सहकारिता विभाग के पदाधिकारियों के लिए पुणे में उच्चस्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू

बैकुंठ मेहता राष्ट्रीय सहकारी प्रबंध संस्थान में कुल 10 बैचों में होंगे प्रशिक्षित, प्रशासनिक दक्षता और नेतृत्व क्षमता होगी सशक्त

पटना, 05 अगस्त 2025: बिहार सरकार के सहकारिता विभाग ने अपने पदाधिकारियों की कार्यक्षमता, प्रशासनिक दक्षता और नेतृत्व कौशल को सुदृढ़ करने के लिए एक विशेष क्षमता संवर्धन प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत की है। यह प्रशिक्षण देश के प्रतिष्ठित संस्थान बैकुंठ मेहता राष्ट्रीय सहकारी प्रबंध संस्थान, पुणे में आयोजित किया जा रहा है।


पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में कुल 10 बैच होंगे शामिल

सहकारिता विभाग के मुख्य एवं वरीय सहकारिता प्रसार पदाधिकारियों को शामिल करते हुए यह प्रशिक्षण कार्यक्रम कुल 10 बैचों में संपन्न होगा। प्रत्येक बैच में 30-30 पदाधिकारी भाग लेंगे। कार्यक्रम का पहला चरण 04 से 08 अगस्त 2025 तक चल रहा है, जिसमें पहला और दूसरा बैच भाग ले रहा है।

अगले चरणों की तिथियां इस प्रकार हैं:

  • तीसरा और चौथा बैच: 18 से 22 अगस्त 2025
  • पांचवां और छठा बैच: 01 से 05 सितम्बर 2025
  • सातवां और आठवां बैच: 08 से 12 सितम्बर 2025
  • नवां और दसवां बैच: 15 से 19 सितम्बर 2025

प्रशिक्षण से बदलेंगे सहकारी व्यवस्था के संचालन के तरीके

सहकारिता मंत्री डॉ. प्रेम कुमार ने इस पहल पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा:

“सहकारिता विभाग की मजबूती और भविष्य को सुनिश्चित करने के लिए पदाधिकारियों की दक्षता, नवाचार क्षमता और प्रशासनिक कौशल अत्यंत आवश्यक है। पुणे स्थित यह प्रशिक्षण न केवल उन्हें परिष्कृत करेगा, बल्कि उन्हें सहकारी व्यवस्थाओं के बदलते वैश्विक परिदृश्य से भी जोड़ेगा।”


प्रशिक्षण के प्रमुख उद्देश्य:

  • पदाधिकारियों की प्रशासनिक जिम्मेदारी के निर्वहन में कुशलता
  • सहकारी तंत्र की नवीनतम रणनीतियों से परिचय
  • फील्ड स्तर पर नवाचार को बढ़ावा देना
  • नेतृत्व क्षमता और तकनीकी ज्ञान में सुधार
  • राष्ट्रीय स्तर के सहकारी तंत्र से प्रत्यक्ष जुड़ाव

सहकारिता विभाग के अनुसार, प्रशिक्षण के उपरांत पदाधिकारी अपने कार्यक्षेत्र में गुणवत्ता आधारित सुधार, बेहतर निर्णय क्षमता और प्रभावशाली नेतृत्व शैली के साथ कार्य करने में सक्षम होंगे।

इस पहल को सुनियोजित रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसका उद्देश्य सहकारिता विभाग को आधुनिक, उत्तरदायी और नवाचारी दिशा में अग्रसर करना है।


यह समाचार राज्य स्तरीय प्रशासनिक सुधार और सहकारिता के भविष्य के लिए एक मजबूत संकेत देता है, जहां पदाधिकारी केवल आदेशपाल नहीं बल्कि नेतृत्वकर्ता के रूप में भी उभरेंगे।


 

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