बिहार में बदले मौसम ने किसानों की उम्मीदों पर गहरा असर डाला है। बीते 24 घंटों में आई तेज आंधी, बारिश और कई जगहों पर ओलावृष्टि ने राज्य के अलग-अलग जिलों में भारी तबाही मचाई है। खेतों में तैयार खड़ी फसलें जमीन पर बिछ गई हैं, जिससे लाखों रुपये के नुकसान की आशंका जताई जा रही है।
शिवहर में तबाही, खेतों में बिछी फसल
शिवहर जिले में तेज हवा और बारिश ने सबसे ज्यादा असर गेहूं और मक्का की फसल पर डाला है। सैकड़ों एकड़ में लगी फसल पूरी तरह गिर गई है।
सुबह किसान जब खेतों में पहुंचे, तो लहलहाती फसल की जगह बर्बादी का मंजर देखकर मायूस लौटे। किसानों का कहना है कि यह फसल उनके सालभर की आमदनी का आधार थी, लेकिन अचानक आए तूफान ने सब कुछ खत्म कर दिया।
हालांकि, आम और लीची की फसल को हल्की राहत जरूर मिली है, लेकिन अनाज की फसलों को भारी नुकसान झेलना पड़ा है।
कटिहार में 200 एकड़ फसल तबाह
सीमांचल के कटिहार जिले में हालात बेहद गंभीर हैं। दलन पूरब पंचायत समेत कई इलाकों में करीब 200 एकड़ में लगी मक्का और गेहूं की फसल पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है।
किसानों का कहना है कि उन्होंने इस बार बेहतर उत्पादन की उम्मीद में बीज, खाद और सिंचाई पर भारी खर्च किया था, लेकिन मौसम की मार ने सब कुछ चौपट कर दिया।
कई किसानों ने बैंक से कर्ज लेकर खेती की थी, अब उनके सामने कर्ज चुकाने का संकट खड़ा हो गया है।
पूर्णिया में हजारों एकड़ फसल को नुकसान
पूर्णिया जिले के धमदाहा अनुमंडल क्षेत्र में भी आंधी, बारिश और ओलावृष्टि ने भारी नुकसान पहुंचाया है।
- गेहूं और मक्का की फसल बर्बाद
- आम, लीची और केले के बागानों को नुकसान
- हजारों एकड़ में फसल नष्ट होने की आशंका
किसानों का कहना है कि पिछले साल भी इसी तरह की आपदा आई थी, लेकिन अब तक मुआवजा नहीं मिला। इस बार भी अगर राहत नहीं मिली, तो खेती करना मुश्किल हो जाएगा।
मुजफ्फरपुर में ओलावृष्टि से बढ़ा नुकसान
मुजफ्फरपुर जिले में भी आंधी और बारिश के साथ ओलावृष्टि ने किसानों की परेशानी बढ़ा दी है। गायघाट, कटरा और मीनापुर क्षेत्रों में सबसे ज्यादा नुकसान की खबर है।
- गेहूं और आलू की तैयार फसल बर्बाद
- आम और लीची के मंजर को नुकसान
- कई जगह खेतों में पूरी फसल गिर गई
किसानों का कहना है कि उन्होंने कर्ज लेकर खेती की थी, लेकिन अब फसल बर्बाद होने से आर्थिक संकट गहरा गया है।
किसानों पर बढ़ा आर्थिक दबाव
लगातार हो रहे नुकसान से किसानों के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है।
- खेती में लगी लागत डूब गई
- कर्ज चुकाने की चिंता बढ़ी
- परिवार के खर्च चलाना मुश्किल
कई किसानों ने कहा कि फसल कटाई से ठीक पहले यह आपदा आई, जिससे उनकी सारी मेहनत पर पानी फिर गया।
प्रशासन ने शुरू कराया सर्वे
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में फसल क्षति का सर्वे कराने के निर्देश दिए हैं। कृषि पदाधिकारियों को रिपोर्ट तैयार करने को कहा गया है, जिसके आधार पर आगे मुआवजा और राहत की प्रक्रिया तय होगी।
मुआवजे की आस में किसान
फिलहाल किसान सरकार से जल्द मुआवजे की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि अगर समय पर राहत नहीं मिली, तो उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा।
बदलता मौसम बना बड़ी चुनौती
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की अचानक मौसमीय घटनाएं अब लगातार बढ़ रही हैं, जो खेती को जोखिम भरा बना रही हैं। ऐसे में किसानों के लिए बीमा और त्वरित राहत व्यवस्था बेहद जरूरी हो गई है।
कुल मिलाकर, बिहार में आई इस आंधी-बारिश ने एक बार फिर किसानों की कमजोर स्थिति को उजागर कर दिया है। अब सबकी नजर सरकार की राहत और मुआवजा नीति पर टिकी हुई है।


