संघर्ष से सफलता तक: शिवहर के विकास कुमार बने रेवेन्यू ऑफिसर, तीसरे प्रयास में हासिल की बड़ी कामयाबी

शिवहर: कहते हैं कि मेहनत इतनी खामोशी से करो कि सफलता खुद शोर मचाए। बिहार के शिवहर जिले के विकास कुमार ने इस कहावत को सच साबित कर दिखाया है। बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की 70वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा में शानदार सफलता हासिल करते हुए उनका चयन रेवेन्यू ऑफिसर पद पर हुआ है।

यह उपलब्धि न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे शिवहर जिले के लिए गर्व का विषय बन गई है।

गांव के बेटे ने बढ़ाया जिले का मान

विकास कुमार शिवहर जिले के डुमरी कटसड़ी प्रखंड अंतर्गत श्यामपुर पंचायत के चमैनिया गांव के निवासी हैं। उनके पिता दीप शरण पासवान पुलिस विभाग में वायरलेस सब इंस्पेक्टर के पद पर कार्यरत रहे हैं।

विकास ने प्रारंभिक शिक्षा पूरी करने के बाद दिल्ली विश्वविद्यालय से लाइफ साइंस में स्नातक तथा बाद में पॉलिटिकल साइंस में परास्नातक (एमए) की पढ़ाई पूरी की।

मेडिकल से प्रशासनिक सेवा तक का सफर

शुरुआत में विकास मेडिकल क्षेत्र में करियर बनाना चाहते थे, लेकिन परिस्थितियों और पिता के सपनों को देखते हुए उन्होंने प्रशासनिक सेवा की तैयारी का फैसला किया।

उनके पिता का सपना था कि उनका बेटा प्रशासनिक अधिकारी बने और आज विकास ने वह सपना पूरा कर दिखाया है।

तीसरे प्रयास में मिली सफलता

विकास कुमार की सफलता का सफर आसान नहीं रहा।

  • पहले प्रयास में प्रश्नपत्र लीक होने के कारण परीक्षा रद्द हो गई।
  • दूसरे प्रयास में भी उन्हें सफलता नहीं मिल सकी।
  • लेकिन तीसरे प्रयास में उन्होंने हार नहीं मानी और शानदार प्रदर्शन करते हुए चयनित हो गए।

उनकी यह उपलब्धि धैर्य, निरंतरता और आत्मविश्वास का बेहतरीन उदाहरण है।

सबसे पहले पिता को दी खुशखबरी

20 जून की रात जब BPSC का परिणाम जारी हुआ, तो विकास ने सबसे पहले अपने पिता को फोन कर चयन की जानकारी दी।

बेटे की सफलता की खबर सुनकर पिता भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि यह केवल बेटे की नहीं बल्कि पूरे परिवार की सफलता है।

“उनके सफल होने के साथ-साथ हमें भी सफलता मिली है। मेरा बेटा ऊंचे पद पर पहुंच गया है। यह उसकी तीसरी कोशिश की मेहनत का परिणाम है।”

— दीप शरण पासवान, पिता

गांव में जश्न और आतिशबाजी

रिजल्ट आते ही चमैनिया गांव में खुशी की लहर दौड़ गई। लोगों ने मिठाइयां बांटी, आतिशबाजी की और परिवार को बधाइयां दीं।

देर रात तक गांव में उत्सव जैसा माहौल बना रहा। ग्रामीणों ने इसे पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का क्षण बताया।

मां ने जताई खुशी

विकास की मां राम दुलारी देवी ने भावुक होकर कहा कि उन्होंने हमेशा अपने बेटे पर भरोसा किया था।

“मेरा बेटा बचपन से ही संस्कारी और मेहनती रहा है। संघर्ष के दिन अब पीछे छूट गए हैं। हम चाहते हैं कि वह आगे भी इसी तरह सफलता हासिल करता रहे।”

— राम दुलारी देवी, मां

बेटे की पढ़ाई के लिए पिता ने छोड़ी नौकरी

विकास की सफलता के पीछे उनके पिता का त्याग भी कम नहीं है।

बताया जाता है कि वे पहले केंद्र सरकार की नौकरी में थे, लेकिन दूर-दराज की पोस्टिंग के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही थी। ऐसे में उन्होंने नौकरी छोड़ दी और दिल्ली में रहकर बेटे की पढ़ाई में सहयोग करने लगे। बाद में उन्होंने एक सिक्योरिटी एजेंसी में काम शुरू किया ताकि परिवार और पढ़ाई दोनों का संतुलन बना रहे।

UPSC है अगला लक्ष्य

विकास कुमार ने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता, गुरुजनों और परिवार को दिया है।

उन्होंने कहा कि मेहनत और संघर्ष कभी व्यर्थ नहीं जाते। यदि लगातार प्रयास किया जाए तो सफलता अवश्य मिलती है।

“बहुत अच्छा महसूस हो रहा है। अगर मेहनत और संघर्ष पूरी लगन से किया जाए तो उसका परिणाम जरूर मिलता है। बिहार मेरी मातृभूमि है और जल्द ही यहां आऊंगा।”

— विकास कुमार, BPSC चयनित अभ्यर्थी

विकास ने यह भी कहा कि उनका अंतिम लक्ष्य अभी भी UPSC है और वे आगे भी अपनी तैयारी जारी रखेंगे।

युवाओं के लिए प्रेरणा

साधारण ग्रामीण पृष्ठभूमि से निकलकर रेवेन्यू ऑफिसर बनने वाले विकास कुमार आज हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन गए हैं। उनकी कहानी यह संदेश देती है कि संसाधनों की कमी नहीं, बल्कि दृढ़ इच्छाशक्ति और लगातार मेहनत ही सफलता की असली कुंजी है।

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