प्रशासन की अनदेखी, लोगों की बेबसी — गांव में अब तक कई घर गंगा में समा चुके
भागलपुर:गंगा नदी का तटवर्ती प्रकोप इस समय भागलपुर के सबौर प्रखंड स्थित ममलखा रामनगर गांव पर टूटा है। हर दिन गंगा की धारा एक और घर, एक और सपना, एक और ज़िंदगी को निगलती जा रही है। कटाव ने गांव के कई मकानों को पूरी तरह तबाह कर दिया है और जो परिवार बचे हैं वे दहशत और बेबसी के साए में हर दिन गुजार रहे हैं।
“नमक-पानी पीकर दिन काट रहे हैं” — बुजुर्ग महिला की आंखों में बसी पीड़ा
गांव की एक वृद्ध महिला ने रोते हुए कहा—
“हमलोग नमक पानी पी के जिये जा रहे हैं… खाने को कुछ नहीं बचा, सरकार से कोई मदद नहीं मिली।”
यह केवल एक महिला की पीड़ा नहीं, बल्कि पूरे गांव की आवाज़ है, जो हर रोज़ धरती के साथ उम्मीद भी खोते जा रहे हैं। मवेशी, ज़रूरी सामान, बच्चों की पढ़ाई— सब कुछ कटाव की भेंट चढ़ रहा है।
प्रशासन से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन अब तक सिर्फ सर्वे कर रहा है, लेकिन राहत या पुनर्वास का कोई ठोस इंतजाम नहीं किया गया। ग्रामीणों ने चेताया है कि अगर जल्द कदम नहीं उठाया गया, तो और भी कई परिवार गंगा के तेज बहाव में उजड़ सकते हैं।
क्या कहता है प्रशासन?
अब तक स्थानीय प्रशासन की ओर से इस क्षेत्र के लिए किसी स्थायी तटबंध या पुनर्वास योजना की घोषणा नहीं हुई है। जबकि सबौर प्रखंड हर साल कटाव की चपेट में आता है, फिर भी स्थायी समाधान नहीं खोजा गया।
ग्राउंड से रिपोर्ट:
- कटे हुए घरों की संख्या: 15 से अधिक
- प्रभावित परिवार: लगभग 50
- स्थानीय स्कूल बंद: 1 प्राथमिक विद्यालय कटाव के नजदीक
- अस्थायी शेल्टर: नहीं उपलब्ध
- भोजन/पानी की स्थिति: बेहद खराब
क्या चाहिए ग्रामीणों को?
- तत्काल राहत शिविर की स्थापना
- कटाव रोकने हेतु आपात तटबंध
- भोजन और स्वच्छ जल की आपूर्ति
- स्थायी पुनर्वास योजना की घोषणा
Voice of Bihar अपील करता है कि जिला प्रशासन और राज्य सरकार इस संवेदनशील स्थिति को गंभीरता से लें और प्रभावित परिवारों के लिए त्वरित राहत और दीर्घकालीन समाधान सुनिश्चित करें।


