
HIGHLIGHTS:
- बड़ी त्रासदी: दोपहर का खाना खाते ही बिगड़ी 100 से अधिक पुलिसकर्मियों की तबीयत।
- इमरजेंसी: बांका सदर अस्पताल में जवानों की कतार; उल्टी और दस्त से बेहाल हुए सुरक्षाकर्मी।
- संदिग्ध जहर: शुरुआती आशंका— चने में सल्फास (Sulphas) की गोली मिलने से हुई ‘फूड पॉइजनिंग’।
- प्रशासनिक हलचल: डीएम नवदीप शुक्ला और एसपी उपेंद्रनाथ वर्मा ने अस्पताल में डाला डेरा।
थाली में ‘मौत’ का सामान? बांका पुलिस लाइन में मची चीख-पुकार
बांका: बांका पुलिस लाइन से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है, जहाँ शुक्रवार को दोपहर का भोजन ‘जहर’ साबित हुआ। फ्राइड राइस और चने का छोला खाने के कुछ ही मिनटों बाद एक-एक कर जवान जमीन पर गिरने लगे। किसी को पेट दर्द की शिकायत थी, तो कोई लगातार उल्टियां कर रहा था। देखते ही देखते 100 से अधिक जवानों की हालत बिगड़ गई, जिसके बाद पूरे पुलिस महकमे में अफरा-तफरी मच गई।
[घटना का ‘X-Ray’: क्या, कब और कैसे?]
विवरण | जानकारी |
|---|---|
घटना स्थल | पुलिस लाइन, बांका |
बीमार जवानों की संख्या | 100 से अधिक |
दोपहर का मेनू | फ्राइड राइस और चना छोला |
मुख्य लक्षण | पेट दर्द, तीव्र उल्टी और दस्त |
आशंका | चने में सल्फास की गोली का मिलना |
सदर अस्पताल बना ‘युद्ध क्षेत्र’: डीएम-एसपी ने संभाला मोर्चा
एक साथ 100 से ज्यादा जवानों के अस्पताल पहुँचने से सदर अस्पताल की व्यवस्थाएं चरमरा गईं। सूचना मिलते ही जिलाधिकारी नवदीप शुक्ला और एसपी उपेंद्रनाथ वर्मा तुरंत इमरजेंसी वार्ड पहुंचे।
- डीएम के निर्देश: जिलाधिकारी ने डॉक्टरों की स्पेशल टीम को मुस्तैद रहने और इलाज में किसी भी तरह की कोताही न बरतने का कड़ा आदेश दिया है।
- एसपी की निगरानी: एसपी खुद जवानों के पास जाकर उनकी स्थिति का जायजा ले रहे हैं और मेस (Mess) के स्टाफ से पूछताछ की जा रही है।
सल्फास की ‘साजिश’ या बड़ी लापरवाही?
सबसे चौंकाने वाला खुलासा चने को लेकर हो रहा है। मेस में इस्तेमाल किए गए चने में सल्फास की गोली (जो अक्सर अनाज को कीड़ों से बचाने के लिए रखी जाती है) के मिल जाने की आशंका जताई जा रही है। अगर यह सच है, तो यह विभाग की बहुत बड़ी और आपराधिक लापरवाही है।
”यह बेहद गंभीर मामला है। हम खाने के सैंपल को फॉरेंसिक जांच के लिए भेज रहे हैं। अगर किसी की लापरवाही सामने आई, तो उस पर सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई होगी।” — प्रशासनिक सूत्र
VOB का नजरिया: जो हमारी रक्षा करते हैं, उनके खाने में ‘जहर’?
यह महज फूड पॉइजनिंग नहीं, बल्कि व्यवस्था की सड़ांध है। पुलिस लाइन के मेस में जवानों को क्या खिलाया जा रहा है, इसकी निगरानी कौन करता है? 100 से अधिक जवानों की जान जोखिम में डालना कोई छोटी बात नहीं है। ‘सल्फास’ की थ्योरी अगर सही निकली, तो सवाल उठेगा कि क्या खाना बनाने से पहले उसकी सफाई नहीं की गई थी? बांका प्रशासन को इस मामले में केवल जांच का दिखावा नहीं, बल्कि मेस प्रबंधन के खिलाफ कड़ी नजीर पेश करनी होगी।


