हिंदी बनाम क्षेत्रीय भाषा विवाद: तमिलनाडु मंत्री के बयान से बिहार में सियासी उबाल

पटना/चेन्नई: तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से पहले एक बार फिर हिंदी बनाम क्षेत्रीय भाषा का मुद्दा गरमा गया है। तमिलनाडु के कृषि मंत्री एमआरके पन्नीरसेल्वम के एक बयान के बाद बिहार की राजनीति में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। उनके कथित बयान को उत्तर भारतीयों के अपमान से जोड़कर देखा जा रहा है, जिस पर एनडीए नेताओं ने कड़ी नाराजगी जताई है।

क्या कहा था पन्नीरसेल्वम ने?

डीएमके नेता एमआरके पन्नीरसेल्वम ने एक कार्यक्रम में कहा था कि उत्तर भारत के लोग केवल हिंदी जानते हैं, इसलिए उन्हें छोटे-मोटे काम ही मिलते हैं, जबकि दक्षिण भारत के लोग क्षेत्रीय भाषा के साथ अंग्रेजी भी जानते हैं, जिससे उन्हें देश-विदेश में बेहतर अवसर मिलते हैं। उन्होंने यह भी टिप्पणी की कि उत्तर भारत के लोग दक्षिण में पानीपुरी बेचने और मजदूरी करने आते हैं।
इस बयान के सामने आते ही बिहार सहित पूरे उत्तर भारत में तीखी प्रतिक्रियाएं शुरू हो गईं।

बिहार में सियासी भूचाल

बिहार के एनडीए नेताओं ने इस बयान को विभाजनकारी बताते हुए डीएमके और कांग्रेस से जवाब मांगा है।

बिहार सरकार के मंत्री दीपक प्रकाश ने कहा—

“इस तरह की बातें देश की एकता को कमजोर करती हैं। किसी भी जिम्मेदार नेता को ऐसी भाषा का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। हम इस बयान की कड़ी निंदा करते हैं।”

जदयू के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार ने तीखा हमला करते हुए कहा—

“बिहार और उत्तर भारत के लोग कहीं बोझ नहीं हैं। तमिलनाडु में रह रहे बिहारी सम्मान के साथ काम कर रहे हैं। चुनावी साल में उपलब्धि बताने की जगह ऐसे बयान दिए जा रहे हैं, जो राजनीतिक दिवालियापन दिखाता है।”

जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने कहा—

“उत्तर भारतीयों ने जहां भी काम किया, वहां की अर्थव्यवस्था को मजबूती दी है। कांग्रेस और डीएमके को इस मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए।”

चिराग पासवान बोले— मर्यादा में हो राजनीति

केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा कि कुछ नेता सिर्फ सुर्खियों में बने रहने के लिए समाज को बांटने वाली भाषा बोलते हैं।

“प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में एनडीए ‘सबका साथ, सबका विकास’ की नीति पर काम कर रहा है। अपनी बात जरूर रखें, लेकिन मर्यादित भाषा में।”

एलजेपीआर और बीजेपी का कड़ा रुख

एलजेपीआर के प्रदेश अध्यक्ष राजू तिवारी ने कहा—

“तमिलनाडु की पूरी व्यवस्था में बड़ी संख्या में बिहारी आईएएस-आईपीएस सेवा दे रहे हैं। बिहार के लोग भीख मांगने नहीं, मेहनत से देश बनाने जाते हैं।”

बीजेपी विधायक मनोज शर्मा ने कहा—

“देश की प्रगति में बिहारियों का बड़ा योगदान है। ऐसी टिप्पणियां अलगाववाद को बढ़ावा देती हैं।”

भाजपा सांसद संजय जायसवाल ने भी कहा—

“डीएमके नेताओं की भाषा उनकी मानसिकता दिखाती है। तमिलनाडु की जनता इसका जवाब देगी।”

‘बिहारी होना गर्व की बात’ – संतोष सुमन

बिहार सरकार के मंत्री संतोष कुमार सुमन ने कहा—

“बिहार आर्यभट्ट, चाणक्य और गौतम बुद्ध की धरती है। यूपीएससी से लेकर हर क्षेत्र में बिहारी अग्रणी हैं। ऐसे बयान मानसिक दिवालियापन का परिचय हैं।”


 

  • Related Posts

    पटना: नियोजन भवन में असिस्टेंट डायरेक्टर 5 लाख रिश्वत लेते गिरफ्तार, विजिलेंस की बड़ी कार्रवाई

    Share Add as a preferred…

    Continue reading
    मुजफ्फरपुर में वाहन जांच के दौरान बवाल, सरपंच से मारपीट के आरोप पर ग्रामीणों का हंगामा

    Share Add as a preferred…

    Continue reading