बिहार विधानमंडल के बजट सत्र के अंतिम दिन सदन में राजनीति से इतर एक बेहद खुशनुमा और यादगार नजारा देखने को मिला। आमतौर पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच दिखने वाली कड़वाहट इस बार होली के रंगों में घुलती नजर आई।
विधायकों ने वैचारिक मतभेद भुलाकर एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाया और गर्मजोशी से होली की शुभकामनाएं दीं। कुछ देर के लिए सदन का माहौल पूरी तरह उत्सवमय हो गया और राजनीतिक बहस की जगह भाईचारे और सौहार्द ने ले ली।
मैथिली ठाकुर के सुरों ने बांधा समां
इस खास मौके पर युवा लोकगायिका और विधायक Maithili Thakur ने अपने मधुर सुरों से कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए। उन्होंने पारंपरिक होली गीत ‘मिथिला में राम खेले होली’ प्रस्तुत कर पूरे विधानमंडल परिसर को भक्ति और उल्लास के रंगों से सराबोर कर दिया।
उनकी गायकी का जादू ऐसा चला कि वहां मौजूद अन्य विधायक भी खुद को रोक नहीं पाए और सुर में सुर मिलाते नजर आए।
एकजुटता और उत्सव का संदेश
महिला और पुरुष विधायकों की बड़ी संख्या में मौजूदगी ने इस पल को और भी खास बना दिया। इस अवसर पर मैथिली ठाकुर ने कहा कि व्यस्तता और काम के दबाव के कारण वह इस बार निजी तौर पर होली को थोड़ा मिस कर रही हैं।
हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि अपने साथी विधायकों के बीच गाना गाना और त्योहार का आनंद लेना उनके लिए बेहद सुखद और यादगार अनुभव रहा।
बजट सत्र के समापन पर यह दृश्य इस बात का संदेश दे गया कि लोकतंत्र में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन त्योहार आपसी सद्भाव और एकता का अवसर बन जाते हैं।


