पटना: बिहार विधानसभा के बजट सत्र के प्रश्नकाल के दौरान आज आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के छात्रों की आयु सीमा में छूट का मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया गया।
जेडीयू विधायक देवेश कांत सिंह ने सरकार से सीधे सवाल किया कि क्या बिहार में आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को सरकारी नौकरियों और प्रतियोगी परीक्षाओं में आयु सीमा में छूट देने पर कोई विचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कई EWS छात्र आर्थिक और सामाजिक कारणों से समय पर तैयारी नहीं कर पाते और आयु सीमा पार होने के कारण अवसर से वंचित हो जाते हैं।
विधायक ने सदन में कहा कि राज्य सरकार को इस वर्ग के युवाओं के लिए संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। उन्होंने गुजरात, राजस्थान सहित अन्य राज्यों के उदाहरणों का हवाला देते हुए पूछा कि क्या बिहार सरकार भी इस दिशा में पहल कर सकती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जैसे अन्य वर्गों को आरक्षण और आयु सीमा में छूट का लाभ मिलता है, वैसे ही EWS छात्रों के लिए भी विशेष प्रावधान पर विचार होना चाहिए।
इस पर सामान्य प्रशासन विभाग के प्रभारी मंत्री विजय चौधरी ने जवाब देते हुए कहा कि EWS से संबंधित मूल अधिनियम केंद्र सरकार द्वारा बनाया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस अधिनियम में आयु सीमा में छूट का कोई प्रावधान नहीं है और इसमें संशोधन करने का अधिकार राज्य सरकार के पास नहीं है। राज्य सरकार केवल केंद्र के अधिनियम के अनुरूप नियमावली बनाकर उसे लागू कर सकती है।
मंत्री ने यह भी कहा कि सरकार इस मुद्दे पर संभावनाओं का अध्ययन कर सकती है। उन्होंने बताया कि फिलहाल किसी अन्य राज्य द्वारा EWS वर्ग को आयु सीमा में छूट देने की आधिकारिक जानकारी सरकार के पास नहीं है। यदि भविष्य में केंद्र सरकार इस संबंध में कोई संशोधन करती है या दिशा-निर्देश जारी करती है, तो राज्य सरकार उस पर विचार कर सकती है।
सदन में हुई इस चर्चा से यह स्पष्ट है कि EWS वर्ग के युवाओं की समस्याएं अब राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बन रही हैं। हालांकि फिलहाल राज्य सरकार ने कानूनी सीमाओं का हवाला देते हुए आयु सीमा में छूट देने से इंकार किया है, लेकिन भविष्य में इस विषय पर और बहस और संभावित पहल की संभावना बनी हुई है।


