स्क्रैप से तैयार हुआ हाई-टेक कंप्रेसर: जमालपुर लोको शेड की अनोखी पहल, लागत और ऊर्जा दोनों में बचत

मालदा — पूर्व रेलवे के मालदा मंडल अंतर्गत जमालपुर लोको शेड ने नवाचार और संसाधनों के बेहतर उपयोग की दिशा में एक सराहनीय पहल करते हुए “स्क्रैप टू आर्ट” प्रोजेक्ट के तहत एक अत्याधुनिक कंप्रेसर यूनिट तैयार की है। खास बात यह है कि यह पूरी यूनिट बेकार पड़े लोकोमोटिव के पुर्जों से इन-हाउस तैयार की गई है।

स्क्रैप से बना उपयोगी संसाधन

रेलवे द्वारा अक्सर निष्प्रयोज्य घोषित किए गए लोकोमोटिव के पार्ट्स को बेकार मान लिया जाता है, लेकिन जमालपुर लोको शेड की टीम ने इन्हीं स्क्रैप सामग्री को नए रूप में ढालते हुए एक उपयोगी कंप्रेसर यूनिट विकसित कर दी।

यह पहल न सिर्फ तकनीकी दक्षता को दर्शाती है, बल्कि “वेस्ट टू वेल्थ” की सोच को भी मजबूत करती है।

वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में हुआ उद्घाटन

यह परियोजना मंडल रेल प्रबंधक मनीष कुमार गुप्ता के मार्गदर्शन में पूरी की गई। वहीं, इसका उद्घाटन वरिष्ठ मंडल यांत्रिक अभियंता (डीजल) कृष्ण कुमार दास ने अधिकारियों और कर्मचारियों की मौजूदगी में किया।

अधिकारियों ने इसे रेलवे के लिए एक प्रेरणादायक पहल बताया।

तकनीकी रूप से सक्षम कंप्रेसर यूनिट

नव विकसित कंप्रेसर यूनिट 10 किलोग्राम प्रति वर्ग सेंटीमीटर (kg/cm²) तक संपीड़ित वायु उत्पन्न करने में सक्षम है। इससे रेलवे के कई तकनीकी कार्यों में तेजी और विश्वसनीयता आई है।

इस यूनिट का उपयोग

  • हाइड्रोलिक टॉर्क रिंच संचालन
  • ग्राइंडिंग कार्य
  • पुर्जों की सफाई
    जैसे मेंटेनेंस कार्यों में किया जा रहा है।

डीजल लोको पर निर्भरता खत्म

पहले संपीड़ित वायु की आपूर्ति के लिए डीजल लोकोमोटिव पर निर्भर रहना पड़ता था, जिससे ईंधन की खपत बढ़ती थी और काम में देरी होती थी।

अब इस नई इन-हाउस प्रणाली के आने से

  • डीजल और बिजली की बचत
  • अनावश्यक शंटिंग कार्यों में कमी
  • जनशक्ति की जरूरत में कमी

जैसे कई फायदे मिल रहे हैं।

पर्यावरण और लागत दोनों में लाभ

यह पहल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी अहम मानी जा रही है। स्क्रैप के पुनः उपयोग से न केवल कचरे में कमी आई है, बल्कि नई मशीनरी पर होने वाले खर्च में भी बचत हुई है।

इससे रेलवे का संचालन अधिक हरित (ग्रीन) और लागत प्रभावी बन रहा है।

रेलवे में नवाचार का नया उदाहरण

जमालपुर लोको शेड की यह पहल दिखाती है कि सीमित संसाधनों के बावजूद नवाचार के जरिए बड़े बदलाव संभव हैं।

पूर्व रेलवे का मालदा मंडल इस तरह की पहल के जरिए लगातार नए मानक स्थापित कर रहा है और आने वाले समय में भी ऐसे प्रयोगों को बढ़ावा देने की दिशा में काम जारी रहेगा।

निष्कर्ष

“स्क्रैप टू आर्ट” जैसी पहलें न केवल रेलवे के खर्च को कम करती हैं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और तकनीकी दक्षता को भी बढ़ावा देती हैं। जमालपुर लोको शेड की यह उपलब्धि भारतीय रेलवे के लिए एक प्रेरणादायक मॉडल बनकर उभर रही है।

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