ससुराल वालों को नशीला पदार्थ पिलाकर ₹2 करोड़ की संपत्ति लेकर फरार; मूक-बधिर पत्नी का भरोसा भी तोड़ा

नहटौर | 27 फरवरी, 2026: कहते हैं कि दामाद घर का मान होता है, लेकिन नहटौर के मोहल्ला कैपतला में एक दामाद ने इस पवित्र रिश्ते को न केवल कलंकित किया, बल्कि विश्वासघात की ऐसी कहानी लिखी जिसे सुनकर रूह कांप जाए। एक शातिर दामाद ने पहले अपनी गलतियों के लिए घड़ियाली आंसू बहाकर ससुराल में जगह बनाई और फिर मौका मिलते ही अपनी मूक-बधिर पत्नी और सास-ससुर को ‘मौत जैसी नींद’ सुलाकर करोड़ों की संपत्ति बटोर ले गया।

माफी का ‘मुखौटा’ और खौफनाक साजिश

​आरोपी नवीन को उसके ससुर संतोष वर्मा ने अपनी इकलौती मूक-बधिर बेटी का सहारा समझकर दोबारा घर में पनाह दी थी। नवीन नशे का आदी था, जिसके कारण उसे दो महीने पहले घर से निकाल दिया गया था। लेकिन वह जानता था कि ससुराल की तिजोरी में उम्र भर की कमाई कहाँ रखी है।

  • गिड़गिड़ाकर वापसी: आठ दिन पहले नवीन ने माफी माँगने का नाटक किया। ससुर का दिल पसीज गया और उन्होंने उसे घर में रहने की अनुमति दे दी।
  • भरोसे का कत्ल: नवीन पछतावे के लिए नहीं, बल्कि पूरी संपत्ति साफ करने के इरादे से लौटा था।

25 फरवरी की वह ‘नशीली’ रात: ₹2 करोड़ की लूट

​बुधवार की रात नवीन ने अपनी घिनौनी योजना को अंजाम दिया। उसने रात के खाने या पीने की चीज में कोई तेज नशीला पदार्थ मिला दिया। जैसे ही उसकी दिव्यांग पत्नी और सास-ससुर बेसुध हुए, नवीन ने घर को खंगालना शुरू किया।

लूट का विवरण:

  • सोना: लगभग आधा किलो (कंगन, चेन और 26 अंगूठियां)।
  • चांदी: भारी-भरकम 40 किलो चांदी।
  • कुल कीमत: ससुर संतोष वर्मा के अनुसार, चोरी गई संपत्ति की कीमत ₹2 करोड़ के आसपास है।

फरार ‘कलयुगी’ दामाद, सदमे में परिवार

​अगली सुबह जब परिवार होश में आया, तो पैरों तले जमीन खिसक गई। नवीन गायब था और घर का कोना-कोना खाली हो चुका था।

    • पुलिस की कार्रवाई: सूचना मिलते ही पुलिस के आला अधिकारी मौके पर पहुँचे। नवीन की तलाश में कई टीमें संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं।
    • पत्नी की बेबसी: नवीन की मूक-बधिर पत्नी गहरे सदमे में है। जिस पति ने सात जन्मों का वादा किया था, वही उसके और उसके माता-पिता के जीवन भर की कमाई लूट ले गया।

VOB का नजरिया: क्या ‘अति-विश्वास’ जोखिम भरा है?

यह घटना उन परिवारों के लिए एक कड़ा सबक है जो किसी अपराधी या नशेड़ी व्यक्ति की हरकतों को नजरअंदाज कर उसे दोबारा मौका देते हैं। ‘पछतावे’ और ‘माफी’ के पीछे अक्सर बड़ी साजिशें छिपी होती हैं। संतोष वर्मा ने मानवीय संवेदनाओं के नाते दामाद को अपनाया, लेकिन नवीन ने यह साबित कर दिया कि लालच के आगे रिश्ते-नाते कुछ भी नहीं होते।

ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार (VOB)।

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