 अनाथ बच्चों और बूढ़े पिता के लिए विशेष आर्थिक सहायता की घोषणा करेगी? केवल आपदा राहत कोष से मिलने वाली राशि एक परिवार को फिर से खड़ा करने के लिए पर्याप्त नहीं है।

निष्कर्ष: इंसाफ की उम्मीद में चिता बिगहा

​आज जब पूरा बिहार ‘बिहार दिवस’ के जश्न में डूबा है, नवादा का यह गांव अपने दो बेटों की मौत पर मातम मना रहा है। वासुदेव सिंह की पथराई आंखें अब भी अपने बेटों के लौटने का इंतजार कर रही हैं, जबकि धर्मेंद्र की पत्नी के सामने पांच बच्चों के भविष्य का पहाड़ जैसा सवाल खड़ा है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ मांग करता है कि प्रशासन जल्द से जल्द हत्यारे ड्राइवर को पकड़े और पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा दिलाए।

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