
पटना। चिलचिलाती धूप और उमस के बीच बिहार के मौसम ने एक ऐसी करवट ली है जिसने जेठ की तपिश से पहले ही मानसून जैसी हलचल का अहसास करा दिया है। उत्तर से आती सर्द हवाओं और पूर्व से बढ़ती नमी के मिलन ने प्रदेश के आसमान पर बादलों की ऐसी बिसात बिछाई है कि अब झुलसाने वाली लू की जगह मेघ गर्जना और ठंडी बौछारों ने ले ली है। मौसम विज्ञान केंद्र के ताजा पूर्वानुमानों की मानें तो मंगलवार, 7 अप्रैल 2026 का दिन पूरे राज्य के लिए मौसम के मोर्चे पर काफी उठापटक भरा रहने वाला है। प्रदेश के अधिकतर जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश की प्रबल संभावना है, जिसका सीधा असर पारे पर पड़ेगा और अधिकतम तापमान में दो से चार डिग्री सेल्सियस तक की बड़ी गिरावट दर्ज की जा सकती है।
यह मौसमी बदलाव केवल एक जिले तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी जद में उत्तर से लेकर दक्षिण बिहार तक के तमाम अंचल आ रहे हैं। पिछले कुछ दिनों से जो सूरज आग उगल रहा था, उसकी तल्खी अब बादलों की ओट में गुम होती नजर आ रही है। वातावरण में आई इस तब्दीली ने जहां आम लोगों को उमस भरी गर्मी से राहत की उम्मीद दी है, वहीं कुदरत के इस आक्रामक रुख ने अपने साथ कई सुरक्षात्मक चुनौतियां भी खड़ी कर दी हैं।
पश्चिमी विक्षोभ और बंगाल की खाड़ी की नमी का अनूठा मेल
बिहार के वायुमंडल में आए इस नाटकीय बदलाव के पीछे गहरे वैज्ञानिक कारण छिपे हैं। मौसम विभाग द्वारा सोमवार को जारी विशेष प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, इस समय भारत के उत्तर-पश्चिम हिस्से में एक अत्यंत सक्रिय ‘पश्चिमी विक्षोभ’ बना हुआ है। इस सिस्टम को बंगाल की खाड़ी से निरंतर उठ रही नमी युक्त हवाओं का भरपूर सहारा मिल रहा है। जब हिमालय की तराई से आने वाली शुष्क-ठंडी हवाएं और समुद्र की ओर से आने वाली गर्म-नम हवाएं बिहार के मैदानी इलाकों के ऊपर एक-दूसरे से टकराती हैं, तो वायुमंडल में एक अस्थिरता पैदा होती है।
इसी टकराव के कारण बिहार के ऊपर मौसमी परिस्थितियों का एक ऐसा चक्रव्यूह तैयार हुआ है, जो अगले तीन से चार दिनों तक राज्य के अधिकांश हिस्सों में वर्षा, वज्रपात और तेज आंधी का कारण बनेगा। मौसम वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि इस दौरान हवा की रफ्तार 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। यह गति इतनी अधिक है कि पुराने पेड़ों, बिजली के तारों और कच्चे मकानों को नुकसान पहुंचा सकती है। इसके साथ ही, कई स्थानों पर ओलावृष्टि की भी प्रबल आशंका जताई गई है।
8 और 9 अप्रैल को दिखेगा मौसम का सबसे कड़ा रुख
मौसम विभाग के बुलेटिन में यह स्पष्ट किया गया है कि यद्यपि बदलाव की औपचारिक शुरुआत मंगलवार से हो रही है, लेकिन इस मौसमी तंत्र की तीव्रता बुधवार (8 अप्रैल) और गुरुवार (9 अप्रैल) को अपने चरम पर होगी। इन दो दिनों में मेघ गर्जन और बारिश की तीव्रता सबसे अधिक रहने के आसार हैं। राज्य के कई हिस्सों के लिए ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी किया गया है। प्रशासन को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे बिजली आपूर्ति और जल निकासी जैसी व्यवस्थाओं को चुस्त-दुरुस्त रखें, ताकि अचानक होने वाली तेज बारिश से शहरी और ग्रामीण जनजीवन बुरी तरह प्रभावित न हो।
बीते 24 घंटों की गतिविधियों पर नजर डालें तो मौसम की यह आहट सोमवार को ही महसूस की जाने लगी थी। गया, औरंगाबाद, नवादा, नालंदा, जमुई, मुंगेर, बांका और शेखपुरा जैसे जिलों में एक या दो स्थानों पर गरज-चमक के साथ हल्की वर्षा दर्ज की गई। इन इलाकों में धूल भरी आंधी के बाद हुई छिटपुट बारिश ने तापमान को अचानक नीचे गिरा दिया, जिससे शाम के समय वातावरण में काफी नरमी महसूस की गई।
