
पटना | बिहार न्यूज़: बिहार में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग में जारी हड़ताल को लेकर सरकार अब पूरी तरह एक्शन मोड में आ गई है। राज्य सरकार ने साफ कर दिया है कि कामकाज बाधित करने और अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उपमुख्यमंत्री सह विभागीय मंत्री ने हड़ताली अधिकारियों को अंतिम चेतावनी देते हुए 31 मार्च तक ड्यूटी जॉइन करने का अल्टीमेटम दिया है।
69 अधिकारियों में से आधे लौटे, बाकी पर सख्ती तय
सरकार के अनुसार 69वीं बीपीएससी बैच के कुल 69 परीक्ष्यमान राजस्व अधिकारियों में से अब तक करीब 30 अधिकारी काम पर वापस लौट चुके हैं। हालांकि शेष अधिकारियों को स्पष्ट कर दिया गया है कि यदि वे 31 मार्च 2026 की शाम तक अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं कराते हैं, तो उनके खिलाफ सीधे बर्खास्तगी की कार्रवाई शुरू की जाएगी।
सरकार के इस सख्त रुख के बाद विभाग में हड़कंप की स्थिति देखी जा रही है और कई अधिकारी वापसी की तैयारी में जुट गए हैं।
1 अप्रैल से हर अंचल में तैनाती अनिवार्य
राज्य सरकार ने आम लोगों को हो रही परेशानी को देखते हुए वैकल्पिक व्यवस्था भी तैयार कर ली है। विभाग की ओर से बताया गया है कि वर्तमान में 563 राजस्व अधिकारी सक्रिय रूप से कार्यरत हैं और इन्हें 1 अप्रैल से राज्य के सभी अंचलों में अनिवार्य रूप से तैनात किया जाएगा।
इस फैसले का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी अंचल में सरकारी कामकाज ठप न पड़े और लोगों को जरूरी सेवाएं समय पर मिलती रहें।
दाखिल-खारिज से लेकर ई-मापी तक सेवाएं रहेंगी जारी
सरकार ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि हड़ताल के बावजूद महत्वपूर्ण सेवाओं पर कोई असर नहीं पड़ना चाहिए। इनमें शामिल हैं—
- दाखिल-खारिज (Mutation)
- परिमार्जन (Correction)
- ई-मापी (E-Measurement)
- भूमि विवाद से जुड़े मामलों का निपटारा
उपमुख्यमंत्री ने अधिकारियों को लंबित मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाने और कार्यों की गति तेज करने के निर्देश दिए हैं, ताकि आम जनता को किसी तरह की परेशानी न हो।
‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर सरकार
सरकार ने यह भी साफ कर दिया है कि प्रशासनिक अनुशासन तोड़ने वालों और कामकाज बाधित करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उपमुख्यमंत्री ने दो टूक कहा कि—
- अराजकता और भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति लागू है
- सरकारी व्यवस्था को बाधित करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा
- जनहित से जुड़े मामलों में किसी भी तरह का समझौता नहीं होगा
बिहार सरकार का यह कड़ा रुख साफ संकेत देता है कि प्रशासनिक व्यवस्था को सुचारू बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है। 31 मार्च की डेडलाइन के बाद स्थिति और स्पष्ट होगी, लेकिन फिलहाल सरकार के अल्टीमेटम के चलते हड़ताल कमजोर पड़ती नजर आ रही है और कई अधिकारी काम पर लौटने लगे हैं।


