भागलपुर: तिलकामांझी थाना क्षेत्र के जवारीपुर इलाके से एक हृदयविदारक खबर सामने आई है। एक पिता, जो पिछले डेढ़ साल से अपनी मासूम बेटी की जिंदगी बचाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहा था, आखिरकार आर्थिक तंगी और मानसिक तनाव के आगे हार गया। 30 वर्षीय जितेंद्र सिंह का शव रविवार सुबह उनके कमरे में फंदे से लटका मिला। यह घटना केवल एक आत्महत्या नहीं, बल्कि एक युवा पिता के उस संघर्ष का अंत है जो बेरोजगारी और बीमारी के दोहरे चक्रव्यूह में फंस गया था।
डेढ़ साल से बिटिया के लिए जंग लड़ रहा था पिता
जितेंद्र की आत्महत्या के पीछे की कहानी बेहद मार्मिक है।
- मासूम की बीमारी: जितेंद्र की दो साल की बेटी ‘चमकी’ (दिमागी बुखार/सीजर) जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रही है।
- इलाज का भारी खर्च: भागलपुर के डॉक्टरों द्वारा जवाब दिए जाने के बाद, जितेंद्र अपनी बेटी का इलाज वेल्लोर में करा रहा था। अब तक इलाज में लाखों रुपये खर्च हो चुके थे।
- छिनी हुई नौकरी: बेटी की देखभाल और बार-बार वेल्लोर जाने की वजह से जितेंद्र की नौकरी भी छूट गई थी। आमदनी बंद थी और खर्चों का पहाड़ बढ़ता जा रहा था।
अप्रैल में फिर जाना था वेल्लोर, पर हिम्मत जवाब दे गई
जितेंद्र के पिता प्रमोद ने बताया कि अप्रैल महीने में फिर से बेटी को लेकर वेल्लोर जाना था। आर्थिक स्थिति इतनी खराब थी कि बुजुर्ग पिता को इस उम्र में भी प्राइवेट जॉब करनी पड़ रही है ताकि घर का खर्च चल सके।
- शनिवार की रात: परिजनों के अनुसार, शनिवार रात जब जितेंद्र घर लौटा तो वह नशे की हालत में था। शायद वह अपने भीतर के तनाव को कम करने की कोशिश कर रहा था। खाना खाकर वह सोने गया, लेकिन सुबह जब मां उसे जगाने पहुँची, तो कमरा अंदर से बंद था। खिड़की से देखने पर पता चला कि जितेंद्र फंदे से लटक चुका है।
मां का आरोप: “मेहनत के बाद भी संतुष्ट नहीं था ससुराल”
जितेंद्र की मां अनिता देवी ने इस त्रासदी में एक और पक्ष उजागर किया है। उन्होंने बताया कि जितेंद्र अपनी बेटी को ठीक करने के लिए दिन-रात एक कर रहा था, लेकिन इसके बावजूद उसकी पत्नी और ससुराल वाले कथित तौर पर उससे संतुष्ट नहीं थे। घटना के वक्त उसकी पत्नी अपने मायके में थी। मां का मानना है कि पारिवारिक असंतोष ने जितेंद्र के मानसिक दबाव को और बढ़ा दिया था।
त्वरित अवलोकन (Quick Facts)
- मृतक: जितेंद्र सिंह (30 वर्ष)।
- निवासी: जवारीपुर, तिलकामांझी (भागलपुर)।
- प्रमुख कारण: बेटी की बीमारी (चमकी), बेरोजगारी और आर्थिक तंगी।
- इलाज का स्थान: वेल्लोर (तमिलनाडु)।
- पुलिस कार्रवाई: तिलकामांझी पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा।
VOB का नजरिया: मध्यमवर्ग के संघर्ष की मौन चीख!
जितेंद्र की मौत समाज और प्रशासन के लिए एक बड़ा सवाल है। जब स्वास्थ्य सेवाएं इतनी महंगी हो जाएं कि एक पिता को अपनी संतान की जान बचाने के लिए खुद की जान देनी पड़े, तो व्यवस्था पर सवाल उठना लाजिमी है। ‘चमकी’ जैसी बीमारियों का इलाज आम आदमी की पहुँच से बाहर होता जा रहा है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) इस दुखद घड़ी में शोकाकुल परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करता है।


