काम आएगी नीतीश से दोस्ती-सुशील मोदी जा सकते हैं राज्यसभा,लोजपा लगी है रीना पासवान के लिए

बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी संभवत: राज्यसभा जा सकते हैं।केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान के निधन से रिक्त हुई सीट पर भाजपा-जदयू की ओर से सुशील मोदी को राज्यसभा में भेजे जाने के आसार बलवती हुए हैं।गौरतलब है कि बिहार में नीतीश कुमार के नेतृत्व में नई सरकार के गठन में सुशील कुमार मोदी उप मुख्यमंत्री पद से वंचित रह गए हैं।हालांकि उनके उपमुख्यमंत्री नहीं बनने का वास्तविक कारण सामने नहीं आ सका है।मगर उनके पसंदीदा विधायकों को ही उपमुख्यमंत्री पद दिया गया है।उपमुख्यमंत्री पद नहीं मिलने के बाद सुशील मोदी का ट्वीट काफी वायरल हुआ था।जिसमें उन्होंने लिखा था कि उनसे कार्यकर्ता का पद तो कोई नहीं छीन सकता है।बिहार में लगभग 15 वर्षों तक नीतीश कुमार तथा सुशील मोदी की जोड़ी मुख्यमंत्री- उपमुख्यमंत्री पद में कामयाब रही है। पहली बार ऐसा हुआ है जब नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बने हैं,मगर उनके कैबिनेट में सुशील मोदी उप मुख्यमंत्री के रूप में नहीं दिख रहे हैं। हालांकि महागठबंधन के साथ जब नीतीश कुमार ने सरकार बनाई थी।तब भी सुशील मोदी ढाई वर्षो तक उनके कैबिनेट से वंचित रह गए थे। इधर राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा तेज है कि पूर्व केंद्रीय मंत्री तथा लोजपा के संस्थापक रामविलास पासवान के निधन से खाली हुए राज्यसभा के सीट पर भाजपा-जदयू सुशील मोदी को भेज सकती है।वैसे लोजपा को अभी भी उम्मीद है कि कि रामविलास पासवान के निधन से रिक्त सीट पर उनकी धर्मपत्नी रीना पासवान को भाजपा जरूर भेजेगी।अभी तक लोजपा ने औपचारिक तौर पर तो कुछ नहीं कहा है।मगर अंदरूनी सूत्रों ने बताया कि लोजपा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा गृह मंत्री अमित शाह के संपर्क में है।कहा जा रहा है कि रामविलास पासवान के निधन से रिक्त सीट पर रीना पासवान को भेजे जाने का पक्ष में लोजपा लॉबिंग कर रही है।गत विधानसभा चुनाव के दौरान लोजपा तथा जदयू के रिश्तो में आई जबरदस्त कड़वाहट के मद्देनजर भाजपा फिलहाल प्रदेश में जदयू को नाराज कर रीना पासवान को राज्यसभा में भेजने की स्थिति में नहीं दिखती है।अगर भाजपा लोजपा की ओर से रीना पासवान के नाम को आगे बढ़ाती है।तो जदयू कभी समर्थन नहीं करेगी।ऐसे में भाजपा को किसी ऐसे नाम भी तलाश है।जिस पर जदयू का समर्थन आसानी से मिल जाए।ऐसे में सुशील मोदी का नाम सबसे आगे है।दरअसल सुशील मोदी उपमुख्यमंत्री तो नहीं रह गए हैं।ऐसे में उन्हें दिल्ली राज्यसभा में भेजने के लिए नीतीश कुमार जरूर हामी भर देंगे।दरअसल रिक्त हुए इस सीट पर विजय प्राप्त करने के लिए 122 विधायकों के मतों की आवश्यकता है। जिसके लिए सिर्फ भाजपा-जदयू ही नहीं बल्कि हम तथा वीआईपी की भूमिका भी अहम हो गई है।

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