मोतिहारी/पटना | 24 फरवरी, 2026: बिहार पुलिस के दामन पर जालसाजी और धोखाधड़ी का एक ऐसा दाग लगा है, जिसने पूरे महकमे में हड़कंप मचा दिया है。 सुगौली (पूर्वी चंपारण) में बरामद मादक पदार्थ ‘चरस’ के पैकेट से न्यायालय में ईंट निकलने के मामले में आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने बड़ी कार्रवाई की है。 पुलिस मुख्यालय के आदेश पर तत्कालीन जीआरपी थानाध्यक्ष, आरपीएफ प्रभारी और अंचलाधिकारी (CO) सहित 9 लोकसेवकों के खिलाफ गंभीर धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई है。
इन 9 ‘खाकीधारियों’ पर दर्ज हुआ मुकदमा
जांच रिपोर्ट में दोषी पाए जाने के बाद ईओयू ने जिन अधिकारियों और कर्मियों को नामजद किया है, उनकी सूची इस प्रकार है:
- सोती कुमार: तत्कालीन जीआरपी थानाध्यक्ष, सुगौली।
- राजीव रतन प्रसाद सिंह: आरपीएफ ओपी प्रभारी।
- कुंदन कुमार: तत्कालीन दंडाधिकारी सह अंचलाधिकारी (CO)।
- प्रशांत कुमार: पुलिस निरीक्षक (आईओ)।
- प्रभु हाजरा: आरपीएफ एएसआई (ASI)।
- रितेश प्रसाद वर्मा: आरपीएफ प्रधान आरक्षी।
- गोविंद कुमार महतो: आरपीएफ सिपाही।
- समीर आलम: जीआरपी सिपाही।
- मो. जाकिर: जीआरपी सिपाही।
क्या था मामला? जब कोर्ट में चरस बन गई ‘ईंट’
यह मामला मार्च 2025 में दर्ज सुगौली रेल थाना कांड संख्या 04/25 से जुड़ा है。
- बरामदगी: पुलिस ने दावा किया था कि भारी मात्रा में चरस बरामद की गई है。
- खुलासा: करीब दो महीने बाद जब यह पैकेट न्यायालय में प्रदर्श (Exhibition) के लिए खोला गया, तो अंदर चरस की जगह ईंटें निकलीं。 इस ‘चमत्कार’ ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे।
जांच रिपोर्ट में खुली पोल: 22 बिंदुओं पर घेरे गए अधिकारी
पुलिस मुख्यालय ने इस मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित की थी, जिसमें मोतिहारी एडीएम, समस्तीपुर आरपीएफ कमांडेंट और मुजफ्फरपुर रेल एसपी शामिल थीं。 जांच समिति और एडीजी रेलवे की रिपोर्ट में कई चौंकाने वाली गड़बड़ियां उजागर हुई हैं:
- आपराधिक षड्यंत्र: रिपोर्ट के अनुसार, सभी 9 अभियुक्तों ने मिलीभगत कर झूठे साक्ष्य गढ़े और आपराधिक साजिश रची。
- संदिग्ध जब्ती सूची: जब्ती सूची बनाने की प्रक्रिया पूरी तरह संदिग्ध पाई गई。 घटना और एफआईआर दर्ज होने का समय भी गलत बताया गया था。
- हस्ताक्षर का खेल: मौके पर मौजूदगी के बावजूद तत्कालीन जीआरपी थानाध्यक्ष ने जब्ती सूची पर हस्ताक्षर नहीं किए थे。
- निजी कर्मियों का उपयोग: बरामद सामग्री की स्थिति बदलने और हेराफेरी करने में बाहरी निजी कर्मियों का सहयोग लिया गया。
- बिना सत्यापन दावा: मूल सामग्री का बिना भौतिक सत्यापन और वैज्ञानिक जांच के ही उसे ‘चरस’ घोषित कर दिया गया था。
सख्त धाराओं में फंसी खाकी
ईओयू ने इस मामले में NDPS एक्ट की धारा 59(1) के साथ-साथ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की जालसाजी और धोखाधड़ी से जुड़ी विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है。
द वॉयस ऑफ बिहार की रिपोर्ट: यह मामला बिहार पुलिस के लिए एक बड़ा सबक है कि भ्रष्टाचार और सबूतों के साथ छेड़छाड़ अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। रक्षक ही जब भक्षक बन जाएं, तो न्याय की उम्मीद धुंधली पड़ने लगती है, लेकिन ईओयू की इस कार्रवाई ने एक बार फिर कानून का इकबाल बुलंद किया है।
ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार।


