
पटना, 10 अप्रैल 2026 — बिहार सरकार ने अपनी समृद्ध सांस्कृतिक और बौद्धिक विरासत को सहेजने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। राज्य में ‘ज्ञान भारतम् मिशन’ के तहत पांडुलिपियों के संरक्षण और डिजिटलीकरण कार्य में तेजी लाई जा रही है। इसको लेकर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें सभी जिलों के पदाधिकारी शामिल हुए।
यह मिशन भारत सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है, जिसकी घोषणा वर्ष 2025-26 के बजट में की गई थी। इसका उद्देश्य देश की प्राचीन ज्ञान परंपरा और दुर्लभ पांडुलिपियों को संरक्षित करते हुए उन्हें डिजिटल माध्यम से आम लोगों तक पहुंचाना है।
पांडुलिपियों का बड़े पैमाने पर सर्वे और संरक्षण
राज्य में 75 वर्ष से अधिक पुरानी हस्तलिखित पांडुलिपियों को इस मिशन के अंतर्गत शामिल किया गया है। ये पांडुलिपियां कागज, भोजपत्र, ताड़पत्र, कपड़े और धातु जैसी विभिन्न सामग्री पर लिखी गई हैं।
सरकारी संस्थानों, मंदिरों, मठों, विश्वविद्यालयों और निजी पुस्तकालयों में मौजूद इन धरोहरों की पहचान और कैटलॉगिंग का कार्य तेजी से चल रहा है। संरक्षण के लिए पारंपरिक तकनीकों के साथ-साथ आधुनिक वैज्ञानिक तरीकों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है।
डिजिटल इंडिया की दिशा में बड़ा कदम
इस मिशन के तहत AI आधारित तकनीक और क्लाउड सिस्टम का उपयोग कर एक राष्ट्रीय डिजिटल रिपॉजिटरी तैयार की जा रही है। इससे इन पांडुलिपियों का:
- डिजिटल संरक्षण
- संपादन और अनुवाद
- बहुभाषीय प्रकाशन
संभव हो सकेगा, जिससे देश-विदेश के शोधकर्ताओं को भी इसका लाभ मिलेगा।
बिहार देश में चौथे स्थान पर
सर्वेक्षण के अनुसार, बिहार में अब तक 4,71,802 पांडुलिपियों की पहचान की जा चुकी है, जिससे राज्य देश में चौथे स्थान पर पहुंच गया है।
जिलों की बात करें तो:
- मधुबनी सबसे आगे (3,70,926 पांडुलिपियां)
- इसके बाद पटना, दरभंगा और नालंदा
यह आंकड़े दर्शाते हैं कि मिथिला और मगध क्षेत्र ज्ञान और परंपरा के महत्वपूर्ण केंद्र रहे हैं
प्रमुख संस्थानों को बनाया गया क्लस्टर
मिशन के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए कुछ प्रमुख संस्थानों को क्लस्टर के रूप में चिन्हित किया गया है, जिनमें शामिल हैं:
- बोधगया मठ
ये संस्थान विभिन्न जिलों के साथ समन्वय स्थापित कर कार्य को गति दे रहे हैं।
जिला स्तर पर समितियों का गठन
मुख्य सचिव ने निर्देश दिया है कि हर जिले में ‘ज्ञान भारतम् मिशन समिति’ बनाई जाए, जो नियमित रूप से कार्यों की समीक्षा करे। साथ ही विश्वविद्यालयों, संग्रहालयों और निजी संग्रहकर्ताओं के साथ सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है।
जन-जन तक पहुंचाने की योजना
सरकार इस मिशन को केवल सरकारी पहल तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि इसे जन आंदोलन का रूप देने की तैयारी है। इसके लिए:
- फोटो प्रदर्शनी
- सोशल मीडिया अभियान
- प्रिंट मीडिया प्रचार
जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। उत्कृष्ट कार्य करने वाले सर्वेर और संग्रहकर्ताओं को पुरस्कृत भी किया जाएगा।
प्रधानमंत्री ने भी की सराहना
इस मिशन की महत्ता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि प्रधानमंत्री ने भी हाल ही में कार्यक्रम में राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वे का उल्लेख किया था।
बिहार सरकार का संकल्प
आने वाले समय में भारत सरकार के कैबिनेट सचिव द्वारा सभी राज्यों के साथ इस मिशन की समीक्षा की जाएगी। बिहार सरकार अपनी इस अनमोल धरोहर को संरक्षित कर वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
यह पहल न सिर्फ इतिहास को सहेजने की दिशा में महत्वपूर्ण है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का एक मजबूत माध्यम भी बनेगी।


