मुजफ्फरपुर के सकरा में खौफनाक वारदात: जलते बिस्तर के बीच मिला युवक का बेजान शरीर, जहर और साजिश के आरोप में पत्नी पुलिस की गिरफ्त में

केशोपुर गांव में बैंक की किश्तों और घरेलू कलह का खूनी अंजाम, होम लोन के नोटिस ने घर में लगा दी थी नफरत की आग; सस्पेंस और साजिश के बीच उलझी पुलिस

मुजफ्फरपुर। उत्तर बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के सकरा थाना क्षेत्र में एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने रिश्तों की पवित्रता और समाज के सुरक्षा तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। थाना क्षेत्र के केशोपुर गांव के वार्ड संख्या पांच में सोमवार को एक 32 वर्षीय युवक, अंशु कुमार की अत्यंत संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। इस मौत के पीछे की कहानी जितनी दर्दनाक है, उससे कहीं अधिक पेचीदा और रहस्यमयी है। घटना के बाद से पूरे गांव में तनाव और मातम का माहौल व्याप्त है। बिस्तर जल चुका था, कमरे से धुएं का गुबार उठ रहा था, लेकिन हैरान करने वाली बात यह थी कि मृतक का शरीर आग की लपटों से अछूता था। इस रहस्यमयी विरोधाभास ने पुलिस की जांच को एक ऐसे मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है, जहां हत्या और आत्महत्या के दावों के बीच की लकीर धुंधली होती जा रही है।

​मृतक के परिजनों और ग्रामीणों का स्पष्ट आरोप है कि यह कोई सामान्य दुर्घटना या आत्महत्या नहीं, बल्कि एक सुनियोजित हत्या है। परिजनों के अनुसार, पहले युवक को जहर खिलाया गया और फिर साक्ष्यों को मिटाने के उद्देश्य से उसके कमरे में आग लगा दी गई। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मृतक की पत्नी, स्वीटी भारती को हिरासत में ले लिया है और उससे गहन पूछताछ की जा रही है।

​रहस्यमयी मौत और धुएं का गुबार: क्या है उस दोपहर की हकीकत?

​सोमवार की वह दोपहर केशोपुर गांव के लिए किसी काल की तरह आई। ग्रामीणों और परिजनों ने बताया कि अंशु कुमार के कमरे से अचानक धुएं की मोटी चादर बाहर निकलते हुए देखी गई। धुएं को देख घर में चीख-पुकार मच गई। अंशु के भाई उदय कुमार सिंह और भाभी रेखा ने शोर मचाया, जिसके बाद गांव के दर्जनों लोग वहां इकट्ठा हो गए। जब लोगों ने कमरे का दरवाजा खोला, तो भीतर का नजारा भयावह था। बिस्तर और कमरे के अन्य सामान जलकर राख हो चुके थे।

​ग्रामीणों ने आनन-फानन में आग पर काबू पाया और अंशु को कमरे से बाहर निकाला। उस वक्त वह अचेत अवस्था में था। ताज्जुब की बात यह थी कि जिस बिस्तर पर वह लेटा था, वह जल चुका था, लेकिन अंशु के शरीर पर जलने का कोई गंभीर निशान नहीं था। उसे तत्काल मुजफ्फरपुर शहर स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों ने घंटों तक उसे बचाने की कोशिश की, लेकिन जहर और धुएं के घातक असर के कारण देर शाम उसकी सांसें हमेशा के लिए थम गईं। अस्पताल से जैसे ही मौत की खबर गांव पहुंची, स्थानीय लोगों का गुस्सा भड़क उठा।

​जहर और आग के बीच की खौफनाक साजिश

​अंशु के भाई उदय कुमार सिंह और भाभी रेखा का आरोप है कि उनकी बहू स्वीटी भारती ने ही इस जघन्य कृत्य को अंजाम दिया है। परिजनों का दावा है कि पति-पत्नी के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था। उनका कहना है कि स्वीटी ने पहले अंशु को किसी जहरीले पदार्थ का सेवन कराया और जब वह अचेत हो गया, तो साक्ष्य छुपाने के लिए कमरे में आग लगा दी। आग लगाने का मकसद शायद यह दिखाना था कि अंशु की मौत दम घुटने या जलने से हुई है।

​परिजनों के इन आरोपों को बल इस बात से मिलता है कि मृतक का शरीर झुलसा हुआ नहीं था, जबकि उसके नीचे का बिस्तर बुरी तरह जल चुका था। पुलिस इस तकनीकी पहलू की बारीकी से जांच कर रही है कि आखिर आग के बीच रहते हुए भी शरीर आग की लपटों से कैसे बचा रहा। क्या आग बाद में लगाई गई? क्या अंशु उस वक्त मर चुका था या गहरा बेहोश था? इन सवालों के जवाब तलाशने के लिए फॉरेंसिक टीम की मदद ली जा सकती है। फिलहाल पुलिस ने पत्नी स्वीटी भारती को हिरासत में लेकर सकरा थाने में पूछताछ शुरू कर दी है।

