
गया/औरंगाबाद, 21 मई 2026। बिहार के गया और औरंगाबाद जिले से सामने आई एक घटना ने लोगों को भावुक भी किया और हैरान भी। चार साल पहले मंदिर से लापता हुआ मासूम बच्चा आखिरकार अपनी मां से मिल गया। यह चौंकाने वाला खुलासा उस समय हुआ जब पुलिस एक अन्य बच्चे आद्विक के अपहरण मामले की जांच कर रही थी। जांच के दौरान पुलिस को एक महिला के घर से एक और बच्चा मिला, जिसकी पहचान बाद में चार साल पहले गायब हुए शिवम के रूप में हुई।
मां और बेटे के मिलन का दृश्य इतना भावुक था कि वहां मौजूद पुलिसकर्मियों की आंखें भी नम हो गईं। जैसे ही मां ने अपने बेटे को देखा, वह दौड़कर उसे गले लगा लिया। चार वर्षों का दर्द और इंतजार आंसुओं के रूप में बाहर निकल आया। मां बार-बार बेटे को सीने से लगाकर यही कहती रही कि अब उसे छोड़कर कहीं मत जाना।
पूरा मामला तब सामने आया जब 16 मई 2026 को औरंगाबाद के ओबरा देवी मंदिर से आद्विक नामक बच्चे का अपहरण हो गया। घटना के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई शुरू की और लगातार छापेमारी तथा तकनीकी जांच के जरिए 19 मई को आद्विक को गया से सुरक्षित बरामद कर लिया। लेकिन इसी कार्रवाई के दौरान पुलिस को एक और बच्चा मिला, जिसने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया।
पुलिस जब उस महिला के घर पहुंची, जिसके पास आद्विक मिला था, तब वहां मौजूद दूसरे बच्चे को देखकर अधिकारियों को शक हुआ। महिला उस बच्चे को अपना बेटा बता रही थी, लेकिन पुलिस को उसकी बातों में कई विरोधाभास नजर आए। बच्चे की पहचान और दस्तावेजों की जांच शुरू हुई तो मामला और गंभीर होता चला गया।
जांच के दौरान पुलिस ने पुराने रिकॉर्ड खंगाले और पाया कि यह बच्चा चार साल पहले औरंगाबाद के ओबरा देवी मंदिर से गायब हुए शिवम से मिलता-जुलता है। इसके बाद पुलिस ने शिवम के पुराने फोटो और परिवार की जानकारी जुटाई। जांच आगे बढ़ी तो यह स्पष्ट हो गया कि वही बच्चा अब दूसरे नाम से महिला के साथ रह रहा था।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार शिवम का अपहरण वर्ष 2022 में वट सावित्री पूजा के दिन हुआ था। उस समय वह अपनी मां शांति पांडेय के साथ ओबरा देवी मंदिर गया था। पूजा के दौरान भारी भीड़ का फायदा उठाकर आरोपी महिला रंजू देवी बच्चे को अपने साथ ले गई थी। परिवार ने काफी तलाश की, लेकिन उस समय कोई सुराग नहीं मिल पाया था।
सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि आद्विक का अपहरण भी लगभग उसी तरीके से और उसी मंदिर से किया गया था। इससे पुलिस को शक हुआ कि दोनों मामलों के पीछे एक ही व्यक्ति हो सकता है। जांच के दौरान यह शक सही साबित हुआ।
शिवम के गायब होने के बाद उसका परिवार पूरी तरह टूट गया था। मां शांति पांडेय ने बताया कि उन्होंने बेटे को ढूंढने के लिए हर संभव प्रयास किया। रिश्तेदारों, पुलिस और आसपास के जिलों में भी तलाश की गई, लेकिन कोई जानकारी नहीं मिली। धीरे-धीरे परिवार की उम्मीद खत्म होने लगी और बाद में वे दिल्ली जाकर रहने लगे।
मां ने बताया कि बेटे के बिछड़ने का दर्द चार साल तक हर दिन उन्हें परेशान करता रहा। उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि उनका बेटा इस तरह अचानक वापस मिल जाएगा। जब पुलिस ने उन्हें सूचना दी कि उनका बच्चा मिल गया है, तो उन्हें पहले विश्वास ही नहीं हुआ।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी महिला रंजू देवी ने शिवम का नाम बदलकर “रौशन” रख दिया था। उसने बच्चे का दाखिला एक निजी स्कूल में भी कराया था और उसे अपने बेटे की तरह रख रही थी। लंबे समय तक साथ रहने के कारण बच्चा अपने असली परिवार को लगभग भूल चुका था।
पुलिस ने बच्चे को उसकी असली पहचान याद दिलाने के लिए पुराने फोटो और परिवार की तस्वीरें दिखाईं। धीरे-धीरे बच्चे को अपने अतीत की बातें याद आने लगीं और फिर पूरा सच सामने आ गया। अधिकारियों का कहना है कि यदि आद्विक किडनैपिंग केस की जांच उस दिशा में नहीं जाती, तो शायद शिवम कभी अपने असली परिवार तक नहीं पहुंच पाता।
पूछताछ में आरोपी महिला ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए। पुलिस के अनुसार महिला ने बताया कि उसकी शादी के कई साल बाद भी उसे संतान नहीं हुई थी। इसी कारण उसके पति ने दूसरी शादी कर ली थी। इसके बाद वह अकेली रहने लगी। उसने पहले कानूनी तरीके से बच्चा गोद लेने की कोशिश की, लेकिन सफल नहीं हो सकी।
इसके बाद उसने भीड़भाड़ वाले धार्मिक स्थलों और मंदिरों से बच्चों को चुराने की योजना बनाई। पुलिस के अनुसार महिला मानसिक रूप से भी असामान्य व्यवहार कर रही थी। अधिकारियों का कहना है कि मामले के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों की राय भी ली जा सकती है।
आद्विक को लेकर भी आरोपी महिला ने पुलिस को बताया कि उसने उसे लड़की समझकर उठाया था क्योंकि उसके बाल लंबे थे। महिला का कहना था कि वह अपने पास एक बेटा और एक बेटी रखना चाहती थी ताकि उसका परिवार पूरा लग सके। हालांकि पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि क्या महिला ने पहले भी इस तरह की घटनाओं को अंजाम दिया है।
गया और औरंगाबाद पुलिस की इस कार्रवाई की काफी सराहना हो रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यदि जांच तकनीकी और मानवीय दोनों स्तर पर सावधानी से नहीं की जाती, तो चार साल पुराना मामला शायद कभी सामने नहीं आता।
विशेषज्ञों का मानना है कि भीड़भाड़ वाले धार्मिक स्थलों पर बच्चों की सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त सतर्कता की जरूरत है। अक्सर त्योहारों और पूजा के दौरान भीड़ का फायदा उठाकर इस तरह की घटनाएं हो जाती हैं। पुलिस ने अभिभावकों से अपील की है कि वे बच्चों को भीड़ में अकेला न छोड़ें और सतर्क रहें।
फिलहाल दोनों बच्चों को सुरक्षित रखा गया है और आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा रही है। वहीं चार साल बाद बेटे को वापस पाकर शिवम का परिवार भावुक है और पुलिस टीम का लगातार धन्यवाद कर रहा है। यह घटना एक ओर जहां दर्द और बिछड़ने की कहानी है, वहीं दूसरी ओर उम्मीद और इंसाफ की भी मिसाल बन गई है।


