HIGHLIGHTS:
- फेक न्यूज एक्सपोज्ड: उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर गैस एजेंसी से सिलेंडर मंगवाने का आरोप पूरी तरह निराधार।
- बड़ा खुलासा: डिप्टी सीएम कार्यालय में ‘SDO’ का कोई पद ही नहीं, तो दबाव किसने बनाया?
- एक्शन मोड: अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ कानूनी शिकंजा कसने की तैयारी, साइबर सेल सक्रिय।
- अपील: संकट के समय भ्रामक खबरों से बचें, बिना जांचे कोई पोस्ट शेयर न करें।
सियासी गलियारों में ‘गैस’ का गुब्बारा फुस्स: सम्राट चौधरी के खिलाफ साजिश बेनकाब
पटना: बिहार में जारी रसोई गैस की किल्लत के बीच सोशल मीडिया पर एक ‘सनसनीखेज’ खबर तैर रही थी कि उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के दफ्तर से किसी अधिकारी ने गैस एजेंसी पर दबाव बनाकर जबरन सिलेंडर मंगवाए हैं। लेकिन ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) की पड़ताल और उपमुख्यमंत्री कार्यालय के स्पष्टीकरण ने इस ‘फेक न्यूज’ की हवा निकाल दी है। सरकारी बयान में साफ कहा गया है कि यह सम्राट चौधरी की छवि धूमिल करने की एक सोची-समझी साजिश है।
“SDO तो है ही नहीं, फिर फोन किसने किया?”: दफ्तर का कड़ा रुख
उपमुख्यमंत्री कार्यालय ने इस मामले पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि जब कार्यालय की संरचना (Structure) में एसडीओ (SDO) जैसा कोई पद ही नहीं है, तो यह कहानी गढ़ने वालों ने कम से कम होमवर्क तो कर लिया होता।
”बिना तथ्यों के इस तरह की खबरें फैलाना न केवल अनैतिक है बल्कि अपराध भी है। उपमुख्यमंत्री कार्यालय के नाम का इस्तेमाल कर जनता में भ्रम पैदा किया जा रहा है। हम ऐसे तत्वों की पहचान कर रहे हैं और उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।” — आधिकारिक प्रवक्ता, उपमुख्यमंत्री कार्यालय
अफवाहबाजों की अब खैर नहीं: रडार पर सोशल मीडिया अकाउंट्स
पटना पुलिस और साइबर सेल अब उन हैंडल्स और प्रोफाइल की जांच कर रही है जिन्होंने सबसे पहले इस भ्रामक जानकारी को फैलाया।
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- ट्रैकिंग: उन व्हाट्सएप ग्रुप्स और फेसबुक पेज को ट्रैक किया जा रहा है जहाँ से यह अफवाह ‘वायरल’ हुई।
- सत्यता की जांच: सम्राट चौधरी ने खुद लोगों से अपील की है कि बिहार में गैस की स्थिति पर सरकार काम कर रही है, ऐसे में किसी भी सूचना को साझा करने से पहले उसकी सत्यता जरूर जांच लें।
VOB का नजरिया: संकट के समय ‘फेक न्यूज’ से बड़ा कोई दुश्मन नहीं!
जब राज्य में पहले से ही गैस की किल्लत को लेकर जनता परेशान है, ऐसे में जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों के खिलाफ अफवाह फैलाना आग में घी डालने जैसा है। ‘SDO’ वाले फर्जी दावे ने साबित कर दिया कि यह केवल सम्राट चौधरी को निशाना बनाने की कोशिश थी। जनता को भी समझना होगा कि हर चमकती चीज सोना नहीं होती और हर ‘फॉरवर्डेड’ मैसेज सच नहीं होता। प्रशासन को चाहिए कि इस मामले में ‘एग्जांपलरी’ एक्शन ले ताकि भविष्य में कोई सरकारी दफ्तर के नाम पर झूठ न परोस सके।


