गया में 170 करोड़ की बड़ी परियोजना का शुभारंभ, टेक्नोलॉजी सेंटर से दक्षिण बिहार में रोजगार और कौशल विकास को मिलेगी नई रफ्तार

गया जिले के विकास की दिशा में रविवार का दिन ऐतिहासिक साबित हुआ, जब खिजरसराय प्रखंड के साधुनगर में लगभग 170 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी सेंटर का शिलान्यास किया गया। इस महत्वाकांक्षी परियोजना की शुरुआत मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और केंद्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) मंत्री जीतन राम मांझी ने संयुक्त रूप से भूमि पूजन कर की। राज्य और केंद्र सरकार की इस पहल को दक्षिण बिहार के युवाओं के लिए एक बड़े अवसर के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि इसके माध्यम से रोजगार, कौशल विकास और औद्योगिक निवेश को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

गया लंबे समय से शिक्षा, संस्कृति और धार्मिक पर्यटन के लिए देशभर में अपनी पहचान रखता है। अब यह जिला तकनीकी शिक्षा और औद्योगिक विकास के क्षेत्र में भी नई पहचान बनाने की ओर बढ़ रहा है। साधुनगर में बनने वाला यह टेक्नोलॉजी सेंटर बिहार का दूसरा ऐसा आधुनिक संस्थान होगा, जो युवाओं को उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप तकनीकी प्रशिक्षण प्रदान करेगा। इससे पहले राज्य में इस तरह का केंद्र बिहटा में स्थापित किया गया था। विशेषज्ञों का मानना है कि यह नया केंद्र दक्षिण बिहार के आर्थिक विकास का महत्वपूर्ण आधार बन सकता है।

प्रस्तावित टेक्नोलॉजी सेंटर गया-इस्लामपुर-खिजरसराय मार्ग पर जिला मुख्यालय से लगभग 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित साधुनगर में बनाया जाएगा। करीब 20 एकड़ भूमि पर विकसित होने वाले इस परिसर में आधुनिक तकनीकी प्रयोगशालाएं, उन्नत मशीनरी, प्रशिक्षण इकाइयां और उद्योग आधारित शोध सुविधाएं विकसित की जाएंगी। सरकार का उद्देश्य केवल एक भवन तैयार करना नहीं है, बल्कि ऐसा तकनीकी हब बनाना है जो युवाओं को आधुनिक उद्योगों की मांग के अनुरूप प्रशिक्षित कर सके।

परियोजना की कुल अनुमानित लागत लगभग 170 करोड़ रुपये तय की गई है। इसमें से करीब 83 करोड़ रुपये केवल मुख्य भवन और आधारभूत संरचना के निर्माण पर खर्च किए जाएंगे। इसके अलावा अत्याधुनिक मशीनें, तकनीकी उपकरण, प्रयोगशालाएं और प्रशिक्षण संसाधन स्थापित करने पर भी बड़ी राशि निवेश की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि केंद्र को राष्ट्रीय स्तर के प्रशिक्षण संस्थानों की तर्ज पर विकसित किया जाएगा, ताकि यहां प्रशिक्षण लेने वाले युवाओं को उच्च गुणवत्ता की तकनीकी शिक्षा प्राप्त हो सके।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने कहा कि टेक्नोलॉजी सेंटर शुरू होने के बाद लगभग 10 हजार युवाओं को विभिन्न तकनीकी और औद्योगिक क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में केवल शैक्षणिक डिग्री पर्याप्त नहीं है, बल्कि व्यावहारिक ज्ञान और तकनीकी कौशल भी आवश्यक है। यह केंद्र युवाओं को आधुनिक तकनीक से जोड़ने का काम करेगा और उन्हें रोजगार के लिए तैयार करेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना केवल प्रशिक्षण तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि क्षेत्र में औद्योगिक विकास को भी गति देगी। जब किसी इलाके में प्रशिक्षित मानव संसाधन उपलब्ध होता है तो उद्योगों की रुचि भी वहां निवेश करने में बढ़ती है। ऐसे में गया, नवादा, औरंगाबाद, जहानाबाद और आसपास के जिलों में छोटे एवं मध्यम उद्योगों के विस्तार की संभावनाएं बढ़ सकती हैं। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और आर्थिक गतिविधियों में तेजी आएगी।

