हड़ताल पर सख्त सरकार: काम पर नहीं लौटे भू-राजस्व कर्मियों पर होगी कार्रवाई, उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा की चेतावनी

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग में चल रही हड़ताल को लेकर सरकार ने कड़ा रुख अपनाया। उपमुख्यमंत्री ने कहा—जनता के काम में बाधा बर्दाश्त नहीं होगी, जरूरत पड़ी तो निलंबन और वैकल्पिक व्यवस्था भी की जाएगी।

पटना समाचार: बिहार में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की हड़ताल को लेकर सरकार ने सख्त रुख अपना लिया है। उपमुख्यमंत्री एवं राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि यदि हड़ताल पर गए अधिकारी और कर्मचारी जल्द काम पर वापस नहीं लौटते हैं तो उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। जरूरत पड़ने पर उन्हें निलंबित भी किया जा सकता है और विभागीय कामकाज सुचारू रखने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी।

पटना स्थित मुख्य सचिवालय में आयोजित प्रेस वार्ता में विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि सरकार जनता से जुड़े कामों को किसी भी कीमत पर बाधित नहीं होने देगी। उन्होंने हड़ताल पर गए अंचल अधिकारियों और कर्मचारियों से अपील की कि वे किसी के बहकावे में न आएं और जल्द से जल्द अपने कार्यस्थल पर लौट आएं। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार की सहानुभूति को कमजोरी समझने की गलती नहीं करनी चाहिए।

उपमुख्यमंत्री ने इस दौरान सरकार के पहले 100 दिनों के कार्यकाल की उपलब्धियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि भूमि से जुड़े मामलों के त्वरित निपटारे के लिए स्पष्ट समय सीमा तय की गई है। अविवादित भूमि की मापी सात दिन और विवादित मामलों की मापी 11 दिन में पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा मापी से जुड़ी रिपोर्ट को पोर्टल पर अपलोड करने के लिए 14 दिन की समय सीमा तय की गई है।

उन्होंने बताया कि जिन भूमि मामलों में किसी प्रकार की आपत्ति नहीं है, उनका निपटारा भी 14 दिनों के भीतर करने का निर्देश दिया गया है। खसरा और लगान से जुड़ी छोटी त्रुटियों को ठीक करने के लिए 35 दिन, जटिल मामलों के समाधान के लिए 75 दिन और परिमार्जन में सुधार के लिए 15 दिन का समय निर्धारित किया गया है।

विजय कुमार सिन्हा ने यह भी स्पष्ट किया कि पुलिस का काम कानून व्यवस्था बनाए रखना है, न कि किसी को जमीन पर कब्जा दिलाना। बिना सक्षम आदेश के इस तरह के मामलों में हस्तक्षेप करने वाले अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। इस संबंध में सभी जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को निर्देश जारी किए जा चुके हैं।

उन्होंने बताया कि नई व्यवस्था के तहत वंशावली जारी करने का कार्य अंचल अधिकारियों को सौंपा गया है। साथ ही अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के पर्चाधारियों को जमीन पर कब्जा दिलाने के लिए राज्य में ‘ऑपरेशन भूमि’ अभियान भी चलाया जा रहा है। इसके अलावा पारिवारिक बंटवारे के लिए नया पोर्टल शुरू किया गया है और दाखिल-खारिज आवेदन को एक साथ करने की सुविधा भी दी गई है। राजस्व अभिलेखों की नकल अब ऑनलाइन उपलब्ध कराई जा रही है।

अंचल कार्यालयों में सीसीटीवी से होगी निगरानी

उपमुख्यमंत्री ने बताया कि पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से सभी अंचल कार्यालयों में सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं। कई स्थानों पर यह कार्य पूरा भी हो चुका है। इसके लिए सरकार ने प्रति अंचल लगभग सवा लाख रुपये के हिसाब से कुल करीब साढ़े छह करोड़ रुपये की राशि जारी की है। इसके अलावा डीसीएलआर और एडीएम के न्यायालयों में भी सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने की तैयारी चल रही है।

परिमार्जन आवेदनों का जल्द निस्तारण

सरकार ने अगस्त 2025 में करीब 46 लाख लंबित आवेदनों के निस्तारण का लक्ष्य तय किया था, जिसमें से लगभग 40 लाख आवेदन परिमार्जन से जुड़े हैं। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि हड़ताल खत्म होने के बाद इन सभी आवेदनों के निपटारे की प्रक्रिया तेजी से पूरी की जाएगी और इसकी नियमित निगरानी की जाएगी।

पंचायत स्तर पर भी सुनवाई की व्यवस्था

राजस्व मामलों के समाधान के लिए अब अधिकारियों को पंचायत स्तर पर भी बैठक करने का निर्देश दिया गया है। प्रत्येक शनिवार अंचल कार्यालयों में संवाद कार्यक्रम आयोजित होगा, जिसमें पुलिस अधिकारी भी मौजूद रहेंगे। इसकी निगरानी जिला स्तर पर जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक करेंगे।

इसके साथ ही आवेदकों को सूचना देने के लिए संदेश भेजने की व्यवस्था भी की गई है और अधिकारियों की उपस्थिति की निगरानी वीडियो कॉल के माध्यम से की जाएगी।

एग्रीस्टैक परियोजना में भी बड़ी प्रगति

प्रेस वार्ता के दौरान कृषि विभाग के प्रधान सचिव नर्मदेश्वर लाल ने बताया कि राज्य में एग्रीस्टैक परियोजना के तहत अब तक लगभग 55 प्रतिशत लक्ष्य हासिल कर लिया गया है। इस कार्य में राजस्व विभाग का भी सहयोग रहा है। उन्होंने बताया कि इस उपलब्धि के लिए केंद्र सरकार की ओर से बिहार को प्रोत्साहन राशि भी प्रदान की गई है।

उन्होंने उम्मीद जताई कि शेष कार्य भी आगामी वित्तीय वर्ष के दौरान पूरा कर लिया जाएगा, जिससे कृषि और भूमि से जुड़े आंकड़ों का बेहतर प्रबंधन संभव हो सकेगा।

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