​गुजरात एटीएस का बड़ा एक्शन: देश को दहलाने की आतंकी साजिश नाकाम; बिहार का युवक और एमएससी का छात्र गिरफ्तार, निशाने पर थे आरएसएस पदाधिकारी

अहमदाबाद/पटना। आतंकवाद के विरुद्ध जारी शून्य सहिष्णुता (Zero Tolerance) की नीति के तहत गुजरात आतंकवाद निरोधक दस्ता (ATS) ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। बुधवार, 22 अप्रैल 2026 को एटीएस ने एक खुफिया ऑपरेशन के दौरान दो ऐसे संदिग्धों को दबोचा है जो न केवल देश की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन रहे थे, बल्कि डिजिटल दुनिया के जरिए युवाओं के जेहन में जहर घोलने का काम भी कर रहे थे। इस गिरफ्तारी ने एक बार फिर सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े कर दिए हैं क्योंकि पकड़े गए आरोपियों में से एक का सीधा संबंध बिहार से है। पकड़े गए संदिग्धों की पहचान मुर्शिद जाहिद अख्तर शेख और इरफान खान पठान के रूप में हुई है। एटीएस की प्राथमिक जांच में जो खुलासे हुए हैं, वे चौंकाने वाले हैं—ये दोनों संदिग्ध न केवल पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) के संपर्क में थे, बल्कि भारत के लोकतांत्रिक ढांचे को चुनौती देते हुए इसे एक विशेष विचारधारा वाले राष्ट्र में तब्दील करने की खतरनाक साजिश रच रहे थे।

संदिग्धों का प्रोफाइल: एक मजदूर और दूसरा विज्ञान का छात्र

​इस मामले की सबसे विचलित करने वाली बात इन दोनों आरोपियों की पृष्ठभूमि में छिपा विरोधाभास है। जहाँ एक तरफ कम पढ़ा-लिखा युवक भटककर इस रास्ते पर आया, वहीं दूसरी तरफ उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहा एक छात्र भी देशद्रोही गतिविधियों में लिप्त पाया गया।

  • मुर्शिद जाहिद अख्तर शेख (बिहार कनेक्शन): 21 वर्षीय मुर्शिद मूल रूप से बिहार का निवासी है। शिक्षा के नाम पर उसने केवल आठवीं तक की पढ़ाई की है। वह अपने भाई के साथ मुंबई में एक बिरयानी की दुकान पर काम करता था। जांच एजेंसियों के लिए यह चिंता का विषय है कि बिहार का एक सामान्य पृष्ठभूमि वाला युवक मुंबई जैसे महानगर में काम करते हुए कैसे और किन परिस्थितियों में कट्टरपंथ की गिरफ्त में आ गया।
  • इरफान खान पठान (शिक्षित कट्टरपंथ): 22 साल का इरफान गुजरात के पाटन जिले के सिद्धपुर का रहने वाला है। मुर्शिद के विपरीत, इरफान काफी शिक्षित है। उसने मेहसाणा से एमएससी (M.Sc.) केमिस्ट्री की पढ़ाई पूरी की है और वर्तमान में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा था। एक विज्ञान के छात्र का, जो देश के भविष्य निर्माण में योगदान दे सकता था, इस तरह आतंकी नेटवर्क का हिस्सा बनना आधुनिक कट्टरपंथ की भयावहता को दर्शाता है।

डिजिटल कट्टरपंथ और आईएसआई का साया

​गुजरात एटीएस के अधिकारियों ने बताया कि ये दोनों आरोपी सोशल मीडिया के विभिन्न मंचों, विशेष रूप से व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम का उपयोग कर रहे थे। इनका काम केवल सूचनाएं साझा करना नहीं था, बल्कि ये सोशल मीडिया के जरिए आम लोगों को कट्टरपंथ की ओर धकेलने की सुनियोजित साजिश रच रहे थे।

​जांच के दौरान जब इनके मोबाइल फोन और डिजिटल फुटप्रिंट्स खंगाले गए, तो यह तथ्य सामने आया कि ये संदिग्ध सीधे तौर पर पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) से जुड़े लोगों और अन्य वैश्विक कट्टरपंथी तत्वों के संपर्क में थे। डिजिटल दुनिया के अंधेरे कोनों में बैठकर ये आरोपी देश के विरुद्ध नफरत का ऐसा जाल बुन रहे थे, जिसका उद्देश्य भारत की एकता और अखंडता को चोट पहुँचाना था। सोशल मीडिया का यह दुरुपयोग एक बार फिर सिद्ध करता है कि स्मार्टफोन अब केवल संचार का साधन नहीं, बल्कि अदृश्य युद्ध का एक हथियार भी बनता जा रहा है।