दक्षिण बिहार के हजारों युवाओं को अभी तक उच्च स्तरीय तकनीकी प्रशिक्षण के लिए पटना, दिल्ली, पुणे, बेंगलुरु और अन्य बड़े शहरों का रुख करना पड़ता था। टेक्नोलॉजी सेंटर के निर्माण के बाद उन्हें अपने क्षेत्र में ही आधुनिक प्रशिक्षण की सुविधा मिल सकेगी। इससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के युवाओं को भी बड़ा लाभ मिलेगा, क्योंकि उन्हें बाहर जाकर प्रशिक्षण लेने पर होने वाले अतिरिक्त खर्च से राहत मिलेगी।

एमएसएमई क्षेत्र को मजबूत करने के लिहाज से भी इस परियोजना को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। छोटे और मध्यम उद्योग किसी भी राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाते हैं। यदि उन्हें प्रशिक्षित मानव संसाधन, तकनीकी सहायता और आधुनिक संसाधन उपलब्ध हों तो उनकी उत्पादन क्षमता और प्रतिस्पर्धात्मकता दोनों बढ़ती हैं। यही कारण है कि इस टेक्नोलॉजी सेंटर को बिहार के औद्योगिक विकास की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

राज्य सरकार का कहना है कि बिहार में कौशल विकास और रोजगार सृजन को प्राथमिकता दी जा रही है। इसी नीति के तहत विभिन्न जिलों में तकनीकी और व्यावसायिक प्रशिक्षण से जुड़ी परियोजनाएं शुरू की जा रही हैं। गया में बनने वाला यह टेक्नोलॉजी सेंटर उसी प्रयास का हिस्सा है। सरकार को उम्मीद है कि इससे स्थानीय युवाओं को रोजगार के लिए दूसरे राज्यों पर निर्भरता कम करनी पड़ेगी और वे अपने क्षेत्र में ही बेहतर अवसर प्राप्त कर सकेंगे।

हालांकि कार्यक्रम के दौरान एक राजनीतिक विवाद भी सामने आया। जिला परिषद अध्यक्ष नैना देवी और उपाध्यक्ष शीतल प्रसाद यादव ने मंच पर स्थान नहीं मिलने को लेकर नाराजगी जाहिर की। दोनों जनप्रतिनिधियों का कहना था कि निर्वाचित प्रतिनिधियों को उचित सम्मान मिलना चाहिए और इस प्रकार की व्यवस्था पहले कभी नहीं देखी गई। उन्होंने सार्वजनिक रूप से अपनी आपत्ति दर्ज कराई और इसे जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा बताया। इस घटना को लेकर कार्यक्रम स्थल पर कुछ समय तक चर्चा का माहौल बना रहा।

इसके बावजूद शिलान्यास कार्यक्रम निर्धारित योजना के अनुसार संपन्न हुआ और बड़ी संख्या में लोग इस ऐतिहासिक अवसर के साक्षी बने। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी, बिहार विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार, अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण मंत्री संतोष कुमार सुमन, उद्योग एवं खेल मंत्री श्रेयशी सिंह, पूर्व उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा, पुलिस महानिदेशक विनय कुमार सहित कई वरिष्ठ प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारी मौजूद रहे।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह परियोजना तय समय सीमा में पूरी हो जाती है तो गया और पूरे दक्षिण बिहार की विकास यात्रा को नई गति मिल सकती है। रोजगार, कौशल विकास, औद्योगिक निवेश और उद्यमिता को बढ़ावा देने के साथ-साथ यह केंद्र क्षेत्र की आर्थिक तस्वीर बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। आने वाले वर्षों में यह टेक्नोलॉजी सेंटर न केवल हजारों युवाओं के भविष्य को नई दिशा देगा, बल्कि बिहार को तकनीकी और औद्योगिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकता है।

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