भागलपुर और आसपास के जिलों में बाढ़ की भयावह स्थिति ने जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। गंगा और कोसी नदियों का जलस्तर लगातार बढ़ते-बढ़ते अब ऐतिहासिक रिकॉर्ड तोड़ने के करीब है। शुक्रवार को गंगा भागलपुर में 25 सेंटीमीटर बढ़कर 34.33 मीटर और कहलगांव में 24 सेंटीमीटर बढ़कर 32.34 मीटर पर पहुंच गई। जल संसाधन विभाग की मानें तो शनिवार को भी तेजी जारी रहेगी—भागलपुर में 23 सेमी और कहलगांव में 42 सेमी की संभावित वृद्धि के साथ नदी अब तक के उच्चतम स्तर से बस कुछ ही कदम दूर है। अगर रविवार को भी पानी बढ़ा, तो पुराना रिकॉर्ड टूटना तय है और तबाही का मंजर और विकराल हो जाएगा।
स्पर नंबर 9 पर गंगा का प्रहार
इस्माईलपुर-बिंद टोली स्थित स्पर संख्या 9 की हालत नाजुक हो चुकी है। पहले कराया गया बचाव कार्य तेज धार में बह रहा है। मुख्य अभियंता ई. अनवर जमील खुद कैंप में डटे हैं और बांस-रोल व बालू भरी बोरियों से स्पर को बचाने की जंग लड़ रहे हैं। जमील ने कहा—
“लगता है इस बार गंगा खुद अपने जलस्तर का कीर्तिमान तोड़ने पर आमादा है। हम दिन-रात मेहनत कर रहे हैं, लेकिन पानी की धार इतनी तेज है कि एक पल के लिए भी चैन नहीं मिल रहा।”
लोग सरकारी इमारतों में शरण लेने को मजबूर
सबौर प्रखंड में गंगा का पानी घरों में घुस गया है। रजंदीपुर और बगडोर गांव के लोग अपने मवेशियों के साथ प्रखंड कार्यालय परिसर में शरण लिए हुए हैं। वहां मौजूद राजेंद्र यादव ने रोते हुए कहा—
“हमारा घर, हमारा खेत—सब पानी में डूब गया। यहां आकर सिर्फ जान बची है, बाकी सब कुछ चला गया।”
सुल्तानगंज में नासोपुर चौक से महेशी चौक तक सड़कें जलमग्न हैं, बैंक तक में पानी भर गया है और खेतों में खड़ी सब्जियां बर्बाद हो गई हैं। एक किसान, अनिल मंडल ने कहा—
“हमने साल भर मेहनत करके जो लगाया था, सब खत्म हो गया। अब तो आने वाले दिनों में भूख भी सताएगी।”
नाथनगर में 50 हजार लोग संकट में
गोसाईंदासपुर शाहपुर मार्ग पर चार फीट पानी बह रहा है। बैकुंठपुर, दुधैला, शहजादपुर, सिंहपुर जैसे क्षेत्रों में लोग सामुदायिक किचन की मांग कर रहे हैं। गांव के मुखिया अरविंद मंडल ने नाराजगी जताते हुए कहा—
“राहत का नाम तक नहीं है। लोग भूखे हैं, बच्चे रो रहे हैं और अधिकारी सिर्फ सर्वे कर रहे हैं।”
टीएमबीयू में चोरों की नजर
बाढ़ से खाली हुए लालबाग प्रोफेसर क्वार्टर में चोर सक्रिय हो गए हैं। जेपी कॉलेज नारायणपुर के शिक्षक डॉ. केके मंडल ने कहा—
“पानी तो घर में घुसा ही, ऊपर से चोरों ने घर लूट लिया। लगता है मुसीबत में इंसानियत भी डूब गई है।”
अकबरनगर और कहलगांव में सैकड़ों घर जलमग्न
अकबरनगर के कई गांवों में चार से पांच फीट पानी घुस चुका है, जिससे स्कूल बंद हो गए हैं और लोग रेलवे स्टेशन व मुख्य सड़कों पर डेरा डाले हुए हैं। अकबरनगर शाहकुंड रोड पर शरण लिए लक्ष्मी देवी ने कहा—
“चार दिन से खुले आसमान के नीचे हैं। न खाने को कुछ है, न पीने को साफ पानी। छोटे बच्चे बुखार से तप रहे हैं।”
कहलगांव के अंठावन गांव के आधे से ज्यादा परिवार ऊंचे स्थानों पर तंबू लगाकर जी रहे हैं। वहां के बुजुर्ग मोहन साह ने कहा—
“इस उम्र में हम खेत में हल चलाते थे, आज तंबू में बैठे हैं। गंगा ने सब छीन लिया।”
कोसी भी पीछे नहीं
नवगछिया में कोसी नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। गोराडीह में पांच पंचायतों के 50 गांवों का सड़क संपर्क कट गया है। नदियामा के सुरेश महतो ने कहा—
“हमारे गांव तक कोई नहीं आ सकता, हम भी बाहर नहीं जा सकते। बस नाव ही सहारा है, वो भी हर वक्त नहीं मिलती।”
हर तरफ पानी, पर राहत अधूरी
गांव से लेकर शहर तक, घर से लेकर खेत तक, स्कूल से लेकर सड़क तक—हर जगह पानी ही पानी है। राहत शिविरों में सामुदायिक रसोई अब तक पूरी तरह शुरू नहीं हुई, जिससे विस्थापितों की परेशानी और बढ़ गई है।