तापमान की विषमता: भभुआ में गर्मी और मधुबनी में ठंडक
बिहार के विशाल भौगोलिक विस्तार में इस समय तापमान की स्थिति काफी विरोधाभासी बनी हुई है। सोमवार के आंकड़ों को देखें तो राज्य का सबसे अधिक तापमान भभुआ (कैमूर) में 35.8 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जो गर्मी की प्रचंडता का प्रमाण था। इसके ठीक विपरीत, उत्तर बिहार के मधुबनी जिले में न्यूनतम तापमान गिरकर 18.7 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। तापमान का यह उतार-चढ़ाव स्वास्थ्य के लिहाज से काफी संवेदनशील माना जा रहा है। हालांकि, मौसम विभाग का अनुमान है कि मंगलवार को होने वाली व्यापक बारिश के बाद भभुआ जैसे गर्म क्षेत्रों के पारे में भी बड़ी गिरावट आएगी और पूरे प्रदेश में तापमान के स्तर में एकरूपता आएगी।
राजधानी पटना का मिजाज: बादलों की ओट में छिपा सूरज
पटना के निवासियों के लिए सोमवार का दिन राहत भरा रहा। राजधानी के आसमान में सुबह से ही बादलों का डेरा जमा हुआ था, जिसने सूरज की तीखी किरणों को जमीन तक पहुंचने से रोक दिया। इस बादलवाही का सीधा असर शहर के तापमान पर पड़ा। पटना के अधिकतम तापमान में 0.8 और न्यूनतम तापमान में 1.2 डिग्री सेल्सियस की कमी दर्ज की गई। राजधानी का अधिकतम तापमान 34.4 और न्यूनतम तापमान 33.6 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।
मंगलवार के लिए पूर्वानुमान है कि पटना में आंशिक रूप से बादल छाए रहेंगे और जिले के एक-दो स्थानों पर हल्के से मध्यम स्तर की बारिश हो सकती है। पटना और आसपास के क्षेत्रों में हवा की नमी ने उमस को तो कम किया है, लेकिन आने वाले दो दिनों में तेज हवाओं के साथ होने वाली संभावित बारिश शहर की रफ्तार को धीमा कर सकती है। नगर निगम को भी जलभराव की संभावित स्थिति से निपटने के लिए सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
किसानों और आम जनजीवन के लिए विशेष चेतावनी
अप्रैल का महीना रबी फसलों की कटाई और खलिहानों में अनाज के भंडारण का सबसे महत्वपूर्ण समय होता है। ऐसे में 60 किमी की रफ्तार से चलने वाली हवाएं और ओलावृष्टि किसानों के लिए किसी बड़ी मुसीबत से कम नहीं है। गेहूं की फसल जो खेतों में तैयार खड़ी है या खलिहानों में खुले में पड़ी है, उसे इस बारिश से नुकसान पहुंचने की पूरी आशंका है। साथ ही, उत्तर बिहार में आम और लीची के छोटे फलों (टिकोले) के लिए भी ओलावृष्टि घातक साबित हो सकती है।
सावधानी के प्रमुख बिंदु:
- किसान अपनी कटी हुई फसलों को खुले स्थानों से हटाकर तिरपाल या पक्की छतों के नीचे सुरक्षित करें।
- वज्रपात की आशंका होने पर खेतों में काम कर रहे लोग पेड़ों के नीचे या बिजली के खंभों के पास शरण न लें।
- खराब मौसम के दौरान पशुओं को खुले स्थानों से हटाकर पक्के छप्पर के नीचे बांधें।
- फसलों में किसी भी तरह का छिड़काव या सिंचाई का कार्य अगले तीन-चार दिनों के लिए स्थगित कर दें।
- तेज हवाओं के समय पुराने जर्जर मकानों, बिजली के तारों और बड़े होर्डिंग्स से उचित दूरी बनाए रखें।
आने वाले 72 से 96 घंटे बिहार के लिए मौसम के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण रहने वाले हैं। आपदा प्रबंधन विभाग ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश जारी किया है कि वे स्थानीय स्तर पर मौसम की जानकारी का प्रचार-प्रसार करें ताकि जानमाल के नुकसान को न्यूनतम किया जा सके। वज्रपात की घटनाओं को लेकर विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को सचेत रहने को कहा गया है, क्योंकि इस मौसमी तंत्र में आकाशीय बिजली गिरने की आवृत्ति सामान्य से अधिक होने की आशंका है।