साजिश का ब्लूप्रिंट: निशाने पर ‘आरएसएस’ और देश की शांति

​एटीएस की पूछताछ में जो सबसे खतरनाक मंशा सामने आई है, वह है राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े पदाधिकारियों को निशाना बनाने की योजना। आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे एक विस्तृत आतंकी नेटवर्क खड़ा करने की कोशिश में थे, ताकि देश के विभिन्न हिस्सों में सुनियोजित तरीके से वारदातों को अंजाम दिया जा सके।

​इनकी साजिश के मुख्य बिंदु निम्नलिखित थे:

  1. इस्लामिक राष्ट्र की अवधारणा: आरोपियों का मुख्य लक्ष्य भारत के मौजूदा स्वरूप को बदलकर इसे एक विशेष धार्मिक राष्ट्र बनाने की अवधारणा पर काम करना था।
  2. टारगेट किलिंग: आरएसएस के प्रमुख पदाधिकारियों को निशाना बनाकर देश में सांप्रदायिक वैमनस्य फैलाना और अराजकता की स्थिति पैदा करना इनकी योजना का हिस्सा था।
  3. आतंकी नेटवर्क का विस्तार: ये दोनों न केवल खुद कट्टरपंथी थे, बल्कि नए युवाओं को भर्ती कर एक स्लीपर सेल नेटवर्क तैयार करने की प्रक्रिया में थे।

कानूनी कार्रवाई और 11 दिन की रिमांड

​गिरफ्तारी के बाद दोनों आरोपियों को एक स्थानीय अदालत में पेश किया गया। मामले की संवेदनशीलता और अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन की गहराई को देखते हुए, एटीएस ने अदालत से कड़ी पूछताछ के लिए रिमांड की मांग की। कोर्ट ने एटीएस की दलीलों को स्वीकार करते हुए इरफान और मुर्शिद को 11 दिन की एटीएस हिरासत (रिमांड) में भेज दिया है।

​इस 11 दिनों की अवधि में एटीएस निम्नलिखित पहलुओं पर जांच केंद्रित करेगी:

  • ​इनके नेटवर्क में बिहार, मुंबई और गुजरात के और कितने लोग शामिल हैं?
  • ​इन संदिग्धों को फंडिंग (वित्तीय सहायता) कहाँ से मिल रही थी?
  • ​क्या इनके पास हथियारों या विस्फोटक सामग्री की व्यवस्था करने का भी कोई गुप्त माध्यम था?
  • ​आईएसआई के किन हैंडलर्स के साथ ये लगातार संपर्क में थे और उन्हें क्या जानकारियां साझा की गई थीं?

बिहार के लिए चेतावनी और सुरक्षा विश्लेषण

​मुर्शिद जाहिद अख्तर शेख की गिरफ्तारी बिहार के सुरक्षा तंत्र के लिए भी एक बड़ा अलर्ट है। बिहार के सुदूर इलाकों से निकलकर युवा जब दूसरे राज्यों में रोजगार की तलाश में जाते हैं, तो वे अक्सर डिजिटल रेडिकलाइजेशन के आसान शिकार बन जाते हैं। मुर्शिद का बिरयानी की दुकान से आतंकी सेल तक का सफर यह दर्शाता है कि कट्टरपंथ अब केवल मदरसों या गुप्त बैठकों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हर उस व्यक्ति की जेब में पहुँच चुका है जिसके पास इंटरनेट है।

​बिहार पुलिस और खुफिया विभाग को अब उन क्षेत्रों पर विशेष नजर रखनी होगी जहाँ से युवा पलायन कर रहे हैं। इसके साथ ही, सामुदायिक पुलिसिंग और सोशल मीडिया मॉनिटरिंग को और अधिक सुदृढ़ करने की आवश्यकता है। यह मामला यह भी उजागर करता है कि एमएससी जैसे उच्च शिक्षित युवाओं का इसमें शामिल होना यह बताता है कि शिक्षा का अभाव ही कट्टरपंथ का एकमात्र कारण नहीं है, बल्कि वैचारिक प्रदूषण कहीं अधिक गहरा है।

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