भागलपुर के ममलखा गांव में गंगा ने इस बार ऐसा कहर बरपाया कि लोग घर छोड़ने पर मजबूर हो गए हैं। वर्षों से जारी कटाव और प्रशासनिक लापरवाही ने आखिरकार गांव की किस्मत पर पानी फेर दिया। गांव की सुरक्षा के लिए बना गंगा तटबंध रविवार को टूट गया, और देखते ही देखते गंगा का उफनता पानी पूरे इलाके में फैल गया।
स्कूल में 10 फीट पानी, किताबें और फर्नीचर बह गए
तटबंध टूटते ही गंगा का पानी सरकारी स्कूल में घुस गया। अब वहां पढ़ाई की जगह चारों ओर पानी ही पानी है। फर्नीचर, ब्लैकबोर्ड, बच्चों की किताबें और कॉपियां – सब कुछ बर्बाद हो गया। स्कूल में करीब आठ से दस फीट तक पानी भरा है, और बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं है।
सैकड़ों घर जलमग्न, लोग छत पर शरण लेने को मजबूर
गांव के सैकड़ों घर पूरी तरह जलमग्न हो चुके हैं। कई लोग अपने घरों की छत पर चढ़कर पानी उतरने का इंतज़ार कर रहे हैं, जबकि कुछ ने पास के ऊँचे इलाकों में शरण ली है। खाने-पीने के सामान और पीने के पानी की भारी किल्लत हो रही है।
भाजपा नेता का सीएम को ‘त्राहिमाम’ संदेश
स्थानीय भाजपा नेता दिलीप मिश्रा ने गंगा कटाव निरोधी कार्य में हो रही लापरवाही पर पहले ही सवाल उठाए थे। बांध टूटने के बाद उन्होंने सीधे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को ‘त्राहिमाम संदेश’ भेजते हुए तत्काल राहत-बचाव कार्य की मांग की है। उनका कहना है कि अगर अब भी तेजी से काम नहीं हुआ तो पूरा ममलखा नक्शे से मिट सकता है।
कटाव की रफ्तार डराने वाली
गांव के लोगों के मुताबिक, गंगा रोजाना सैकड़ों मीटर जमीन को निगल रही है। कई घर, खेत और बाग-बगीचे नदी की धारा में समा चुके हैं। प्रशासन और जल संसाधन विभाग की टीम मौके पर पहुंची है, लेकिन कटाव निरोधी कार्य कछुए की चाल से चल रहा है।
ग्रामीणों में गुस्सा और डर
गांव में माहौल बेहद तनावपूर्ण है। लोग गुस्से में हैं कि हर साल गंगा का खतरा बढ़ता है, लेकिन स्थायी समाधान के लिए ठोस कदम नहीं उठाए जाते। इस समय राहत शिविर, नाव की व्यवस्था और जरूरी सामान की सबसे ज्यादा जरूरत है।


