
नई दिल्ली/दुबई। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर चिंता गहरा गई है। ओमान तट के निकट एक वाणिज्यिक पोत पर हुए हमले में तीन भारतीय नाविक लापता हो गए हैं, जबकि अन्य चालक दल के सदस्यों को सुरक्षित निकाल लिया गया। इस घटना ने न केवल अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा को लेकर नए सवाल खड़े किए हैं, बल्कि भारत और अमेरिका के बीच राजनयिक स्तर पर भी गंभीर चर्चा की स्थिति पैदा कर दी है।
घटना ऐसे समय में सामने आई है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य और उससे जुड़े समुद्री क्षेत्रों में सैन्य गतिविधियां तेज हैं। वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार की सैन्य कार्रवाई का असर पूरी दुनिया पर पड़ता है। ऐसे माहौल में भारतीय चालक दल वाले पोत पर हमला होने से भारत सरकार भी सक्रिय हो गई है।
ओमान तट के पास हुआ हमला
जानकारी के अनुसार, बुधवार सुबह ओमान के तटवर्ती समुद्री क्षेत्र में एक वाणिज्यिक पोत पर हमला हुआ। पोत पर कुल 24 भारतीय चालक दल सदस्य मौजूद थे। हमले के बाद समुद्र में अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया गया, जिसके बाद 21 भारतीयों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
हालांकि तीन चालक दल सदस्य अब भी लापता बताए जा रहे हैं। उनके बारे में कोई ठोस जानकारी नहीं मिल सकी है। समुद्र में लगातार खोज अभियान चलाया जा रहा है। स्थानीय समुद्री एजेंसियों और सुरक्षा बलों के साथ भारतीय अधिकारियों का भी संपर्क बना हुआ है।
लगातार दूसरा हमला, बढ़ी चिंता
यह घटना इसलिए भी गंभीर मानी जा रही है क्योंकि पिछले कुछ दिनों के भीतर भारतीय चालक दल वाले जहाजों पर यह दूसरा बड़ा हमला है। इससे पहले भी इसी समुद्री क्षेत्र में एक अन्य वाणिज्यिक पोत को निशाना बनाया गया था। उस घटना में सभी भारतीय चालक दल सदस्यों को सुरक्षित बचा लिया गया था, लेकिन लगातार दो घटनाओं ने समुद्री सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव का सीधा प्रभाव समुद्री व्यापारिक मार्गों पर पड़ रहा है। कई अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियां पहले ही अपने जहाजों की आवाजाही को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरत रही हैं। बीमा कंपनियों ने भी इस क्षेत्र को उच्च जोखिम वाले समुद्री क्षेत्रों की सूची में शामिल किया हुआ है।
अमेरिका-ईरान तनाव के बीच बढ़ा जोखिम
हाल के दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच बयानबाजी और सैन्य गतिविधियों में तेजी देखी गई है। दोनों देशों के बीच परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय प्रभाव और सुरक्षा मुद्दों को लेकर लंबे समय से मतभेद बने हुए हैं।
विश्लेषकों का कहना है कि जब भी इस क्षेत्र में तनाव बढ़ता है, सबसे अधिक असर समुद्री मार्गों और व्यापारिक जहाजों पर पड़ता है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे व्यस्त ऊर्जा मार्गों में शामिल है, जहां से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति होती है। ऐसे में किसी भी सैन्य गतिविधि या हमले का प्रभाव केवल क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर महसूस किया जाता है।
भारत ने उठाया कड़ा राजनयिक कदम
घटना के बाद भारत सरकार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए राजनयिक स्तर पर सक्रियता बढ़ा दी है। सूत्रों के अनुसार, नई दिल्ली में अमेरिका के वरिष्ठ राजनयिक को तलब कर इस घटना पर भारत की चिंता और विरोध दर्ज कराया गया।
भारतीय अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि किसी भी परिस्थिति में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। सरकार ने घटना से जुड़ी पूरी जानकारी उपलब्ध कराने और लापता भारतीयों की खोज के लिए हरसंभव सहयोग सुनिश्चित करने की मांग की है।
विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने संबंधित देशों और एजेंसियों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखा है। भारत की ओर से यह भी कहा गया है कि समुद्री क्षेत्रों में कार्यरत भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समन्वित प्रयास आवश्यक हैं।
विदेश मंत्रालय ने जताई चिंता
विदेश मंत्रालय ने घटना पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। मंत्रालय ने पुष्टि की कि लापता नाविकों की तलाश जारी है और इस दिशा में स्थानीय प्रशासन तथा नौसैनिक एजेंसियों से निरंतर संपर्क किया जा रहा है।
अधिकारियों ने बताया कि बचाए गए चालक दल सदस्यों की स्थिति पर भी नजर रखी जा रही है। जरूरत पड़ने पर उन्हें अतिरिक्त सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। सरकार ने प्रभावित परिवारों से भी संपर्क स्थापित किया है ताकि उन्हें समय-समय पर जानकारी दी जा सके।
परिवारों की बढ़ी चिंता
तीन भारतीय नाविकों के लापता होने की खबर के बाद उनके परिवारों में चिंता का माहौल है। परिजन लगातार किसी सकारात्मक सूचना का इंतजार कर रहे हैं। कई परिवारों ने सरकार से जल्द से जल्द खोज अभियान तेज करने की अपील की है।
समुद्री क्षेत्र में कार्यरत भारतीयों के परिजनों का कहना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण उनके प्रियजनों की सुरक्षा को लेकर लगातार भय बना रहता है। इस घटना ने उनकी चिंताओं को और बढ़ा दिया है।
वैश्विक व्यापार पर भी असर
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि क्षेत्रीय तनाव इसी तरह बढ़ता रहा तो वैश्विक व्यापार और ऊर्जा बाजारों पर भी असर पड़ सकता है। अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियां अपने मार्ग बदलने पर विचार कर सकती हैं, जिससे माल परिवहन की लागत बढ़ सकती है।
तेल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका भी बाजारों में अस्थिरता पैदा कर सकती है। यही कारण है कि दुनिया के कई देश इस क्षेत्र की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
तलाश अभियान जारी
फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता लापता तीन भारतीय नाविकों का पता लगाना है। समुद्री बचाव दल, स्थानीय प्रशासन और संबंधित एजेंसियां खोज अभियान में जुटी हुई हैं। भारत सरकार भी लगातार स्थिति की निगरानी कर रही है।
इस बीच अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें पश्चिम एशिया की बदलती परिस्थितियों पर टिकी हुई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तनाव कम नहीं हुआ तो समुद्री सुरक्षा से जुड़े जोखिम और बढ़ सकते हैं। वहीं भारत को उम्मीद है कि लापता नाविक जल्द सुरक्षित मिल जाएंगे और इस पूरे मामले की स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी।


