देशभर में होली का पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है। इसी क्रम में बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित बाबा गरीबनाथ धाम में श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ फूलों की होली का भव्य आयोजन किया गया। यह आयोजन वृंदावन की तर्ज पर किया गया, जिसकी जिम्मेदारी सनातन सेवार्थ बिहार एवं रात्रि सेवा दल ने निभाई।
रंग-बिरंगे फूलों के साथ खेली गई होली
मंदिर परिसर में बाबा गरीबनाथ के साथ भक्तों ने गुलाब, गेंदा, चमेली और रजनीगंधा जैसे सुगंधित और रंग-बिरंगे फूलों से होली खेली। पूरा वातावरण “हर-हर महादेव” के जयघोष से गूंज उठा। श्रद्धालु भक्ति रस में डूबे नजर आए और फूलों की वर्षा के बीच उत्सव का आनंद लिया।
भजन-कीर्तन से गूंजा परिसर
आयोजन के दौरान ढोल-नगाड़ों और भजन-कीर्तन पर श्रद्धालु झूमते दिखाई दिए। मंदिर के प्रधान पुजारी पंडित आशुतोष पाठक उर्फ डाबर बाबा ने विधि-विधान से बाबा गरीबनाथ का षोडशोपचार पूजन संपन्न कराया।
पंचामृत स्नान और भव्य महाश्रृंगार
पूजन के उपरांत बाबा को दूध, दही, घी, मधु और शक्कर से पंचामृत स्नान कराया गया। इसके बाद फूलों की माला, अबीर और गुलाल से भव्य महाश्रृंगार किया गया। आरती के पश्चात श्रद्धालुओं के बीच खीर का प्रसाद वितरित किया गया।
सनातन सेवार्थ के संरक्षक प्रभात मालाकार ने बताया कि यह परंपरा कई वर्षों से निभाई जा रही है। वृंदावन की तर्ज पर फूलों की होली खेलने का उद्देश्य यह है कि बाबा गरीबनाथ सभी श्रद्धालुओं के जीवन में फूलों की तरह सुगंध, सौंदर्य और प्रेम का संचार करें।
महाकाल स्वरूप में विशेष श्रृंगार
होलीका दहन के अवसर पर बाबा को उज्जैन महाकालेश्वर स्वरूप में विशेष रूप से सजाया गया था। महाश्रृंगार के बाद महापूजा और महाआरती संपन्न की गई तथा श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण किया गया।

सामाजिक सौहार्द का प्रतीक आयोजन
यह आयोजन सामाजिक सौहार्द और सांस्कृतिक एकता का भी प्रतीक बना। श्रद्धालुओं ने इसे दिव्य और अलौकिक अनुभव बताते हुए कहा कि बाबा के सान्निध्य में फूलों की होली खेलना उनके जीवन के यादगार क्षणों में से एक है।
रंगों के इस पर्व पर मंदिर परिसर पूरी तरह भक्तिभाव और उल्लास से सराबोर नजर आया।


