सहरसा/पटना | बिहार में भ्रष्टाचार पर सरकार का बड़ा हंटर चला है। सहरसा नगर निगम में स्ट्रीट लाइट और डेकोरेटिव लाइट के रख-रखाव के नाम पर चल रहे करोड़ों के घोटाले का पर्दाफाश हुआ है। मामले में कड़ा एक्शन लेते हुए नगर विकास एवं आवास विभाग ने सहरसा की मेयर (महापौर), उनके निजी सचिव राजीव कुमार और सचिव की पत्नी के खिलाफ तुरंत FIR दर्ज करने का आदेश दिया है। इस आदेश के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।
खबर की 3 सबसे बड़ी बातें:
- 50 लाख का मंथली खेल: बिना काम किए हर महीने सरकारी खजाने से 50 लाख रुपए निकाले जा रहे थे।
- अपनों को फायदा: मेयर ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर सचिव की पत्नी की कंपनियों को ठेका दिलाया।
- 3 दिन का अल्टीमेटम: नगर आयुक्त को 3 दिन के अंदर FIR दर्ज कर रिपोर्ट सौंपने का सख्त निर्देश दिया गया है।
निजी कंपनियों के जरिए ऐसे रचा गया करोड़ों का घोटाला
नगर विकास विभाग की जांच में एक बेहद चौंकाने वाला ‘नेक्सस’ (गठजोड़) सामने आया है। मेयर ने अपने पद और रसूख का गलत इस्तेमाल करते हुए अपने ही निजी सचिव राजीव कुमार की पत्नी के नाम पर रजिस्टर्ड दो कंपनियों को फायदा पहुंचाया।
इन कंपनियों के नाम ‘Aim of People’ और ‘Narishakti Infratech & Development Pvt. Ltd.’ हैं। आरोप है कि शहर में लाइटों के मेंटेनेंस के काम की गुणवत्ता की कोई जांच नहीं की गई और इन कंपनियों के जरिए हर महीने 50 लाख रुपये का सरकारी फंड निकाला जाता रहा। जांच में इन दोनों कंपनियों के बीच करोड़ों रुपयों के अवैध लेन-देन (मनी लॉन्ड्रिंग) के सबूत भी मिले हैं।
डीएम की त्रि-स्तरीय जांच समिति में खुली पोल
इस पूरे ‘लाइट घोटाले’ का भंडाफोड़ तब हुआ जब सहरसा के कोसी कॉलोनी निवासी राहुल कुमार पासवान ने इसकी लिखित शिकायत की।
- शिकायत की गंभीरता को देखते हुए सहरसा के जिलाधिकारी (DM) ने तुरंत एक त्रि-स्तरीय (Three-tier) जांच समिति का गठन किया।
- इस उच्च स्तरीय जांच समिति ने दस्तावेजों और ग्राउंड रिपोर्ट को खंगाला तो मेयर, उनके सचिव राजीव कुमार और सचिव की पत्नी की भूमिका पूरी तरह से संदिग्ध और भ्रष्टाचार में लिप्त पाई गई।
अधिकारियों पर भी गिरेगी गाज, 7 दिन का वक्त
सरकार इस मामले में सिर्फ राजनेताओं तक रुकने वाली नहीं है। विभाग ने सहरसा के नगर आयुक्त को स्पष्ट निर्देश दिया है कि इस पूरे घोटाले में नगर निगम के जिन भी अधिकारियों या कर्मचारियों की मिलीभगत रही है, उन्हें चिन्हित किया जाए। ऐसे सभी भ्रष्ट सरकारी कर्मियों के खिलाफ एक सप्ताह (7 दिन) के भीतर अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रस्ताव तैयार कर विभाग को भेजने का कड़ा निर्देश दिया गया है।


