
बिहार के गया शहर में सोमवार सुबह उस समय सनसनी फैल गई जब ड्रग विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने शहर के पीपरपाती इलाके में बड़ी छापेमारी कार्रवाई शुरू कर दी। यह कार्रवाई पूर्व सांसद और पूर्व विधायक रंजीत सिंह उर्फ रंग सिंह के आवासीय परिसर में की गई। सुबह से शुरू हुई इस रेड के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और देखते ही देखते बड़ी संख्या में लोग मौके पर जमा हो गए। बताया जा रहा है कि कार्रवाई के दौरान परिसर से भारी मात्रा में संदिग्ध दवाएं और कई महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए गए हैं। हालांकि अधिकारियों की ओर से अभी तक आधिकारिक रूप से बरामद सामग्री का पूरा विवरण जारी नहीं किया गया है।
जानकारी के अनुसार ड्रग इंस्पेक्टर के नेतृत्व में ड्रग विभाग, कोतवाली थाना पुलिस और अन्य विभागीय अधिकारियों की टीम भारी सुरक्षा व्यवस्था के साथ मौके पर पहुंची। टीम ने परिसर को चारों तरफ से घेर लिया और किसी को भी अंदर-बाहर जाने की अनुमति नहीं दी गई। छापेमारी के दौरान आवासीय परिसर के कई कमरों, स्टोर रूम और गोदामनुमा हिस्सों की बारीकी से जांच की गई।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक अधिकारियों की टीम सुबह अचानक परिसर में पहुंची और बिना किसी पूर्व सूचना के जांच शुरू कर दी। परिसर के भीतर कई घंटों तक लगातार तलाशी अभियान चलता रहा। पुलिस बल की तैनाती इतनी सख्त थी कि मीडिया कर्मियों और आम लोगों को भी अंदर जाने से रोक दिया गया। पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई थी ताकि किसी प्रकार की अव्यवस्था न फैले।
सूत्रों के अनुसार ड्रग विभाग को पिछले कुछ समय से इस परिसर में संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी मिल रही थी। बताया जा रहा है कि यहां कथित रूप से दवाओं के निर्माण, पैकेजिंग और भंडारण का काम किया जा रहा था। विभाग को शक था कि परिसर से नकली या मानकों के अनुरूप नहीं होने वाली दवाओं का कारोबार संचालित किया जा रहा है। इसी सूचना के आधार पर विस्तृत जांच की योजना बनाई गई।
छापेमारी के दौरान कथित तौर पर बड़ी मात्रा में दवाओं के पैकेट, रैपर, लेबल और अन्य सामग्री बरामद की गई है। हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि ये दवाएं पूरी तरह नकली थीं या गुणवत्ता मानकों का उल्लंघन कर तैयार की गई थीं। अधिकारियों का कहना है कि जब्त दवाओं के नमूनों को जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा जाएगा। रिपोर्ट आने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
स्थानीय लोगों का कहना है कि परिसर में लंबे समय से गतिविधियां चल रही थीं, लेकिन वहां क्या काम होता था इसकी सही जानकारी किसी को नहीं थी। कुछ लोगों ने दावा किया कि देर रात तक वहां वाहनों की आवाजाही होती थी और कई बार बड़े पैमाने पर सामान अंदर ले जाया जाता था। हालांकि इलाके के अधिकांश लोग सोमवार की कार्रवाई से हैरान नजर आए।
जैसे ही छापेमारी की खबर फैली, पीपरपाती मोहल्ले में लोगों की भीड़ जुटने लगी। आसपास के दुकानदार और स्थानीय निवासी पूरे दिन कार्रवाई को लेकर चर्चा करते रहे। कई लोगों ने इसे गया जिले में हाल के वर्षों की सबसे बड़ी ड्रग विभाग कार्रवाई बताया। लोगों का कहना था कि यदि वाकई नकली दवाओं का कारोबार चल रहा था तो यह बेहद गंभीर मामला है, क्योंकि इसका सीधा असर आम लोगों की सेहत पर पड़ सकता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि नकली दवाओं का कारोबार समाज के लिए बड़ा खतरा है। ऐसी दवाएं न केवल मरीजों के इलाज को प्रभावित करती हैं, बल्कि कई बार जानलेवा भी साबित हो सकती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार नकली दवाओं के कारण मरीजों की हालत और खराब हो सकती है तथा इलाज का सही परिणाम नहीं मिल पाता। यही वजह है कि इस तरह के मामलों में सख्त कानूनी कार्रवाई बेहद जरूरी मानी जाती है।
वहीं प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि इस मामले में केवल परिसर की जांच तक कार्रवाई सीमित नहीं रह सकती। यदि जांच में किसी बड़े नेटवर्क या सप्लाई चैन का खुलासा होता है तो कई अन्य स्थानों पर भी छापेमारी की जा सकती है। अधिकारियों को शक है कि यह मामला केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं हो सकता।
छापेमारी के दौरान बरामद दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है। बताया जा रहा है कि कुछ ऐसे कागजात मिले हैं जो दवा आपूर्ति और वितरण से जुड़े हो सकते हैं। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि कथित तौर पर बरामद दवाएं कहां से लाई जाती थीं और किन इलाकों में सप्लाई की जा रही थीं।
हालांकि अधिकारियों ने अभी तक किसी प्रकार की आधिकारिक पुष्टि करने से परहेज किया है। उनका कहना है कि जांच पूरी होने और प्रयोगशाला रिपोर्ट आने के बाद ही पूरे मामले का खुलासा किया जाएगा। फिलहाल टीम पूरे परिसर की जांच कर रही है और हर पहलू को गंभीरता से देखा जा रहा है।
इस कार्रवाई के बाद गया जिले में अवैध दवा कारोबार को लेकर फिर से सवाल उठने लगे हैं। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते ऐसी गतिविधियों पर रोक नहीं लगाई गई तो आम लोगों की जिंदगी खतरे में पड़ सकती है। कई सामाजिक संगठनों ने भी मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग और पुलिस संयुक्त रूप से मामले की निगरानी कर रहे हैं। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा जिले में दवा कारोबार से जुड़े अन्य प्रतिष्ठानों की भी जांच की जा सकती है।
फिलहाल पूरे गया शहर में इस छापेमारी की चर्चा तेज है। लोग यह जानने को उत्सुक हैं कि आखिर जांच में क्या सामने आता है और बरामद दवाओं की असलियत क्या है। आने वाले दिनों में इस मामले में कई बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।


