रेल की पटरी से लेकर गौशाला तक, मोदी का भाषण सुनने को यूं बेताब दिखे मतदाता

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को बिहार विधानसभा चुनाव में प्रचार की शुरुआत की। कोरोना वायरस संकट के चलते चुनाव प्रचार का वह रंग इस बार नहीं दिख रहा है जो पहले के चुनावों में दिखा करता था। हालांकि, डिजिटल माध्यमों ने प्रधानमंत्री मोदी को बिहार के गांवों और कस्बों तक पहुंचा दिया।

लोगों ने अपने टीवी, स्मार्टफोन्स और लैपटॉप आदि की सहायता से प्रधानमंत्री का भाषण सुना। प्रधानमंत्री का भाषण सुनने के लिए लोगों में इतनी बेताबी थी कि जो रेल पटरी के पास था तो वहीं बैठ गया और जो गौशाला में था तो वहीं फोन निकाल कर उन्हें सुनने लगा।

मोदी के भाषण को सुनने का लोगों में इतना आकर्षण था कि जो जहां था वहीं अपने-अपने फोन पर भाषण को देखने लगा। चुनाव प्रचार करते हुए प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय जनता दल (राजद) समेत पूरे विपक्ष को निशाने पर लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार के विकास की हर योजना को अटकाने-लटकाने वाले इन दलों ने अपने 15 साल के शासनकाल में राज्य को लगातार लूटा और सत्ता को अपनी तिजोरी भरने का साधन बनाया।

मुख्यमंत्री नीतीश सरकार को दोबारा सत्ता में लाने की अपील करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि बिहार की जनता भ्रम में नहीं है। बिहार की जनता आत्मनिर्भर होने के लिए नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए की सरकार बनाने का मन बना चुकी है। उन्होंने कहा, बिहार के लोगों ने मन बना लिया है, ठान लिया है कि जिनका इतिहास बिहार को बीमारू बनाने का है, उन्हें आसपास भी नहीं फटकने देंगे।

प्रधानमंत्री ने आरोप लगाया कि जब बिहार के लोगों ने इन विपक्षी दलों को सत्ता से बेदखल कर दिया और नीतीश कुमार को मौका दिया तो ये बौखला गए और इसके बाद 10 साल तक इन लोगों ने यूपीए की सरकार में रहते हुए बिहार पर और बिहार के लोगों पर अपना गुस्सा निकाला। मोदी ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि इन नेताओं का बिहार की जनता की जरूरतों से कभी सरोकार नहीं रहा।

मोदी ने कहा कि यही कारण है कि पूरे बिहार में लंबे समय तक बिजली, सड़क, पानी जैसी मूल सुविधाओं का विकास नहीं हो पाया। मोदी ने कहा राजग के विरोध में विपक्षी दलों ने मिलकर जो पिटारा बनाया है, उसकी रग-रग से बिहार के लोग वाकिफ हैं। विपक्षी महागठबंधन पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, जो लोग नक्सलियों को, हिंसक गतिविधियों को खुली छूट देते रहे, आज वे एनडीए के विरोध में खड़े हैं।

मोदी ने कहा, ‘आज एनडीए के सभी दल मिलकर आत्मनिर्भर और आत्मविश्वास से भरे बिहार के निर्माण में जुटे हैं। बिहार को अभी भी विकास के सफर में मीलों आगे जाना है। नई बुलंदी की तरफ उड़ान भरनी है।’ उन्होंने कहा कि बिहार आत्मनिर्भरता के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है। अगर बिहार में विरोध और अवरोध को जरा भी मौका मिला तो बिहार की गति और प्रगति दोनों धीमी पड़ जाएगी।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन के दौरान बिहार के लोगों को राजद नीत पूर्ववर्ती बिहार सरकार के शासनकाल के दौरान कानून एवं व्यवस्था की खराब स्थिति को याद दिलाया। मोदी ने कहा कि आज बिहार में पीढ़ी भले बदल गई हो, लेकिन बिहार के नौजवानों को ये याद रखना है कि बिहार को इतनी मुश्किलों में डालने वाले कौन थे? उन्होंने कहा कि यहां कई समस्याओं की जड़ में 90 के दशक की अव्यवस्था और कुशासन है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि बिहार के लोग भूल नहीं सकते वो दिन जब सूरज ढलते का मतलब होता था, सब कुछ बंद हो जाना, ठप पड़ जाना। उन्होंने कहा कि वो दिन जब सरकार चलाने वालों की निगरानी में दिन-दहाड़े डकैती होती थी, हत्याएं होती थीं, रंगदारी वसूली जाती थी। राजद पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि वो दौर था जब एक शहर से दूसरे शहर में जाते वक्त ये पक्का नहीं रहता था कि उसी शहर पहुंचेंगे या बीच में अपहृत हो जाएंगे।

पीएम मोदी ने कहा कि आज बिजली है, सड़कें हैं, लाइट है और सबसे बड़ी बात वो माहौल है जिसमें राज्य का सामान्य नागरिक बिना डरे रह सकता है, जी सकता है और अंधेरे से उजाले की ओर बढ़ना इसी को कहते हैं। तेजस्वी यादव के 10 लाख नौकरियों के वादें पर सवाल उठाते हुए मोदी ने कहा कि जिन लोगों ने एक-एक सरकारी नौकरी को हमेशा लाखों-करोड़ों रुपये कमाने का जरिया माना,वो फिर बढ़ते हुए बिहार को ललचाई नजरों से देख रहे हैं।

 

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