बिहार में स्वास्थ्य क्रांति: अब इलाज के लिए नहीं जाना होगा दिल्ली-मुंबई; गांव के CHC में स्पेशलिस्ट और सदर अस्पताल बनेंगे ‘सुपर स्पेशियलिटी’

पटना | 25 फरवरी, 2026: बिहार के स्वास्थ्य क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत होने जा रही है। राज्य सरकार ने ‘सात निश्चय-3’ के तहत एक ऐसा मास्टरस्ट्रोक खेला है, जो आने वाले 5 सालों में सूबे की चिकित्सा व्यवस्था की तस्वीर बदल देगा। अब ग्रामीण इलाकों और छोटे शहरों के मरीजों को गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए बड़े महानगरों की ओर नहीं दौड़ना पड़ेगा। सरकार ने राज्य के सभी 534 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) को स्पेशियलिटी और 36 सदर अस्पतालों को सुपर स्पेशियलिटी स्तर पर अपग्रेड करने का मेगा प्लान तैयार किया है।

महानगरों की दौड़ पर लगेगा ‘फुल स्टॉप’

​राज्य स्वास्थ्य समिति के इस निर्णय का सबसे बड़ा लाभ उन गरीबों को मिलेगा जो पैसे और संसाधनों के अभाव में दिल्ली, मुंबई या पटना जैसे बड़े शहरों के चक्कर काटते-काटते टूट जाते हैं। वर्ष 2025 से 2030 के बीच इस योजना को धरातल पर उतारा जाएगा। लक्ष्य स्पष्ट है—मरीज का जिला, मरीज का इलाज।

ब्लॉक स्तर पर तैनात होगी ‘स्पेशलिस्ट’ डॉक्टरों की फौज

​गांवों के करीब स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) को अब केवल रेफरल सेंटर नहीं माना जाएगा। इन्हें ‘स्पेशियलिटी हॉस्पिटल’ के रूप में विकसित किया जाएगा। यहाँ इन विशेषज्ञों की तैनाती होगी:

  • विशेषज्ञ टीम: फिजिशियन, डेंटल सर्जन, आयुष स्पेशलिस्ट और क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट।
  • सपोर्ट सिस्टम: डाइटिशियन, फार्मासिस्ट, ईसीजी (ECG) तकनीशियन, ओटी (OT) असिस्टेंट और डेंटल असिस्टेंट।
  • फायदा: अब मानसिक स्वास्थ्य से लेकर दांतों के जटिल इलाज और फिजियोथेरेपी जैसी सुविधाएं आपके अपने प्रखंड (ब्लॉक) में ही मिलेंगी।

सदर अस्पताल बनेंगे ‘मिनी एम्स’: सुपर स्पेशियलिटी सुविधाओं से होंगे लैस

​जिला मुख्यालयों में स्थित सदर अस्पतालों का कायाकल्प ‘सुपर स्पेशियलिटी’ तर्ज पर किया जाएगा। यहाँ उन विभागों के डॉक्टर बैठेंगे, जिनके लिए पहले केवल बड़े प्राइवेट अस्पतालों का सहारा था:

  • सुपर स्पेशलिस्ट: न्यूरो फिजिशियन, कार्डियोलॉजिस्ट (दिल के डॉक्टर), नेफ्रोलॉजिस्ट (किडनी विशेषज्ञ), यूरोलॉजिस्ट और इंडोक्रोनोलॉजिस्ट।
  • बच्चों के लिए खास: हर जिला अस्पताल में डिस्ट्रिक्ट अर्ली इंटरवेंशन सेंटर (DEIC) की स्थापना होगी, जहाँ जन्म से लेकर 6 वर्ष तक के बच्चों में जन्मजात बीमारियों की पहचान और उनका सटीक इलाज होगा।

पटना से होगी ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ की निगरानी

​अस्पतालों में केवल बिल्डिंग और डॉक्टर ही नहीं होंगे, बल्कि उनकी जवाबदेही भी तय होगी। जिला अस्पतालों के DEIC सेंटरों को पटना स्थित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE) से जोड़ा जाएगा।

  • डिजिटल निगरानी: पटना से विशेषज्ञ नियमित रूप से सुविधाओं और इलाज की गुणवत्ता की मॉनिटरिंग करेंगे।
  • रिसर्च और ट्रेनिंग: सेंटर ऑफ एक्सीलेंस न केवल इलाज की निगरानी करेगा, बल्कि तकनीकी विशेषज्ञों को ट्रेनिंग और नई बीमारियों पर शोध का कार्य भी करेगा।

VOB का नजरिया: कागजों से हकीकत तक का सफर

​नीतीश सरकार का यह फैसला स्वास्थ्य जगत में ‘गेम चेंजर’ साबित हो सकता है। 534 प्रखंडों में विशेषज्ञों की तैनाती और सदर अस्पतालों में न्यूरो-कार्डियो जैसी सुविधाओं का होना किसी सपने से कम नहीं है। हालांकि, सबसे बड़ी चुनौती इन विशेषज्ञों की उपलब्धता और आधुनिक मशीनों का रखरखाव होगी। यदि सरकार इस योजना को समयबद्ध तरीके से लागू कर पाती है, तो बिहार स्वास्थ्य के मामले में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में सबसे बड़ा कदम उठाएगा।

ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार।

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