पटना में ‘पार्सल’ से शराब की होम डिलीवरी! ऑटो पार्ट्स के बीच छिपी थी 70 लीटर खेप

HIGHLIGHTS: सुशासन में तस्करी का ‘स्मार्ट’ तरीका

  • बड़ा पर्दाफाश: गर्दनीबाग पुलिस ने पार्सल की आड़ में चल रहे शराब के बड़े सिंडिकेट को ध्वस्त किया।
  • गिरफ्तारी: ऑटो चालक और पार्सल कर्मचारी चढ़े पुलिस के हत्थे; कड़ाई से पूछताछ में उगले कई राज।
  • मॉडस ऑपेरंडी: दूसरे राज्यों से ट्रेन के जरिए आती थी शराब; दानापुर स्टेशन पर उतारकर होती थी सप्लाई।
  • छापेमारी: यारपुर झोपड़पट्टी से भी 145 लीटर विदेशी शराब बरामद; पुलिस ने तोड़ी माफिया की कमर।

तस्करी का ‘फाइल’ रिकॉर्ड: एक नजर में

  • कुल बरामद शराब: 215 लीटर (70 लीटर पार्सल से + 145 लीटर यारपुर झोपड़पट्टी से)।
  • गिरफ्तार मुख्य आरोपी: विजय कुमार (चालक, लखीसराय निवासी) और मनीमोहन सिंह (पार्सलकर्मी, कंकड़बाग निवासी)।
  • जब्त सामान: एक ऑटो, भारी मात्रा में वाहन के पार्ट्स (पंप/फिल्टर आदि) और शराब की बोतलें।
  • तस्करी का रूट: ट्रेन (इंटरस्टेट) -> दानापुर रेलवे स्टेशन -> ऑटो पार्सल -> पटना के स्थानीय इलाके।
  • पुलिस स्टेशन: गर्दनीबाग थाना, पटना।

पटना | 18 मार्च, 2026

​बिहार में शराबबंदी को धता बताने के लिए तस्कर अब ‘कूरियर’ और ‘पार्सल’ सर्विस का सहारा ले रहे हैं। पटना की गर्दनीबाग पुलिस ने सोमवार की रात एक ऐसे ही गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जो ऑटो पार्ट्स के डिब्बों में विदेशी शराब की बोतलें छिपाकर सप्लाई कर रहा था। इस पूरे खेल में रेलवे के पार्सल विभाग से जुड़े लोगों की मिलीभगत की बात भी सामने आ रही है।

चेकिंग में फंसा ‘पार्सल’ वाला ऑटो

​सोमवार की रात पुलिस जब रूटीन गश्त पर थी, तभी एक संदिग्ध ऑटो को रोका गया:

  1. संदेह की वजह: ऑटो में वाहन के पार्ट्स के कई डिब्बे (पार्सल) लदे थे। पुलिस ने जब चालक विजय कुमार से पूछताछ की, तो वह हड़बड़ा गया।
  2. तलाशी: जब डिब्बों को खोला गया, तो पुलिस की आंखें फटी रह गईं। लोहे के कलपुर्जों के नीचे 70 लीटर विदेशी शराब करीने से छिपाई गई थी।
  3. बैकवर्ड लिंकेज: चालक की निशानदेही पर पुलिस ने कंकड़बाग से मनीमोहन सिंह को दबोचा, जो पार्सल विभाग में काम करता है और इस पूरे रैकेट का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है।

ट्रेन से ‘दानपुर’ और फिर पटना में सप्लाई

​पूछताछ में गिरफ्तार धंधेबाजों ने बताया कि शराब की खेप हरियाणा या उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों से ट्रेन के जरिए लाई जाती थी। चेकिंग से बचने के लिए इसे दानापुर स्टेशन पर उतार लिया जाता था और फिर वहां से पार्सल के रूप में ऑटो के जरिए पूरे पटना में खपाया जाता था।

VOB का नजरिया: क्या ‘भीतरघाती’ ही सुशासन के दुश्मन हैं?

​पटना में पार्सल के जरिए शराब मिलना यह बताता है कि तस्करों ने अब तकनीकी और लॉजिस्टिक रास्तों को अपना हथियार बना लिया है। सबसे गंभीर बात यह है कि इस कांड में एक ‘पार्सलकर्मी’ की गिरफ्तारी हुई है। यह दर्शाता है कि जब तक सरकारी विभागों और रेलवे जैसे संस्थानों के भीतर बैठे ‘विभीषण’ सक्रिय रहेंगे, तब तक पूर्ण शराबबंदी एक चुनौती बनी रहेगी। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ का मानना है कि अब पुलिस को दानापुर रेलवे स्टेशन के सीसीटीवी और पार्सल रजिस्टर खंगालने होंगे, ताकि इस चेन में शामिल बड़े चेहरों को बेनकाब किया जा सके।

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