​होम लोन का नोटिस और टूटते रिश्तों की कड़वी कहानी

​इस खूनी ड्रामे के पीछे की जड़ें आर्थिक तंगी और बैंक के बढ़ते दबाव में छिपी हुई हैं। परिजनों ने पुलिस को दी गई जानकारी में बताया कि अंशु कुमार ने कुछ समय पहले अपना घर बनाने के लिए बैंक से होम लोन लिया था। घर तो बन गया, लेकिन उसकी किश्तें (ईएमआई) चुकाना अंशु के लिए भारी पड़ने लगा। पिछले कुछ महीनों से किश्तें जमा नहीं होने के कारण बैंक ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया था।

​हाल ही में बैंक के कर्मियों ने घर पर आकर लोन डिफॉल्ट का नोटिस चिपका दिया था। दीवार पर चिपका वह सरकारी कागज घर के भीतर रोज होने वाले झगड़ों का मुख्य कारण बन गया था। बैंक की कुर्की और बेइज्जती के डर ने पति-पत्नी के बीच के प्रेम को नफरत में बदल दिया था। स्वीटी भारती और अंशु के बीच आए दिन पैसों को लेकर विवाद होता था। पुलिस इस आर्थिक कोण को भी जांच का मुख्य हिस्सा मान रही है कि क्या इसी तनाव के कारण स्वीटी ने ऐसा कदम उठाया या फिर अंशु ने खुद ही जीवनलीला समाप्त करने का प्रयास किया।

​बेबस लाठी और बैंक की किश्तें: हादसे के बाद बदल गई थी जिंदगी

​अंशु कुमार की जिंदगी का संघर्ष आज से दो साल पहले ही शुरू हो गया था। परिजनों के मुताबिक, करीब दो साल पहले एक भीषण सड़क हादसे में अंशु का दाहिना पैर बुरी तरह टूट गया था। कई ऑपरेशनों के बाद भी वह पूरी तरह ठीक नहीं हो पाया था और चलने-फिरने में असमर्थ था। वह अधिकांश समय घर पर ही रहता था। एक कमाऊ सदस्य से अचानक घर पर बोझ बन जाने की मजबूरी ने उसे मानसिक रूप से भी तोड़ दिया था।

​हादसे के बाद आर्थिक स्थिति और बिगड़ती गई। एक तरफ शारीरिक अक्षमता और दूसरी तरफ बैंक का कर्ज, इन दोनों के बीच पिस रहे अंशु के लिए उसका अपना ही घर एक कैदखाना बन गया था। भाभी रेखा का कहना है कि अंशु अपनी लाचारी से दुखी रहता था, लेकिन उसे उम्मीद नहीं थी कि उसकी जीवनसंगिनी ही उसके साथ ऐसा कर सकती है। पुलिस यह भी देख रही है कि क्या अंशु की शारीरिक अक्षमता का फायदा उठाकर उसे जहर देना आसान हो गया था, क्योंकि वह भागने या विरोध करने की स्थिति में नहीं था।

​पुलिस की कार्रवाई और पोस्टमार्टम की चुनौतियां

​सकरा थाना पुलिस ने घटना की जानकारी मिलते ही मौके पर पहुंचकर साक्ष्य संकलन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पुलिस ने घटनास्थल से जले हुए कपड़े, बिस्तर के अवशेष और कमरे के अन्य नमूनों को जब्त कर लिया है। मृतक के भाई और भाभी से लंबी पूछताछ की गई है, जिसमें उन्होंने स्वीटी भारती के खिलाफ कई गंभीर बयान दर्ज कराए हैं।

​थानाध्यक्ष का कहना है कि मामला हत्या और आत्महत्या के बीच उलझा हुआ है। पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट का बेसब्री से इंतजार कर रही है। पोस्टमार्टम से ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि अंशु के पेट में जहर था या नहीं, और उसकी मौत का असली कारण क्या है। यदि विसरा में जहर की पुष्टि होती है, तो हिरासत में ली गई पत्नी पर हत्या का मुकदमा दर्ज होना तय है। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि क्या इस घटना में घर का कोई और सदस्य या बाहरी व्यक्ति भी शामिल था।

​केशोपुर गांव में पसरा सन्नाटा: इंसाफ की गुहार

​इस घटना के बाद केशोपुर गांव के वार्ड पांच में सन्नाटा पसरा हुआ है। मोहल्ले के लोग इस बात से हैरान हैं कि कैसे एक हस्ता-खेलता नौजवान बैंक के कर्ज और घरेलू कलह की बलि चढ़ गया। ग्रामीणों में स्वीटी भारती के खिलाफ काफी आक्रोश देखा जा रहा है। लोगों का कहना है कि यदि बैंक के कर्ज की समस्या थी, तो उसका समाधान मिल बैठकर निकाला जा सकता था, लेकिन इस तरह की क्रूरता समाज को डराने वाली है।

​अंशु की मौत ने एक बार फिर मध्यवर्गीय परिवारों पर बढ़ते बैंकिंग दबाव और उसके कारण होने वाले मानसिक अवसाद की ओर इशारा किया है। फिलहाल, मुजफ्फरपुर पुलिस की टीमें मामले के हर तकनीकी और मानवीय पहलू को खंगाल रही हैं। केशोपुर की मिट्टी अब पुलिस की रिपोर्ट और इंसाफ का इंतजार कर रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि अंशु कुमार की मौत एक हादसा थी, एक विवशता थी या फिर एक बेहद शातिर तरीके से रची गई खूनी साजिश।

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