गोरखपुर हत्याकांड का खुलासा: भतीजे से रंजिश में पूर्व पार्षद की हत्या, दो आरोपी गिरफ्तार

गोरखपुर: उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में पूर्व पार्षद और भाजपा नेता राजकुमार चौहान की हत्या के मामले में पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। इस सनसनीखेज हत्याकांड के पीछे पुरानी रंजिश और बदले की भावना को मुख्य वजह बताया गया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने भतीजे से विवाद का गुस्सा चाचा पर निकालते हुए इस वारदात को अंजाम दिया।

सीसीटीवी से खुली गुत्थी
घटना के बाद पुलिस ने आसपास लगे कई सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। करीब 8 कैमरों के विश्लेषण के बाद दो संदिग्धों की पहचान हुई। सर्विलांस और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने दोनों को हिरासत में लेकर पूछताछ की, जिसमें उन्होंने हत्या की बात कबूल कर ली।

भतीजे से विवाद बना हत्या की वजह
पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि मृतक के भतीजे से उनका पिछले चार महीनों से विवाद चल रहा था। करीब दो महीने पहले भतीजे ने उनमें से एक आरोपी की पिटाई कर दी थी। आरोप है कि उस समय राजकुमार चौहान ने भी अपने भतीजे का समर्थन किया था। इसी बात से आरोपी नाराज थे और बदला लेने की योजना बना रहे थे।

‘चाचा के बल पर कूदता था…’
आरोपियों ने कबूलनामे में कहा कि मृतक का भतीजा अपने चाचा के प्रभाव का इस्तेमाल कर दबदबा बनाता था। इसी कारण उन्होंने गुस्से में आकर चाचा को ही निशाना बना लिया।

सुबह टहलने के दौरान किया हमला
पुलिस के अनुसार, घटना वाले दिन सुबह दोनों आरोपी पहले से ही घटनास्थल के पास छिपकर बैठे थे। जैसे ही राजकुमार चौहान टहलने के लिए निकले, एक आरोपी ने उन पर फायरिंग की और फिर दोनों ने मिलकर चाकू से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। गंभीर रूप से घायल अवस्था में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

दो आरोपी गिरफ्तार, हथियार की तलाश जारी
इस मामले में पुलिस ने दो मुख्य आरोपियों—राज चौहान उर्फ निरहुआ और विपिन यादव—को गिरफ्तार कर लिया है। हालांकि, हत्या में इस्तेमाल हथियार अभी तक बरामद नहीं हो पाया है। पुलिस अन्य नामजद आरोपियों की भूमिका की भी जांच कर रही है।

परिजनों ने की न्याय की मांग
पोस्टमार्टम के बाद जब शव घर लाया गया, तो परिजनों ने न्याय की मांग को लेकर विरोध जताया। बाद में जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के समझाने पर अंतिम संस्कार किया गया।

राजनीतिक रूप से सक्रिय थे मृतक
राजकुमार चौहान भाजपा से जुड़े सक्रिय नेता थे और आगामी 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटे थे। उन्हें राज्यसभा सांसद डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल का करीबी माना जाता था।

जांच जारी, कई और खुलासों की उम्मीद
पुलिस का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है। अन्य आरोपियों की भूमिका, हथियार की बरामदगी और घटना से जुड़े अन्य पहलुओं पर लगातार काम किया जा रहा है। आने वाले दिनों में और भी अहम खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

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