गया: जमीन के पैसों के लिए बेटे ने ली पिता की जान; हबीबुल्लापुर में कलयुगी पुत्र और भतीजे ने लाठियों से पीटकर की वृद्ध की हत्या

  • ​बिहार के गया जिले के अतरी थाना क्षेत्र में रिश्तों को शर्मसार करने वाली एक हृदयविदारक घटना सामने आई है, जहाँ महज जमीन के टुकड़े और पैसों के लालच में एक बेटे ने अपने ही पिता की बेरहमी से हत्या कर दी।
  • ​हबीबुल्लापुर गांव में मंगलवार की देर रात 65 वर्षीय वृद्ध लखन मांझी को उनके छोटे बेटे और भतीजे ने लाठी-डंडों से पीट-पीटकर मौत के घाट उतार दिया।
  • ​इस जघन्य हत्याकांड के पीछे जमीन बेचने से मिले रुपयों का विवाद बताया जा रहा है, जिसे लेकर परिवार के भीतर पिछले कुछ समय से तनाव व्याप्त था।
  • ​मृतक के बड़े बेटे नरेश मांझी के बयान पर पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी तेज कर दी है।
  • ​इस घटना ने एक बार फिर समाज में बढ़ती भौतिकवादी सोच और पारिवारिक मूल्यों के पतन की कड़वी हकीकत को उजागर किया है, जहाँ खून के रिश्ते ही एक-दूसरे के दुश्मन बन रहे हैं।

गया।

जमीन की भूख और रिश्तों का अंत: हबीबुल्लापुर में खूनी संघर्ष

मानवीय संवेदनाएं जब दम तोड़ देती हैं और लालच आंखों पर पट्टी बांध देता है, तो इंसान रक्षक से भक्षक बन जाता है। गया जिले के नीमचक बथानी अनुमंडल अंतर्गत अतरी थाना के हबीबुल्लापुर गांव में मंगलवार की रात जो कुछ भी हुआ, उसने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया है। एक पिता, जिसने अपनी पूरी उम्र बच्चों के भविष्य को संवारने में लगा दी, उसे अपने ही खून ने मौत की नींद सुला दिया। 65 वर्षीय लखन मांझी की हत्या केवल एक अपराध नहीं है, बल्कि यह उस सामाजिक संकट की ओर इशारा है जहाँ जमीन का एक टुकड़ा और कुछ रुपयों की चमक पिता के स्नेह और मर्यादा से बड़ी हो गई है। हबीबुल्लापुर की गलियों में पसरा सन्नाटा आज उस बूढ़े पिता की चीखें सुना रहा है जिसे अपनों ने ही लाठियों से अधमरा कर दिया।

विवाद की जड़: जमीन का सौदा और पैसों का बंटवारा

इस खूनी दास्तान की पटकथा तब लिखी गई जब लखन मांझी ने अपनी कुछ पुश्तैनी जमीन बेचने का फैसला किया। ग्रामीण अंचलों में जमीन केवल आय का साधन नहीं, बल्कि प्रतिष्ठा का प्रतीक होती है। लखन मांझी ने हाल ही में जमीन का एक हिस्सा बेचा था, जिससे उन्हें अच्छी-खासी रकम प्राप्त हुई थी। इसी रकम को लेकर उनके छोटे बेटे सुरेश मांझी और भतीजे धर्मेन्द्र मांझी की नजरें टेढ़ी हो गई थीं। वे चाहते थे कि जमीन से मिला सारा पैसा उनके नियंत्रण में रहे। मंगलवार की सुबह से ही घर में इस बात को लेकर गहमागहमी थी। लखन मांझी शायद अपने अनुभव से यह समझ रहे थे कि पैसा गलत हाथों में जा सकता है, इसलिए वे उसे सहेज कर रखना चाहते थे। लेकिन छोटे बेटे के मन में पल रही नफरत और लालच की आग शाम होते-होते ज्वालामुखी बन गई।

