HIGHLIGHTS:
- एडमिशन अलर्ट: पटना के प्रतिष्ठित ‘भारतीय नृत्य कला मंदिर’ में नए सत्र (2026) के लिए नामांकन प्रक्रिया शुरू।
- विधाओं की भरमार: शास्त्रीय नृत्य, लोक संगीत और वाद्ययंत्रों (Instruments) की मिलेगी प्रोफेशनल ट्रेनिंग।
- कोर्स लिस्ट: भरतनाट्यम, कथक, ओडिसी, तबला, सितार और स्पेनिश गिटार जैसे कई विकल्प मौजूद।
- सीधा संपर्क: संस्थान ने जारी किया हेल्पलाइन नंबर; छात्र-छात्राएं सीधे कार्यालय पहुंचकर ले सकते हैं जानकारी।
संस्कारों और सुरों का संगम: पटना की ‘कला पाठशाला’ में फिर गूंजेगी घुंघरू की छनक
पटना: अगर आप या आपके बच्चे नृत्य, संगीत या वाद्ययंत्रों की दुनिया में अपनी पहचान बनाना चाहते हैं, तो बिहार की राजधानी पटना का सबसे विश्वसनीय केंद्र आपके लिए दरवाजे खोल चुका है। भारतीय नृत्य कला मंदिर में नए सत्र के लिए नामांकन की प्रक्रिया आधिकारिक रूप से शुरू हो गई है। यहाँ न केवल कला सिखाई जाती है, बल्कि सदियों पुरानी भारतीय विरासत को अगली पीढ़ी तक पहुँचाने का काम किया जाता है।
[कोर्स मेन्यू: आप क्या सीख सकते हैं?]
संस्थान ने विभिन्न आयु वर्ग के लिए कोर्सेज को तीन मुख्य श्रेणियों में बांटा है:
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श्रेणी (Category) |
उपलब्ध विधाएं (Specializations) |
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नृत्य (Dance) |
भरतनाट्यम, कथक, ओडिसी और लोक नृत्य (Folk Dance)। |
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गायन (Vocal Music) |
शास्त्रीय गायन (Classical), लोक संगीत और म्यूजिक कम्पोजिशन। |
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वादन (Instruments) |
तबला, नगाड़ा, सितार, स्पेनिश गिटार और की-बोर्ड। |
सिर्फ हॉबी नहीं, व्यक्तित्व विकास का आधार!
संस्थान का मानना है कि कला की शिक्षा केवल मनोरंजन के लिए नहीं है। अनुभवी गुरुओं के मार्गदर्शन में यहाँ प्रशिक्षण लेने से छात्रों में आत्मविश्वास, अनुशासन और रचनात्मकता (Creativity) का विकास होता है। नियमित रियाज और मंच पर प्रदर्शन का मौका मिलने से विद्यार्थियों का व्यक्तित्व निखरता है।
“कला के जरिए हम केवल कलाकार नहीं, बल्कि एक बेहतर इंसान तैयार करते हैं।” — संस्थान का मुख्य विजन।
कैसे लें एडमिशन? नोट करें ये जरूरी जानकारी
इच्छुक छात्र और अभिभावक अब बिना देरी किए नामांकन संबंधी प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं:
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- हेल्पलाइन नंबर: 0612-2225811
- पता: भारतीय नृत्य कला मंदिर कार्यालय, पटना।
- प्रक्रिया: आप सीधे कार्यालय जाकर फॉर्म प्राप्त कर सकते हैं या फोन पर प्रवेश संबंधी नियम और शुल्क की जानकारी ले सकते हैं।
VOB का नजरिया: डिजिटल युग में ‘जड़ों’ की ओर वापसी!
आज जब बच्चे स्मार्टफोन और रिल्स की दुनिया में खोए हैं, ऐसे में भारतीय नृत्य कला मंदिर जैसी संस्थाएं उन्हें अपनी मिट्टी की खुशबू और सुरों के अनुशासन से जोड़ रही हैं। शास्त्रीय कलाओं का प्रशिक्षण एकाग्रता (Focus) बढ़ाने में भी मददगार साबित होता है। अगर आप चाहते हैं कि आपका बच्चा गिटार की धुन पर थिरके या घुंघरू की थाप पर शास्त्रीय कला सीखे, तो पटना का यह संस्थान एक ‘परफेक्ट डेस्टिनेशन’ है।


