HIGHLIGHTS: राजस्व अधिकारियों की जिद पर भारी पड़ा प्रशासन का ‘एक्शन’
- बड़ी कार्रवाई: 9 मार्च से जारी हड़ताल में शामिल संघ के पदधारकों पर गिरी गाज; 3 अधिकारी तत्काल प्रभाव से निलंबित।
- निलंबित चेहरे: अररिया के भू-अर्जन पदाधिकारी, पटना सदर के CO और घोड़ासहन के CO पर हुई कार्रवाई।
- कड़ा संदेश: अनुशासनहीनता और भ्रामक बयानबाजी के आरोप में ‘बिहार सरकारी सेवा आचार नियमावली 1978’ के तहत एक्शन।
- डेडलाइन: वित्तीय वर्ष की समाप्ति (March Closing) और जनगणना (Census) कार्य को देखते हुए सख्ती; काम पर लौटने वालों को माफी का संकेत।
पटना | 19 मार्च, 2026
बिहार में पिछले 10 दिनों से चल रही अंचल और राजस्व अधिकारियों की हड़ताल अब उनके करियर के लिए ‘महंगी’ साबित होने लगी है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने कड़ा रुख अपनाते हुए हड़ताल का नेतृत्व कर रहे तीन प्रमुख अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। सरकार ने साफ कर दिया है कि जनता के काम रोककर अपनी मांगें मनवाने का ‘पुराना तरीका’ अब नहीं चलेगा।
निलंबन की ‘फाइल’ रिपोर्ट: कौन-कौन नपे?
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अधिकारी का नाम |
पद |
जिला/अंचल |
मुख्यालय (निलंबन अवधि) |
|---|---|---|---|
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जितेंद्र पांडे |
अपर जिला भू-अर्जन पदाधिकारी |
अररिया |
आयुक्त कार्यालय, पूर्णिया |
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रजनीकांत |
अंचलाधिकारी (CO) |
पटना सदर |
आयुक्त कार्यालय, पूर्णिया |
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आनंद कुमार |
अंचलाधिकारी (CO) |
घोड़ासहन, पूर्वी चंपारण |
आयुक्त कार्यालय, पूर्णिया |
सख्ती की 3 बड़ी वजहें: क्यों लिया गया यह फैसला?
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- अनुशासन का उल्लंघन: सरकार का मानना है कि सरकारी सेवा में रहते हुए कामकाज रोकना और भ्रामक बयान देना ‘आचार नियमावली’ का उल्लंघन है।
- वित्तीय वर्ष की समाप्ति: 31 मार्च करीब है। राजस्व वसूली और जमीन से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्यों का निष्पादन इसी अवधि में होना है।
- जनगणना 2026: 17 अप्रैल से ‘स्व गणना’ का काम शुरू होना है। राजस्व अधिकारी ही इसकी निगरानी करते हैं, ऐसे में हड़ताल से इस राष्ट्रीय कार्य में बाधा आ सकती है।
”अनुशासन कायम रखने की दिशा में यह आवश्यक कदम है। जो अधिकारी काम पर लौट आएंगे, उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होगी, लेकिन व्यवस्था में बाधा डालने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।”
— विजय कुमार सिन्हा, उपमुख्यमंत्री, बिहार
VOB का नजरिया: क्या ‘सस्पेंशन’ से टूटेगी हड़ताल?
बिहार की राजनीति और ब्यूरोक्रेसी के बीच यह टकराव नया नहीं है, लेकिन इस बार सरकार की ‘टाइमिंग’ बहुत सटीक है। हड़तालियों के पास केवल 10-12 दिन बचे हैं जब वे सरकार पर दबाव बना सकते थे, लेकिन ‘निलंबन’ के पहले वार ने संघ के भीतर फूट डाल दी है। उपमुख्यमंत्री का यह बयान कि “50% अधिकारी काम पर लौट आए हैं”, हड़ताल को कमजोर करने की एक मनोवैज्ञानिक रणनीति भी हो सकती है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ का मानना है कि जनता को दाखिल-खारिज (Mutation) और प्रमाण पत्रों के लिए जो परेशानी झेलनी पड़ रही है, उसका समाधान जल्द निकलना चाहिए।