मंगलवार की वह काली रात: जब लाठियों ने तोड़ा पिता का दम

मृतक के बड़े बेटे नरेश मांझी द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, मंगलवार की रात विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। छोटा भाई सुरेश मांझी और चचेरा भाई धर्मेन्द्र मांझी अचानक उग्र हो गए। लखन मांझी अपनी बात समझाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन तर्क और ममता की भाषा उन लोगों को समझ नहीं आ रही थी जिन्हें केवल रुपयों का ढेर दिख रहा था। सुरेश और धर्मेन्द्र ने पास ही रखी लाठियां उठा लीं और निहत्थे वृद्ध पिता पर टूट पड़े। 65 साल की कमजोर काया उन जवान हाथों के प्रहारों को झेलने में असमर्थ थी। प्रहार इतने जबरदस्त और बेरहम थे कि लखन मांझी का शरीर लहूलुहान हो गया। घर के भीतर मची इस चीख-पुकार को सुनकर जब तक आसपास के लोग या बड़े भाई नरेश कुछ कर पाते, तब तक लखन मांझी के प्राण पखेरू उड़ चुके थे।

अपराध के बाद का मंजर और फरार आरोपी

वारदात को अंजाम देने के बाद सुरेश मांझी और धर्मेन्द्र मांझी को अपनी गलती का अहसास होने के बजाय कानून का डर सताने लगा। वे दोनों अंधेरे का फायदा उठाकर मौके से फरार हो गए। नरेश मांझी ने जब अपने पिता की निष्प्राण देह देखी, तो कोहराम मच गया। गांव वालों की मदद से पुलिस को सूचना दी गई। अतरी थाना पुलिस ने रात में ही मौके पर पहुँचकर शव को अपने कब्जे में लिया। घटनास्थल पर बिखरा हुआ खून और टूटी हुई लाठियां उस संघर्ष की गवाही दे रही थीं जो एक पिता ने अपनी अंतिम सांस तक अपनों के ही खिलाफ लड़ा था।

पुलिसिया कार्रवाई और कानूनी प्रक्रिया

अतरी थाना अध्यक्ष ने बताया कि मृतक के बड़े बेटे नरेश मांझी के लिखित आवेदन के आधार पर सुरेश मांझी और धर्मेन्द्र मांझी को नामजद अभियुक्त बनाते हुए प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। पुलिस की एक विशेष टीम आरोपियों के संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दे रही है। पुलिस का मानना है कि आरोपी जिले की सीमा पार करने की कोशिश कर सकते हैं, इसलिए आसपास के थानों को भी अलर्ट कर दिया गया है। शव का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह मामला ‘कोल्ड ब्लडेड मर्डर’ का है, जहाँ योजनाबद्ध तरीके से पैसों के लिए हत्या की गई है।

सामाजिक पतन और बुजुर्गों की सुरक्षा का प्रश्न

हबीबुल्लापुर की यह घटना बिहार के ग्रामीण इलाकों में बढ़ रहे संपत्ति विवादों की एक बानगी है। आज के दौर में जमीन की कीमतें आसमान छू रही हैं, जिसने सगे भाइयों और बाप-बेटे के बीच दरार पैदा कर दी है। लखन मांझी जैसे कई बुजुर्ग आज असुरक्षित महसूस कर रहे हैं क्योंकि उनकी अपनी संपत्ति ही उनकी जान की दुश्मन बन रही है। सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि जब तक पारिवारिक संस्कारों और बुजुर्गों के प्रति सम्मान की भावना को पुनः जीवित नहीं किया जाएगा, तब तक ऐसी घटनाओं को केवल कानून के बल पर रोकना कठिन है।

न्याय की प्रतीक्षा में हबीबुल्लापुर

लखन मांझी अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनकी मौत ने पीछे कई सवाल छोड़ दिए हैं। क्या एक बेटे का फर्ज केवल पिता की संपत्ति में हिस्सा लेना है? क्या खून का रिश्ता इतना सस्ता हो गया है कि उसे चंद रुपयों के लिए बहा दिया जाए? अतरी थाना पुलिस के लिए यह साख का सवाल है कि वे कितनी जल्दी इन ‘कलयुगी’ हत्यारों को सलाखों के पीछे पहुँचाते हैं। नरेश मांझी की आंखों में अपने पिता को खोने का दुख और अपने ही भाई के प्रति नफरत साफ देखी जा सकती है। समाज को इस घटना से सबक लेने की जरूरत है कि लालच का अंत हमेशा विनाशकारी होता है।

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