पटना: बिहार सरकार ने रोजगार सृजन को लेकर अपनी रणनीति को और मजबूत करते हुए निगरानी तंत्र सख्त कर दिया है। राज्य सरकार ने साफ निर्देश दिया है कि अब सभी विभागों को हर महीने अपने यहां सृजित रोजगार और नियुक्तियों का पूरा विवरण देना अनिवार्य होगा। इस कदम का उद्देश्य 5 वर्षों में 1 करोड़ रोजगार उपलब्ध कराने के लक्ष्य को समय पर हासिल करना है।
‘सात निश्चय-3’ के तहत बढ़ी सख्ती
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में चल रहे ‘सात निश्चय-3’ कार्यक्रम के तहत सरकार रोजगार सृजन को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। इसी के तहत नियोजन एवं प्रशिक्षण, युवा रोजगार एवं कौशल विकास विभाग ने सभी विभागों के नोडल अधिकारियों को निर्देश जारी किया है कि वे रोजगार से संबंधित सभी आंकड़े नियमित रूप से उपलब्ध कराएं।
हर तरह के रोजगार का देना होगा हिसाब
सरकार द्वारा जारी निर्देश के अनुसार, विभागों को अब सिर्फ स्थायी नौकरियों ही नहीं, बल्कि संविदा, आउटसोर्सिंग, मानदेय आधारित और अन्य सभी प्रकार के रोजगार का डेटा देना होगा। इसके लिए एक तय फॉर्मेट भी जारी किया गया है, जिसमें हर श्रेणी की नियुक्तियों का विस्तृत ब्योरा भरना अनिवार्य होगा।
मासिक रिपोर्टिंग अब अनिवार्य
सबसे अहम बात यह है कि अब यह प्रक्रिया एक बार की नहीं, बल्कि हर महीने करनी होगी। सभी विभागों को मासिक आधार पर अपने रोजगार से जुड़े आंकड़े अपडेट कर केंद्रीकृत पोर्टल पर अपलोड करने होंगे। इससे सरकार को रियल टाइम में रोजगार सृजन की स्थिति का आकलन करने में मदद मिलेगी।
कौन-कौन सी जानकारी देनी होगी?
नए आदेश के तहत विभागों को निम्नलिखित जानकारी देनी होगी:
- समूह ‘क’, ‘ख’ और ‘ग’ के पदों पर हुई नियुक्तियां
- संविदा और आउटसोर्सिंग के जरिए दिए गए रोजगार
- मानदेय आधारित कार्यों में लगे लोगों की संख्या
- योजना आधारित रोजगार सृजन का विवरण
सामाजिक वर्ग के अनुसार भी देना होगा डेटा
सरकार ने पारदर्शिता बढ़ाने के लिए यह भी तय किया है कि सभी विभाग एससी, एसटी, ईडब्ल्यूएस और सामान्य वर्ग के अनुसार अलग-अलग आंकड़े भी प्रस्तुत करेंगे। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि रोजगार के अवसरों का लाभ किस वर्ग को कितना मिल रहा है।
पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर
सरकार का मानना है कि नियमित रिपोर्टिंग और सख्त मॉनिटरिंग से विभागों की जवाबदेही तय होगी। इससे न सिर्फ योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी, बल्कि रोजगार के अवसरों को लेकर पारदर्शिता भी बढ़ेगी।
युवाओं को मिलेगा सीधा लाभ
इस पहल का एक बड़ा उद्देश्य यह भी है कि रोजगार से जुड़े आंकड़े सार्वजनिक प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराए जाएं, जिससे युवाओं को सही समय पर नौकरी के अवसरों की जानकारी मिल सके। इससे राज्य के युवाओं को अपने ही प्रदेश में रोजगार मिलने की संभावना बढ़ेगी।
सरकार का लक्ष्य—तेज रफ्तार से रोजगार सृजन
सरकार का स्पष्ट मानना है कि डेटा आधारित योजना और निगरानी से रोजगार सृजन की गति तेज होगी। विभागों को भी निर्देश दिया गया है कि वे अपने लक्ष्यों को लेकर गंभीर रहें और तय समयसीमा में बेहतर प्रदर्शन सुनिश्चित करें।
यह कदम बिहार में रोजगार नीति को और मजबूत करने के साथ-साथ प्रशासनिक जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।


