NTPC की राख से ‘महामुक्ति’ की आस! कहलगांव में 9 दिवसीय शिव शक्ति महायज्ञ; भक्ति से मिटेगा प्रदूषण, गूंजेगी शिव पुराण की कथा

खबर के मुख्य बिंदु:

  • भव्य आयोजन: एकचारी रसलपुर के माँ दुर्गा प्रांगण में शुरू हो रहा है 9 दिवसीय महायज्ञ।
  • अनोखा उद्देश्य: इलाके में सुख-शांति के साथ-साथ NTPC की राख (Pollution) से मुक्ति के लिए विशेष प्रार्थना।
  • भक्तों का रेला: पिछले साल की अपार सफलता के बाद इस बार और भी बड़ी भीड़ जुटने की संभावना।
  • धार्मिक अनुष्ठान: शिव शक्ति महायज्ञ के साथ शिव पुराण कथा का होगा रसपान।

कहलगांव (भागलपुर): जहाँ विज्ञान और प्रशासन प्रदूषण के आगे बेबस नज़र आते हैं, वहाँ अब ‘आस्था’ का सहारा लिया जा रहा है। भागलपुर के कहलगांव अनुमंडल अंतर्गत एकचारी रसलपुर में एक अनूठा धार्मिक अनुष्ठान होने जा रहा है। माँ दुर्गा प्रांगण में आयोजित होने वाले 9 दिवसीय शिव शक्ति महायज्ञ का उद्देश्य केवल आध्यात्मिक शांति नहीं, बल्कि इलाके को NTPC की उड़ती राख (Ash Pollution) से निजात दिलाना भी है।

राख के ‘कहर’ के बीच भक्ति की ‘लहर’

​कहलगांव का यह इलाका सालों से एनटीपीसी (NTPC) से निकलने वाली राख की समस्या से जूझ रहा है। स्थानीय ग्रामीणों और आयोजकों का मानना है कि इस महायज्ञ के जरिए सकारात्मक ऊर्जा का संचार होगा और क्षेत्र को प्रदूषण की मार से राहत मिलेगी।

  • परंपरा और भव्यता: हर साल की तरह इस बार भी आयोजन को भव्य रूप दिया गया है। आयोजकों का दावा है कि इस बार का यज्ञ पिछले साल के मुकाबले कहीं अधिक बड़ा होगा।
  • शिव पुराण कथा: महायज्ञ के दौरान विख्यात कथावाचकों द्वारा शिव पुराण का पाठ किया जाएगा, जिसमें हज़ारों श्रद्धालुओं के शामिल होने की उम्मीद है।
  • तैयारी पूरी: पंडाल, रहने की व्यवस्था और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं ताकि दूर-दराज से आने वाले भक्तों को कोई परेशानी न हो।

त्वरित अवलोकन (Quick Facts)

  • यज्ञ का नाम: शिव शक्ति महायज्ञ एवं शिव पुराण कथा
  • स्थान: माँ दुर्गा प्रांगण, एकचारी रसलपुर, कहलगांव
  • अवधि: नौ दिवसीय भव्य आयोजन
  • मुख्य उद्देश्य: क्षेत्र की सुख-शांति और NTPC प्रदूषण से मुक्ति
  • प्रमुख आकर्षण: विशाल पंडाल, आध्यात्मिक प्रवचन और श्रद्धालुओं का हुजूम

VOB का नजरिया: आस्था के साथ पर्यावरण की चिंता!

​एकचारी रसलपुर का यह यज्ञ एक बड़ा सामाजिक संदेश भी दे रहा है। जब किसी धार्मिक आयोजन का उद्देश्य ‘प्रदूषण से मुक्ति’ रखा जाता है, तो यह स्पष्ट करता है कि स्थानीय जनता के लिए धूल और राख अब असहनीय हो चुकी है। यह महायज्ञ न केवल लोगों को आध्यात्मिक रूप से जोड़ेगा, बल्कि प्रदूषण जैसी गंभीर समस्या पर प्रशासन का ध्यान भी आकर्षित करेगा। उम्मीद है कि यज्ञ की आहुतियों के साथ-साथ जिम्मेदारों की नींद भी खुलेगी।

  • Related Posts

    बिहार में भूमि विवाद खत्म करने की बड़ी पहल, डिप्टी सीएम विजय सिन्हा ने तय की डेडलाइन; दिसंबर 2027 तक पूरा होगा विशेष भूमि सर्वेक्षण

    Share Add as a preferred…

    Continue reading
    बिहार में पौधारोपण का नया रिकॉर्ड, एक साल में 40.68 लाख पौधे लगाए गए; हरित आवरण बढ़ाने की दिशा में बड़ी उपलब्धि

    Share Add as a preferred…

    Continue reading