भागलपुर, 2 अगस्त 2025 — कभी एक हँसता-खेलता परिवार था… लेकिन जमीन के महज़ डेढ़ कट्टे टुकड़े ने ऐसा तांडव मचाया कि एक भाई ने अपने सगे भाई की हत्या कर दी, मां की भी संदिग्ध हालात में मौत हो गई, और अंत में बेटे को हथकड़ी पहनकर अपनी मां को मुखाग्नि देनी पड़ी। यह कोई फ़िल्मी कहानी नहीं, बल्कि भागलपुर के लोदीपुर थाना क्षेत्र के कोहड़ा गांव की सच्ची, कड़वी और खौफनाक हकीकत है।
21 जुलाई की रात: जब भाई बना भाई का कातिल
रिश्तों को शर्मसार करने वाली यह कहानी शुरू होती है 21 जुलाई की रात से। कहते हैं ज़मीन नहीं, लालच मारता है। कुछ ऐसा ही हुआ उस रात, जब महज डेढ़ कट्टे जमीन के लिए छोटे भाई सुमित ने अपने बड़े भाई सुजीत की चाकू मारकर हत्या कर दी। चाकुओं की धार ने न केवल सुजीत की जान ली, बल्कि परिवार की खुशियों, भरोसे और सम्मान को भी चीर कर रख दिया।
हत्या के बाद सुमित खुद थाने गया और अपराध कबूल करते हुए खुद को पुलिस के हवाले कर दिया। अदालत ने उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
12 दिन बाद एक और सदमा—मां की रहस्यमयी मौत
गांव अभी इस खूनी वारदात से उबर भी नहीं पाया था कि 12 दिन बाद यानी 2 अगस्त को सुमित और सुजीत की मां की संदिग्ध हालात में मौत हो गई। इस घटना ने पूरे गांव को झकझोर दिया।
परिजनों का आरोप है कि यह मौत प्राकृतिक नहीं, बल्कि हत्या है। शक की सुई सीधी सुजीत की पत्नी की ओर घूमी, क्योंकि घटना के वक्त घर में वही अकेली मौजूद थी। ग्रामीणों का कहना है कि मां ने अपने बेटे की हत्या के बाद बहू को लेकर चिंता जाहिर की थी।
हालाँकि, सच क्या है — यह तो पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगा, लेकिन गांव में फुसफुसाहटें हैं, शक हैं, और सबसे बड़ी बात – टूट चुके रिश्तों की चीत्कार है।
श्मशान घाट पर दृश्य जिसने सबको रुला दिया
शनिवार को बरारी श्मशान घाट पर जो दृश्य सामने आया, वह हर आंख को नम कर गया। सुमित को जेल से पुलिस कस्टडी में हथकड़ी पहनाकर मां के अंतिम संस्कार के लिए लाया गया।
बायें हाथ में हथकड़ी की जकड़न, दायें हाथ में मां के अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी — यह कैसा न्याय था? यह कैसा भाग्य?
कांपते हाथों से सुमित ने मां को मुखाग्नि दी। घाट पर मौजूद लोग एकटक यह मंजर देख रहे थे — कोई कुछ बोल नहीं सका, बस आँखें बरस पड़ीं।
गांव में पसरा सन्नाटा, रिश्तों पर टूटा भरोसा
कभी जिस घर में रसोई से भाप निकलती थी, अब वहां सन्नाटा पसरा है। जिस मां ने दो बेटों को पाला, सहेजा, बड़ा किया, उसी मां की विदाई एक हत्यारोपी बेटे के हाथों हुई। गांव में लोग एक-दूसरे से बस यही कह रहे हैं—
“जब लालच इंसानियत पर भारी पड़ जाए, तो नतीजा ऐसा ही होता है… बर्बादी… खामोशी… और पश्चाताप।”
न्याय की उम्मीद और सामाजिक चेतावनी
अब इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा सवाल यही है — क्या मां की मौत वाकई प्राकृतिक थी या यह दूसरी हत्या है? क्या सुजीत की पत्नी दोषी है? या यह केवल अफवाहें हैं?
पुलिस जांच जारी है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है। लेकिन इस कहानी ने समाज को एक गहरा सवाल दे दिया है — क्या रिश्ते अब जमीन-जायदाद से सस्ते हो गए हैं?


