20% एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल पर सरकार का बड़ा बयान: “माइलेज घटने की बातें बेबुनियाद”

नई दिल्ली, 12 अगस्त 2025 — पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने ई-20 (20% एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल) को लेकर उठाए जा रहे सवालों पर विस्तृत जवाब जारी किया है। सरकार ने साफ कहा है कि इस फ्यूल से न सिर्फ प्रदूषण घट रहा है, बल्कि किसानों की जेब भी भर रही है और देश को हजारों करोड़ रुपये का विदेशी मुद्रा बचत हो रही है।

ग्रीन एनर्जी और किसानों का दोहरा फायदा

मंत्रालय ने बताया कि एथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम के चलते 2014-15 से अब तक देश ने 1,44,087 करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा बचाई है, 245 लाख मीट्रिक टन कच्चे तेल का आयात टला है और करीब 736 लाख मीट्रिक टन CO₂ उत्सर्जन घटा है—जो 30 करोड़ पेड़ लगाने के बराबर है।
केवल इस साल 20% ब्लेंडिंग से किसानों को लगभग 40,000 करोड़ रुपये का भुगतान होगा और 43,000 करोड़ रुपये का विदेशी मुद्रा बचत होगी।

“माइलेज कम होने की बातों में सच्चाई नहीं”

सरकार ने माना कि ई-20 पर माइलेज को लेकर चिंता पहले से अनुमानित थी, लेकिन NITI Aayog की कमेटी, IOCL, ARAI और SIAM के रिसर्च में पाया गया कि माइलेज में कमी या तो मामूली है या बिल्कुल नहीं।
दरअसल, वाहन का माइलेज ड्राइविंग स्टाइल, मेंटेनेंस, टायर प्रेशर और एसी इस्तेमाल जैसे कई फैक्टर्स पर निर्भर करता है—सिर्फ फ्यूल टाइप पर नहीं।

बेहतर पिकअप, कम प्रदूषण

ई-20 में हाई ऑक्टेन नंबर (108.5) होने से गाड़ियों को बेहतर एक्सीलरेशन और स्मूथ ड्राइव मिलता है, साथ ही प्रदूषण लगभग 30% कम होता है। यह खास तौर पर BS-VI नॉर्म्स वाले इंजन के लिए फायदेमंद है।

ब्राज़ील का उदाहरण और पुरानी गाड़ियों की हकीकत

ब्राज़ील में सालों से E27 फ्यूल इस्तेमाल हो रहा है और वहां भी टोयोटा, होंडा, हुंडई जैसे वही निर्माता बिना किसी दिक्कत के गाड़ियां बनाते हैं।
हाँ, कुछ पुराने मॉडल में रबर पार्ट्स और गैस्केट को समय से पहले बदलने की ज़रूरत पड़ सकती है, लेकिन यह एक बार का छोटा और आसान रिप्लेसमेंट है, जिसे रूटीन सर्विसिंग के दौरान किया जा सकता है।

कीमत क्यों सस्ती नहीं हुई?

कुछ लोगों का कहना है कि ई-20 पेट्रोल सस्ता होना चाहिए, लेकिन मंत्रालय के मुताबिक, अब एथेनॉल की औसत कीमत (₹71.32/लीटर) पेट्रोल से ज्यादा है। फिर भी सरकार ब्लेंडिंग जारी रखे हुए है क्योंकि यह किसानों की आय बढ़ा रहा है, तेल आयात घटा रहा है और पर्यावरण के लिए फायदेमंद है।

इंश्योरेंस पर कोई असर नहीं

सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही अफवाहों को मंत्रालय ने खारिज किया—ई-20 फ्यूल से गाड़ी की इंश्योरेंस वैलिडिटी पर कोई असर नहीं पड़ता। इंश्योरेंस कंपनियों ने भी इस बात की पुष्टि की है।

E-20 के बाद क्या?

सरकार ने साफ कहा है कि फिलहाल 31 अक्टूबर 2026 तक देश में E-20 का रोडमैप तय है। इसके आगे बढ़ने का फैसला इंटर-मिनिस्ट्रियल कमेटी की रिपोर्ट और सभी स्टेकहोल्डर्स से चर्चा के बाद ही होगा।


 

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