
पटना, 28 मार्च: बिहार में राजस्व अधिकारियों की हड़ताल के बीच सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए साफ संदेश दिया है कि काम पर लौटे अधिकारियों को डराने-धमकाने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने ऐसे मामलों में तत्काल प्राथमिकी दर्ज करने और दोषियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई करने का निर्देश सभी जिलाधिकारियों को जारी कर दिया है।
सरकार का कहना है कि प्रशासनिक कार्यों में बाधा डालना और सहकर्मियों पर दबाव बनाना न केवल सेवा नियमों का उल्लंघन है, बल्कि यह एक गंभीर आपराधिक कृत्य भी है। ऐसे मामलों में भारतीय न्याय संहिता (BNS) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) के तहत कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
सरकार का सख्त संदेश: कानून व्यवस्था से कोई समझौता नहीं
उप मुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने स्पष्ट कहा कि राज्य में कानून व्यवस्था और प्रशासनिक अनुशासन से किसी भी प्रकार का खिलवाड़ स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जो अधिकारी काम पर लौट आए हैं, उन्हें धमकाना कायरतापूर्ण और दंडनीय अपराध है।
उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसे तत्वों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और जरूरत पड़ने पर उन्हें जेल भी भेजा जाएगा। साथ ही सरकार उन अधिकारियों की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करेगी, जो कामकाज सामान्य करने में लगे हैं।
सोशल मीडिया और व्हाट्सएप धमकियों पर भी नजर
विभाग को मिली शिकायतों के अनुसार, हड़ताल पर गए कुछ अधिकारी व्हाट्सएप कॉल और सोशल मीडिया के माध्यम से अपने सहयोगियों पर दबाव बना रहे हैं। ‘नेमिंग एंड शेमिंग’ जैसे तरीकों से मानसिक दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है।
सरकार ने इसे सरकारी कार्य में बाधा डालने की गंभीर साजिश मानते हुए साफ किया है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दी जा रही धमकियों पर भी आईटी एक्ट के तहत सख्त कार्रवाई होगी।
इन धाराओं के तहत दर्ज होंगे केस
राजस्व विभाग के प्रधान सचिव सीके अनिल ने जिलाधिकारियों को भेजे निर्देश में कहा है कि ऐसे मामलों में भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 132, 351, 352, 126, 127, 349, 350 और 195 के तहत प्राथमिकी दर्ज की जाए। इसके साथ ही आईटी एक्ट, 2000 की धारा 67 के तहत भी कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया है।
हड़ताल कमजोर पड़ती दिख रही, लौटने लगे अधिकारी
सरकारी सख्ती का असर अब दिखने लगा है। विभागीय जानकारी के अनुसार अब तक 24 अधिकारी हड़ताल समाप्त कर अपने कार्य पर लौट चुके हैं। पहले ही गैर-हड़ताली अधिकारियों को अतिरिक्त प्रभार देकर कामकाज जारी रखने की व्यवस्था की जा चुकी है।
प्रशासन को दिए गए सख्त निर्देश
सरकार ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में स्थिति पर लगातार नजर रखें और किसी भी शिकायत पर तुरंत कार्रवाई करें। साथ ही, की गई कार्रवाई की रिपोर्ट विभाग को भेजना भी अनिवार्य किया गया है।
कानून व्यवस्था बनाए रखने पर जोर
राज्य सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी आंदोलन या हड़ताल के नाम पर प्रशासनिक कार्य बाधित करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। कानून व्यवस्था बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसके साथ कोई समझौता नहीं होगा।
सरकार की इस सख्ती के बाद आने वाले दिनों में और अधिक अधिकारियों के काम पर लौटने की संभावना जताई जा रही है, जिससे राजस्व से जुड़े कार्यों में तेजी आने की उम्मीद है।


